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टीबी के ख़ात्मे के लिए इंडियन ऑयल करेगी सीएसआर खर्च

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चुनावी राज्यों में टीबी के ख़ात्मे के लिए इंडियन ऑयल करेगी सीएसआर खर्च
 
उत्तर प्रदेश और पंजाब में चुनावी सरगर्मियां तेज है। इस बीच सरकारी कंपनी इंडियन ऑयल ने भी बड़ा फैसला लिया है। चुनावी राज्यों में इंडियन ऑयल ने बड़े पैमाने पर सीएसआर खर्च करने का निर्णय लिया है। इंडियन ऑयल ने उत्तर प्रदेश के 75 जिले और पंजाब में 23 जिले में शहर समन्वय समितियों, जिला स्वास्थ्य समितियों, तकनीकी सहायता समूहों, आदि के साथ एकीकृत और प्राथमिकता वाली पहल के माध्यम से एक सक्षम वातावरण प्रदान करके भारत में राष्ट्रीय टीबी रोग उन्मूलन कार्यक्रम (National Tuberculosis Elimination Program) का समर्थन करने का संकल्प किया है।

उत्तर प्रदेश के 75 जिलों और पंजाब में 23 जिलों में इंडियन ऑयल करेगी टीबी के खिलाफ सीएसआर

इंडियन ऑयल (Indian Oil) के इस सीएसआर पहल का लक्ष्य है कि अगले तीन सालों तक हर साल उत्तर प्रदेश और पंजाब के सभी लोगों की स्क्रीनिंग और परीक्षण करना है। एक बार रोगियों को सूचित करने के बाद, उनका उपचार राष्ट्रीय टीबी रोग उन्मूलन कार्यक्रम के प्रोटोकॉल के अनुसार जारी रहेगा। इंडियन ऑयल के इस सीएसआर पहल से TB के खात्मे की ओर ये एक सकारात्मक पहल होगा। हम आपको बता दें कि टीबी रोग भारत की सबसे गंभीर स्वास्थ्य चुनौतियों में से एक है। भारत में हर साल बड़ी संख्या में ‘लापता’ मामले होते हैं, जिनका पता नहीं लगाया जाता है या रिपोर्ट नहीं की जाती है। ऐसे में ये मरीज ना सिर्फ चुनौती है बल्कि टीबी को दूसरों में फ़ैलाने के जिम्मेदार भी है।

2025 तक भारत में टीबी रोग का उन्मूलन करने का लक्ष्य, सीएसआर से मिल रही है मदद

गौरतलब है कि साल 2018 में देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2030 के सतत विकास लक्ष्य (SDG) से पांच साल पहले, 2025 तक भारत में टीबी रोग का उन्मूलन करने का आह्वान किया था। भारत सरकार टीबी रोग उन्मूलन कार्यक्रम के लिए सालाना बजट में पर्याप्त धनराशि का प्रावधान करती है। हालांकि, इसकी गंभीरता को देखते हुए, मौजूदा संसाधनों, सेवा वितरण तंत्र और बुनियादी ढांचे को बढ़ाकर हर साल अनेक लापता टीबी रोगियों की पहचान करने की दिशा में सरकार की ओर से सार्थक प्रयास की आवश्यकता है। टीबी रोग उन्मूलन एक राष्ट्रीय कर्तव्य है, इसलिए उपचार के लिए टीबी रोगियों की पहचान करने के लिए अतिरिक्त प्रयासों की आवश्यकता है।

3.5 सालों में लक्षण वाले एक करोड़ से अधिक लोगों के परीक्षण की आवश्यकता

लक्षण की जांच के लिए लगभग सभी लोगों तक हर साल पहुंचने की जरूरत है और अगले 3.5 वर्षों में रोग के लक्षण वाले एक करोड़ से अधिक लोगों के परीक्षण की आवश्यकता है, ताकि इसके संक्रमण की श्रृंखला को तोड़ने के लिए जल्द से जल्द निदान को लेकर इसमें सभी को शामिल किया जा सके। सीएसआर के माध्यम से इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के सहयोग से, “टीबी मुक्त भारत” के “जन आंदोलन” में शामिल हो रहा है। इंडियन ऑयल Uttar Pradesh और Punjab में अपनी महत्वपूर्ण उपस्थिति के कारण टीबी मरीजों की पहचान करने, आपूर्ति-पक्ष को मजबूत करने और सक्षम वातावरण तैयार करके डॉट्स को आपस में जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का निर्णय लिया है।

ब्लॉक स्तर पर काम करेगी इंडियन ऑयल

उत्तर प्रदेश भारत में सबसे अधिक जनसंख्या वाला राज्य है, एक आकड़ों की मानें तो भारत की जनसंख्या का लगभग 20 प्रतिशत यूपी की आबादी है। 2020 में, 23.4 करोड़ से अधिक जनसंख्या वाले उत्तर प्रदेश में भारत में टीबी के मामले का सबसे बड़ा हिस्सा (20 प्रतिशत से अधिक) था। साथ ही, देश में लापता Tuberculosis रोगियों के अनुमानित मामलों में इसका लगभग एक-चौथाई हिस्सा है। पंजाब कई राज्यों से बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूरों को आश्रय देता है और प्रवासियों के बीच Tuberculosis रोगियों की देखभाल सुनिश्चित करना एक चुनौती है। राज्य सरकार के सहयोग से, मरीजों की पहचान को लेकर समुदाय में सूचना, शिक्षा एवं संवाद कार्यक्रम चलाने और राज्य में आशा, एएनएम व आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को लोगों की सटीक जांच के लिए प्रोत्साहित करके उन्हें मजबूत करने में सहायता दी जाएगी। मोबाइल वैन आदि के माध्यम से ब्लॉक स्तर पर मशीन और दवा वितरण प्रणाली उपलब्ध कराकर परीक्षण के लिए और अधिक सुविधाएं सृजित कर बुनियादी ढांचे को मजबूत किया जाएगा।