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January 8, 2026

India ने चिनाब नदी पर बड़े हाइड्रो प्रोजेक्ट्स तेज किए, Pakistan पानी के लिए हो सकता है प्रभावित?

The CSR Journal Magazine
भारत ने जम्मू-कश्मीर में चिनाब नदी पर चार बड़े हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स की गति बढ़ा दी है। ये कदम पाकिस्तान के लिए पानी की उपलब्धता पर रणनीतिक दबाव बढ़ा सकते हैं। भारत अब पश्चिमी नदियों का पूरा पोटेंशियल बिजली उत्पादन और पानी के प्रवाह पर नियंत्रण के लिए इस्तेमाल करने की तैयारी में है।

चार बड़े डैम: कौन-क्या बन रहा है?

  1. पाकल दुल:
    किश्तवाड़ जिले में बनने वाला यह डैम 167 मीटर ऊंचा होगा और इसकी क्षमता 1,000 मेगावाट होगी। यह पश्चिमी नदियों पर पहला स्टोरेज प्रोजेक्ट होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसका शिलान्यास मई 2018 में किया था और अब इसे दिसंबर 2026 तक चालू करने का लक्ष्य है।

  2. किरु डैम:
    135 मीटर ऊंचाई वाला किरु डैम भी किश्तवाड़ जिले में बन रहा है। यह रन-ऑफ-द-रिवर टाइप प्रोजेक्ट होगा और पाकल दुल के साथ दिसंबर 2026 तक चालू करने का लक्ष्य रखा गया है।

  3. क्वार डैम:
    109 मीटर ऊंचाई वाले क्वार डैम का नदी डायवर्शन जनवरी 2024 में पूरा हुआ था। यह भी रन-ऑफ-द-रिवर डैम होगा और इसे मार्च 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

  4. रतले डैम:
    रतले डैम की क्षमता 850 मेगावाट होगी और इसकी ऊंचाई 133 मीटर है। 2024 में नदी को टनल के माध्यम से डायवर्ट किया गया और अब इसका कंक्रीट वर्क शुरू हो चुका है। इसे 2028 तक पूरा करने की योजना है। पाकिस्तान पहले ही इस प्रोजेक्ट के स्पिलवे डिजाइन पर आपत्ति जता चुका है।

इसके अलावा, दुल्हस्ती स्टेज-2 प्रोजेक्ट को भी दिसंबर 2025 में पर्यावरण मंत्रालय की मंजूरी मिली है। पाकिस्तान ने इस पर भी आपत्ति जताई थी, लेकिन भारत ने इसे खारिज कर दिया।

केंद्रीय मंत्री ने किया निरीक्षण

केंद्रीय बिजली मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने जम्मू-कश्मीर में दो दिन तक इन डैम साइट्स का दौरा किया। उन्होंने प्रोजेक्ट की प्रगति का जायजा लिया और इसे समय पर पूरा करने के लिए सख्त निर्देश दिए। अब इन प्रोजेक्ट्स को तेजी से पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

पाकिस्तान पर पड़ सकता है बड़ा असर

चिनाब नदी पाकिस्तान की “लाइफलाइन” है। यहां से आने वाला पानी पाकिस्तान की अधिकांश सिंचाई और नहरों के लिए इस्तेमाल होता है। पाकिस्तान की कृषि और जनसंख्या का लगभग 90% इस नदी के पानी पर निर्भर है। भारत के नए प्रोजेक्ट्स से न केवल बिजली उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि पानी के प्रवाह पर भी भारत का नियंत्रण मजबूत होगा। इसका मतलब यह है कि पाकिस्तान की जल सुरक्षा और कृषि पर रणनीतिक दबाव बढ़ सकता है।

क्यों उठाया भारत ने यह कदम?

यह कदम उस समय उठाया गया जब भारत ने सिंधु जल संधि को ठंडे बस्ते में डाल दिया। खासकर पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने पश्चिमी नदियों पर अपना पूरा हाइड्रोपावर पोटेंशियल इस्तेमाल करने की तैयारी शुरू की। अब भारत इन नदियों के पानी और ऊर्जा संसाधनों का अधिकतम उपयोग करने की स्थिति में है।
चिनाब बेसिन में ये चार बड़े डैम पाकिस्तान के लिए पानी की उपलब्धता पर दबाव बढ़ा सकते हैं। इस रणनीति से भारत की जल और ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी, जबकि पड़ोसी देश को अपने जल संसाधनों के लिए नए रास्ते तलाशने पड़ सकते हैं।
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