Thecsrjournal App Store
Thecsrjournal Google Play Store
April 5, 2025

अंतरराष्ट्रीय खदान जागरूकता  दिवस -‘International Day For Mine Awareness’

International Day For Mine Awareness And Assistance In Mine Action‘ के रूप में 4 April के दिन को Celebrate किया जाता है। इस दिन को ख़ास बनाने का यह प्रस्ताव 8 दिसंबर 2005 को संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) द्वारा पारित किया गया था और पहली बार 4 अप्रैल 2006 को यह दिवस मनाया गया। तब से संयुक्त राष्ट्र की खान कार्रवाई सेवा (United Nations Mine Action Service – UNMAS) इस दिशा में काम करने का प्रयास कर रही है । इसे मनाने  का उद्देश्य ‘बारूदी सुरंगों’ (Land Mines) के बारे में जागरूकता बढ़ाना’ लोगों के इसके बारे में समझना और उनके उन्मूलन की दिशा में उचित क़दम उठाना है, जबकि खनन कार्रवाई (Mine Action) का तात्पर्य है ‘बारूदी सुरंगों और युद्ध के विस्फोटक अवशेषों को हटाना और खतरनाक क्षेत्रों की पहचान कर उन्हें बंद करने के प्रयास करना।’ इसी मकसद से हर साल 4 अप्रैल को अंतरराष्ट्रीय खदान जागरूकता  दिवस ‘International Day For Mine Awareness’ दिवस मनाया जाता है। यह दिन संयुक्त राष्ट्र माइन एक्शन सर्विस (UNMAS) ने शुरू किया था।

International Day for Mine Awareness

प्रतिवर्ष 4 अप्रैल को खदान जागरूकता और खदान कार्रवाई में सहायता के लिए अंतर्राष्ट्रीय खदान जागरूकता दिवस (International Day For Mine Awareness) को मनाने की घोषणा UNGA द्वारा 8 दिसंबर 2005 को की गई। आज दुनिया भर के देश संयुक्त राष्ट्र UN के साथ मिलकर यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहे हैं कि युद्धों के दौरान बची हुई बारूदी सुरंगों और विस्फोटकों वाले स्थानों को Mine रहित कर लोगों के लिए सुरक्षित बनाया जाए। 20 वर्षों से अधिक समय से, संयुक्त राष्ट्र माइन एक्शन सर्विस UNMAS खतरनाक विस्फोटकों से प्रभावित लोगों की मदद कर रही है। वे नागरिकों और सहायता कर्मियों को इन खतरों से सुरक्षित रखने पर ध्यान केंद्रित करते हैं और ज़मीन के नीचे बिछी Mines को हटाने का प्रयास करते हैं। UNMAS जहां लोगों को सुरक्षित रखने में मदद करता है, साथ ही UN को जरूरतमंद लोगों तक मदद पहुंचाने में भी मदद करता है और उन लोगों के अधिकारों के लिए खड़ा होता है, जिन्हें अपने घर छोड़ने के लिए मजबूर किया गया है।

International Day For Mine Awareness का इतिहास

1997 में Anti-Karmik Mine Ban Convention की स्थापना की गई, जिसने सबसे पहले Mines के खिलाफ अभियान का नेतृत्व किया और तब से लेकर अब तक तकरीबन 164 देशों ने इसका समर्थन किया है। बाद में, 8 दिसंबर 2005 को, संयुक्त राष्ट्र महासभा UNGA ने 4 अप्रैल को वैश्विक स्तर पर हर साल खदान कार्रवाई के लिए अंतर्राष्ट्रीय खदान जागरूकता और सहायता दिवस (International Day for Mine Awareness and Assistance in Mine Action) के रूप में घोषित किया। तब से UNMAS War Mines प्रभावित लोगों की जरूरतों को पूरा करने और नागरिकों, मानवतावादियों और शांति सैनिकों के लिए विस्फोटक खतरों को खत्म करने की दिशा में काम कर रहा है। UNMAS को Land Mines से प्रभावित लोगों की मदद के लिए दुनिया भर के अन्य संगठनों और राज्यों से भी सहायता मिलती है।

भूमि खदान (Land Mines) और दुर्घटनाएं

जानकारी के मुताबिक हर घंटे Land Mines की वजह से लोग जान गंवाते हैं, या Land Mines पर कदम पड़ जाने से उनके अंग क्षतिग्रस्त हो जाते हैं। इनमें से ज्यादातर वो नागरिक हैं, जो शांतिपूर्वक अपने देशों में रह रहे हैं और जिनका युद्ध से कुछ लेना देना नहीं है। Anti-Personnel Mines के उपयोग, भारी मात्रा में संचय, उत्पादन और हस्तांतरण पर प्रतिबंध लगाने के लिए एक वैश्विक समझौता हुआ था। लेकिन फिर भी कुछ देश अब भी समझौते पर लापरवाही बरत रहे हैं और ऐसे विस्फोटक हथियार बना रहे हैं। 1997 में ‘एंटी-पर्सनल माइन बैन कन्वेंशन’ Anti-Personnel Mine Ban Convention को हस्ताक्षर के लिए फिर खोला गया, जिसमें 164 देशों ने हस्ताक्षर किया था। लेकिन समझौते पर सहमति जताने वाले 164 देशों में से कुछ देश अब भी भारी मात्रा में इसका इस्तेमाल और संचय कर रहे हैं। 2019 में Land Mines की वजह से कम से कम 5,554 दुर्घटनाएं दर्ज की गईं। ERW के मुताबिक 2,170 लोगों की मृत्यु दर्ज की गई, 3,357 लोग घायल हुए और 27 दुर्घटनाओं की संख्या अज्ञात बताई गई। हालांकि, 2019 में Land Mines से हुई कुल दर्ज की गई घटनाएं 2018 में दर्ज की गई दुर्घटनाओं से कम थीं। ERW के मुताबिक 2018 में LandMine से होने वाली दुर्घटनाओं की संख्या 6,897 दर्ज की गई थी। 2013 में दर्ज की गई दुर्घटनाओं का यह 60 प्रतिशत है। 2013 में सबसे कम 3,457 दुर्घटनाएं दर्ज की गई थी। लैंडमाइन से होने वाली 100 से अधिक दुर्घटनाएं क्रमश: अफगानिस्तान, कोलंबिया, इराक, माली, नाइजीरिया, यूक्रेन और यमन देश में दर्ज की गई।  2019 में, लैंडमाइन से होने वाली दुर्घटनाओं में ज्ञात उम्र के मुताबिक बच्चों का आंकड़ा 43 प्रतिशत था, जबकि पुरुष और लड़कों का आंकड़ा 85 प्रतिशत था।

Land Mines (बारूदी सुरंग) बनाने वाले देश

12 ऐसे देशों को List किया गया है जो समझौते का उलंघन करते हुए लैंडमाइन (बारूदी सुरंग) बना रहे हैं। इनमें चीन, क्यूबा, भारत, ईरान, म्यांमार, उत्तर कोरिया, पाकिस्तान, रूस, सिंगापुर, दक्षिण कोरिया, अमेरिका और वियतनाम आदि देश शामिल हैं। भारत-पाकिस्तान के बीच LOC एक वास्तविक सीमा है, जो कश्मीर को भारत प्रशासित कश्मीर और पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में विभाजित करती है। यह दुनिया की सबसे खतरनाक और सैन्यीकृत सीमाओं में से एक है और दोनों तरफ भारतीय और पाकिस्तानी सेनाओं द्वारा कड़ी सुरक्षा की जाती है। Indian Army ने सबसे पहले 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान नियंत्रण रेखा पर बारूदी सुरंगें बिछाईं, फिर 1971 के भारत-पाक युद्ध, 1999 के कारगिल युद्ध और फिर 2001 में कश्मीर में भारत और पाकिस्तान के बीच सैन्य गतिरोध के दौरान Operation Parakram के दौरान! भारत की ही तरह पाकिस्तान ने भी बारूदी सुरंग प्रतिबंध संधि पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं। लैंडमाइन मॉनिटर रिपोर्ट 2004 के अनुसार, पाकिस्तान द्वारा बड़े पैमाने पर Anti-Personnel Land Mine का अंतिम बार प्रयोग, LOC पर दिसंबर 2001 और 2002 के मध्य के बीच हुआ था।
भारत में हर साल हजारों लोग बारूदी सुरंगों के चलते या तो मारे जाते हैं, या फिर अपंग हो जाते हैं। पिछले दो सालों में दस हजार से अधिक लोग बारूदी सुरंगों के चलते अपंग हो गए। इसका सबसे बड़ा कारण अवैध खनन और परिवहन है, जिसमें लोग छोटे लालच में आकर अपनी जान तक गवां देते है। लेकिन, राजस्थान में इन Land Mines से होने वाली दुर्घटनाओं की संख्या काफी कम है, क्योंकि प्रदेश सरकार वैध खनन को प्रोत्साहित करती है, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका घट जाती है। International Day for Mine Awareness and Assistance in Mine Action का मुख्य उददेश्य ही यही है कि ऐसे लोगों को जागरूक किया जाए, जिन्हे इन बारूदी सुरंगों के गहरे घाव मिले है, जिन्होंने इन Land Mines के चलते अपनों को खोया है, युद्ध का हिस्सा न होते हुए भी युद्ध की विभीषिका झेली है।

दुनिया में तेजी से बढ़ रहा Land Mines का इस्तेमाल

Combodia की राजधानी Phnom Penh में आयोजित पांचवी Land Mine Ban संधि की समीक्षा बैठक में, संयुक्त राष्ट्र UN महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने सभी देशों से लैंड माइन का प्रयोग समाप्त करने की अपील की। उन्होंने देशों को संधि में शामिल होने का निमंत्रण दिया और कहा कि बिना Land Mines के भी दुनिया संभव है। अपने संबोधन में गुटेरेस ने Combodia के Land Mines के खिलाफ चलाए गए अभियान की तारीफ करते हुए कहा कि कंबोडिया को दूसरे देशों के साथ अपना अनुभव साझा करना चाहिए। कंबोडिया लगभग एक दशक तक युद्ध और गृह युद्ध के कारण दुनिया का सबसे ज्यादा Land Mine से प्रभावित देश था। लेकिन वहां की सरकार ने इसे देश से हटाने के लिए बड़े स्तर पर अभियान चलाया, जिसमें सफलता भी मिली।

क्या है Land Mine संधि

Canada के Ottawa में 1997 में Land Mine संधि पर हस्ताक्षर किए गए थे, लेकिन यह 1999 में प्रभाव में आई। इस संधि के तहत यह प्रावधान था कि इस संधि के सभी सदस्य देश Land Mine के प्रयोग को धीरे-धीरे न्यूनतम स्तर तक लाएंगे। हालांकि, इस संधि पर कई देशों ने हस्ताक्षर नहीं किए, जिनमें दुनिया में लैंड माइन का सबसे ज्यादा उत्पादन करने वाले देश अमेरिका, चीन, भारत, पाकिस्तान, उत्तर कोरिया और रूस शामिल हैं। Land Mine Reporter की रिपोर्ट के अनुसार, 2023-24 में भी कई देश इसका प्रयोग कर रहे हैं। खासकर रूस, म्यांमार, ईरान और उत्तर कोरिया में इसका प्रयोग बढ़ा है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि कोलंबिया, भारत, म्यांमार और पाकिस्तान में Non-State Armed Groups भी इसका प्रयोग कर रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, Africa के साहेल क्षेत्र में करीब दो दर्जन से ज्यादा देशों में इसका प्रयोग हो रहा है। पिछले साल इसके कारण 5,757 लोगों की मौत हुई। Ukrain-Russia War में इसका प्रयोग बड़े पैमाने पर हो रहा है। रूस में युद्ध में इसका इस्तेमाल बहुत बड़े पैमाने पर हुआ है, जिससे कई नागरिकों ने अपनी जान गंवाई है। कुछ दिन पहले ही America ने युद्ध में साथ देते हुए Ukrain को Land Mines मुहैया कराई हैं।

Anti Personnel और Anti Tank लैंड माइंस

600 से ज़्यादा तरह की बारूदी सुरंगें हैं, जिन्हें दो Main Categories में बांटा गया है – Anti-Personnel (AP) और Anti-Tank बारूदी सुरंगें। AP बारूदी सुरंगें अलग-अलग आकार की होती हैं और इन्हें ज़मीन में दफ़न करके या ज़मीन के ऊपर बिछाया जाता है। एक आम प्रकार की बारूदी सुरंग जिसे ‘Butterfly Land Mine’ नाम से जाना जाता है – चमकीले रंगों में आती है, जो जिज्ञासु बच्चों को आकर्षित करती है। बच्चे खिलौना समझकर इसे उठा लेते हैं और धमाके का शिकार बनते हैं। खेती पर निर्भर कई देशों में Land Mines एक बड़ी समस्या हैं। Vietnam के Binh Dinh प्रांत में, जहां कई लोग चावल की खेती करके अपना जीवन यापन करते हैं, युद्ध समाप्त होने के चार दशक से भी ज़्यादा समय बाद भी 40 प्रतिशत ज़मीन Land Mines से भरी हुई है और खेती के लायक नहीं है। Afghanistan में बारूदी सुरंगों ने और जगहों की तुलना में कहीं अधिक लोगों को अपंग बनाया है या उनकी जान ली है। Afghanistan में 1989 से अब तक 1.8 लाख से ज्यादा Land Mines को हटाया गया है, जिससे 3,011 वर्ग किमी से अधिक भूमि मुक्त हुई है, और देश भर में 3,000 से अधिक ग्रामीण समुदायों को लाभ मिला है।

Russia और Ukraine कर रहे Land Mine का इस्तेमाल

Land Mine के उपयोग को रोकने के अंतर्राष्ट्रीय प्रयासों के बावजूद, 2022 में Ukraine पर Russia के हमले के दौरान, रूसी और यूक्रेनी दोनों सेनाओं ने लैंड माइंस का इस्तेमाल किया। यूक्रेनी अधिकारियों का दावा है कि रूसी सेना ने यूक्रेनी शहरों से अपनी वापसी के दौरान हज़ारों Land Mines या अन्य विस्फोटक उपकरण लगाए, जिनमें नागरिक क्षेत्र भी शामिल हैं। फरवरी 2022 में Russia के आक्रमण के बाद Ukraine सहित कई संघर्ष स्थितियों में इनका बिछाया जाना अब भी जारी है। मध्य Republican Africa और Congo लोकतांत्रिक गणराज्य जैसे देश Malizia समूह के लोगों पर हमला करने और उन्हें डराने के लिए बारूदी सुरंगों का उपयोग करते हैं, जिससे वे अपनी ज़मीन और अपने घरों से दूर रहते हैं। 90 के दशक के उत्तरार्ध से, 5.5 लाख से अधिक बारूदी सुरंगें नष्ट कर दी गई हैं, 30 से अधिक देश बारूदी सुरंगों से मुक्त हो गए हैं, हताहतों की संख्या में नाटकीय रूप से कमी आई है और पीड़ितों और जरूरतमंद समुदायों की सहायता के लिए संयुक्त राष्ट्र स्वैच्छिक ट्रस्ट फंड्स सहित कई तंत्र स्थापित किए गए हैं।

भारतीय सेना को मिला AI से लैस Smart Mine System

भारतीय सेना ने एक नए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस AI तकनीक वाली  Human In Loop Land Mine System तैयार किया है। AI Land Mine सिस्टम की सबसे बड़ी खासियत है कि यह एक स्क्रीन से जुड़ी होगी। जब भी कोई इसके दायरे में आएगा तो यह स्क्रीन पर इंडिकेट होने लगेगा। यही नहीं, वह यह भी जानकारी देगा कि लैंड माइंस के दायरे में आने वाला कोई इंसान है या फिर कोई वाहन। फिर Land Mine को कंट्रोल करने वाला शख्स टारगेट को देखकर इसे एक्टिवेट कर देगा। यह एक ऐसा माइनिंग सिस्टम है, जिसे सिर्फ अपनी ही आर्मी के जवान एक्टिवेट कर पाएंगे। इस तकनीक का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि युद्ध क्षेत्र में अपनी ही बिछायी लैंड माइंस से अपना ही नुकसान नहीं होगा, बल्कि दुश्मन के परखच्चे उड़ जाएंगे। दुनिया के कई देशों में पहले से ही इस तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है।
आर्मी इस नए Smart Mine को नेटवर्क कमांड इम्यूनिशन सिस्टम (Network Command Immunition System) भी कहते हैं। आम तौर पर युद्ध क्षेत्र में बड़े पैमाने पर लैंड माइंस का इस्तेमाल करना होता है। इसमें कई बार इस बात का खतरा होता था कि युद्ध क्षेत्र से लौटते वक्त अपने ही सैनिक कहीं इसकी चपेट में न आ जाएं। कई बार ऐसे हादसे भी हो चुके हैं। इस नए AI Land Mine जरिए ऐसी घटनाओं को रोका जा सकेगा, और माइंस की लोकेशन Navigation से पता लग सकेगी। AI Land Mines को दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है। अभी तक ऐसी कोई तकनीक भारत में मौजूद नहीं थी जिसमें Land Mines को इंस्टाल किए जाने के बाद इसे कंट्रोल किया जा सके, लेकिन अब इस सिस्टम में यह सुविधा मिली है। अभी तक Indian Army जिस तरह से Land Mine System इस्तेमाल कर रही थी, उन्हें दोबारा से यूज नहीं किया जा सकता था। इसके साथ दिक्कत यही थी कि अगर कोई फिर से इसके पास गया तो यह तुरंत ब्लास्ट हो जाता है। नई तकनीक में सुविधा यही है कि अगर यह इस्तेमाल नहीं हो सका तो इसे जमीन से निकाल लिया जाएगा। इसके बाद दूसरे ऑपरेशन में इसे फिर से प्लांट किया जा सकता है।
देश भर में बिछी ये बारूदी सुरंगें आज भी ज़िंदा लोगों के लिए मौत का पैग़ाम लेकर आती हैं। युद्ध अक्सर दो देशों के बीच लड़े जाते हैं, लेकिन उसका ख़ामियाज़ा आम जनता उठाती है,जिनका सरहदों से कुछ लेना देना नहीं होता। सदियों से Land Mines का घाव भरने की कोशिश की जा रही है, और हमेशा की जाती रहेगी। लेकिन सुकून के लिए इनका निर्माण और इस्तेमाल, दोनों को Ban करना होगा।

Latest News

Popular Videos