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January 14, 2026

चीन-पाकिस्तान की टेंशन के बीच India का मास्टरस्ट्रोक, देश में बनेंगे 114 राफेल, एयरफोर्स की ताकत में ऐतिहासिक उछाल

The CSR Journal Magazine
चीन और पाकिस्तान के साथ बढ़ते रणनीतिक तनाव के बीच भारत ने अपनी वायु शक्ति को अभूतपूर्व स्तर तक ले जाने की तैयारी कर ली है। रक्षा मंत्रालय फ्रांस से 114 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद को लेकर निर्णायक चरण में पहुंच चुका है। करीब 3.25 लाख करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाले इस सौदे पर उच्च स्तरीय बैठकों में गंभीर मंथन चल रहा है। यदि यह प्रस्ताव मंजूर होता है, तो यह भारतीय वायुसेना के इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा फाइटर जेट सौदा होगा।

मेक इन इंडिया को बूस्ट, भारत में ही होगा निर्माण

इस डील की सबसे अहम शर्त यह है कि राफेल विमानों का निर्माण भारत में किया जाएगा। लगभग 30 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री और पुर्जों के इस्तेमाल को अनिवार्य रखा गया है। इसके तहत फ्रांस की दिग्गज कंपनी डसॉल्ट एविएशन किसी भारतीय साझेदार—HAL या निजी क्षेत्र—के साथ मिलकर उत्पादन सुविधा स्थापित कर सकती है। इससे न सिर्फ रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ेगी, बल्कि देश के एयरोस्पेस और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को भी बड़ा बल मिलेगा।

घटती स्क्वाड्रन संख्या बनी बड़ी चुनौती

भारतीय वायुसेना लंबे समय से फाइटर स्क्वाड्रन की कमी से जूझ रही है। जहां स्वीकृत संख्या 42 स्क्वाड्रन की है, वहीं वर्तमान में यह आंकड़ा काफी कम है। पुराने मिग और अन्य विमानों के रिटायर होने से यह अंतर और बढ़ गया है। ऐसे में 114 नए राफेल जेट्स की एंट्री वायुसेना की परिचालन क्षमता को मजबूती देने में अहम भूमिका निभा सकती है।

टू-फ्रंट वॉर के लिए रणनीतिक बढ़त

राफेल जैसे एडवांस्ड मल्टी-रोल फाइटर जेट्स भारत को संभावित दो-मोर्चा युद्ध की स्थिति में निर्णायक बढ़त दे सकते हैं। इनमें अत्याधुनिक AESA रडार, लंबी दूरी तक मार करने वाली ‘मिटियोर’ और ‘स्कैल्प’ मिसाइलें, और शक्तिशाली स्पेक्ट्रा इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम मौजूद है। इससे भारत की निगरानी, त्वरित प्रतिक्रिया और सटीक हमले की क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी।

ऑपरेशन सिंदूर के बाद बढ़ा राफेल पर भरोसा

सूत्रों के मुताबिक, ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में राफेल के शानदार प्रदर्शन ने इस डील को और गति दी है। इस ऑपरेशन के दौरान राफेल ने अपने इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सूट की मदद से दुश्मन की उन्नत मिसाइल क्षमताओं को निष्क्रिय कर दिया था। इसके बाद राफेल को लेकर वायुसेना का भरोसा और मजबूत हुआ।

अमेरिका-रूस की पेशकश के बावजूद फ्रांस पर फोकस

दिलचस्प बात यह है कि अमेरिका ने F-35 और रूस ने Su-57 जैसे पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों की पेशकश की थी, लेकिन भारत ने फिलहाल राफेल को ही प्राथमिकता दी है। इसका बड़ा कारण राफेल की कॉम्बैट-प्रूवन विश्वसनीयता और भारत-फ्रांस के मजबूत रक्षा संबंध माने जा रहे हैं।

176 तक पहुंचेगी राफेल की संख्या

भारतीय वायुसेना के पास पहले से 36 राफेल जेट्स की दो स्क्वाड्रन मौजूद हैं, जबकि नौसेना 26 राफेल-M जेट्स का ऑर्डर दे चुकी है। यदि 114 नए विमान शामिल होते हैं, तो भारत के पास कुल राफेल विमानों की संख्या 176 तक पहुंच जाएगी।

कब तक आसमान में दिखेंगे नए राफेल?

विशेषज्ञों का मानना है कि इतने बड़े सौदे को जमीन पर उतरने में समय लगेगा। अनुबंध, उत्पादन लाइन और डिलीवरी में कई साल लग सकते हैं। हालांकि सरकार इसे प्राथमिकता देने के संकेत दे चुकी है।
114 राफेल फाइटर जेट्स की यह प्रस्तावित डील सिर्फ हथियारों की खरीद नहीं, बल्कि भारत की रणनीतिक, औद्योगिक और सैन्य शक्ति को नई ऊंचाइयों पर ले जाने वाला कदम है—जिससे चीन और पाकिस्तान की चिंता बढ़ना तय है।
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