12 साल में भारत के 49.6 करोड़ लोग गरीबी से बाहर, वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट में सामने आए चौंकाने वाले आंकड़े

The CSR Journal Magazine
भारत ने गरीबी कम करने के मामले में पिछले 12 वर्षों के दौरान बड़ी प्रगति की है। वर्ल्ड बैंक की अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2011-12 से 2023-24 के बीच देश के करीब 49.6 करोड़ लोग गरीबी के दायरे से बाहर निकले हैं। इस दौरान 4.20 डॉलर प्रतिदिन वाले अंतरराष्ट्रीय गरीबी मानक पर भारत की गरीबी दर 57.7 प्रतिशत से घटकर 16.1 प्रतिशत रह गई। वहीं, अत्यधिक गरीबी की दर भी 27.1 प्रतिशत से गिरकर 2.6 प्रतिशत पर पहुंच गई।

अत्यधिक गरीबी में भी आई बड़ी गिरावट

वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में गरीबी कम होने का असर ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में दिखाई दिया है। साल 2011-12 में ग्रामीण इलाकों में अत्यधिक गरीबी की दर 31 प्रतिशत थी, जो 2023-24 में घटकर 3.1 प्रतिशत रह गई। इसी तरह शहरी क्षेत्रों में यह दर 17.4 प्रतिशत से कम होकर 1.4 प्रतिशत पर पहुंच गई। वहीं, 4.20 डॉलर प्रतिदिन के गरीबी मानक पर ग्रामीण गरीबी 64.9 प्रतिशत से घटकर 19.3 प्रतिशत और शहरी गरीबी 39.7 प्रतिशत से कम होकर 8.6 प्रतिशत रह गई। हालांकि, अत्यधिक गरीबी के दायरे में अब भी करीब 3.5 करोड़ लोग शामिल हैं।

रोजगार बढ़ने से बदली तस्वीर

गरीबी में आई इस गिरावट के पीछे रोजगार के अवसरों में बढ़ोतरी को भी अहम वजह माना गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, 2017 से 2023 के बीच भारत में रोजगार पाने वाले लोगों की संख्या करीब 13.4 करोड़ बढ़ी। यह बढ़ोतरी इसी अवधि में कामकाजी उम्र की आबादी में हुई वृद्धि से लगभग दोगुनी थी। इस बदलाव में ग्रामीण महिलाओं की भागीदारी भी महत्वपूर्ण रही। बड़ी संख्या में महिलाएं रोजगार और स्वरोजगार से जुड़ीं, जिससे परिवारों की आमदनी बढ़ाने में मदद मिली। हालांकि, बेहतर वेतन और स्थायी रोजगार की चुनौती अभी भी बनी हुई है।

सरकारी योजनाओं और मुफ्त राशन का भी योगदान

वर्ल्ड बैंक ने गरीबी कम करने में सरकारी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं और खाद्य सहायता की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया है। गरीब परिवारों को सब्सिडी वाला या मुफ्त अनाज मिलने से उनके घरेलू खर्च का बोझ कम हुआ। इससे परिवारों को अपनी सीमित आमदनी का इस्तेमाल दूसरी जरूरी जरूरतों पर करने का अवसर मिला। इसके अलावा घरेलू खपत में बढ़ोतरी और लोगों की आर्थिक स्थिति में सुधार ने भी गरीबी कम करने में योगदान दिया।

उत्तर प्रदेश समेत इन राज्यों में बड़ी चुनौती

रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में गरीबी कम होने के बावजूद इसका असर सभी क्षेत्रों में एक जैसा नहीं है। देश की करीब 57 प्रतिशत गरीब आबादी उत्तर प्रदेश से पश्चिम बंगाल तक फैले क्षेत्र में रहती है। ऐसे में उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में रोजगार के अवसर बढ़ाना, शिक्षा की गुणवत्ता सुधारना और लोगों की आमदनी बढ़ाना अभी भी बड़ी जरूरत है।

पढ़े-लिखे युवाओं को रोजगार देना बड़ी चुनौती

वर्ल्ड बैंक ने रोजगार के साथ उसकी गुणवत्ता को लेकर भी चिंता जताई है। रिपोर्ट के मुताबिक, रोजगार के अवसर बढ़े हैं, लेकिन पढ़े-लिखे युवाओं को उनकी योग्यता के मुताबिक नौकरी मिलना अब भी चुनौती है। इसके अलावा कम उत्पादकता वाले कामों में रोजगार की अधिकता और वास्तविक कमाई में अपेक्षित बढ़ोतरी नहीं होना भी चिंता का विषय है। रिपोर्ट के अनुमान के अनुसार, 4.20 डॉलर प्रतिदिन वाले गरीबी मानक पर भारत की गरीबी दर 2026 में 14.2 प्रतिशत से घटकर 2028 तक 12.1 प्रतिशत हो सकती है। भारत में गरीबी कम होने के ये आंकड़े आर्थिक बदलाव की तस्वीर पेश करते हैं, लेकिन आगे की राह रोजगार की गुणवत्ता, बेहतर वेतन और क्षेत्रीय असमानता कम करने पर निर्भर करेगी।

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