भारत में सड़क सुरक्षा की दिशा में बड़ा कदम: जल्द लागू होगा Vehicle-To-Vehicle (V2V) कम्युनिकेशन सिस्टम
स्मार्ट ट्रैफिक की ओर भारत: V2V सिस्टम से सुरक्षित होगी ड्राइविंग
भारत में सड़क दुर्घटनाओं को कम करने और हाईवे ड्राइविंग को अधिक सुरक्षित बनाने की दिशा में एक बड़ी तकनीकी पहल की तैयारी है। केंद्र सरकार और ऑटोमोबाइल सेक्टर मिलकर Vehicle-To-Vehicle (V2V) कम्युनिकेशन सिस्टम को देश में चरणबद्ध तरीके से लागू करने की योजना पर काम कर रहे हैं। यह अत्याधुनिक तकनीक बिना इंटरनेट के, शॉर्ट-रेंज वायरलेस कम्युनिकेशन के जरिए वाहनों को आपस में जोड़ती है और रियल टाइम में जरूरी जानकारी साझा करती है।
क्या है V2V कम्युनिकेशन सिस्टम
Vehicle-to-Vehicle या V2V एक ऐसी स्मार्ट टेक्नोलॉजी है, जिसमें सड़क पर चल रहे वाहन आपस में सीधे संवाद करते हैं। इसके तहत कार, ट्रक, बस या अन्य वाहन अपनी स्पीड, ब्रेक लगाने की स्थिति, दिशा, अचानक रुकने या लेन बदलने जैसी जानकारियां आसपास मौजूद अन्य वाहनों को भेजते हैं। यह पूरी प्रक्रिया कुछ मिलीसेकंड में होती है, जिससे ड्राइवर को खतरे की पहले से चेतावनी मिल जाती है।
इंटरनेट के बिना भी करेगा काम
V2V सिस्टम की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसके लिए मोबाइल नेटवर्क या इंटरनेट की जरूरत नहीं होती। यह Dedicated Short Range Communication (DSRC) या C-V2X (Cellular Vehicle-to-Everything) जैसी शॉर्ट-रेंज वायरलेस तकनीक पर आधारित होता है। इससे नेटवर्क फेल होने या दूरदराज इलाकों में भी यह सिस्टम प्रभावी ढंग से काम कर सकेगा।
हादसों में आएगी बड़ी कमी
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, भारत में हर साल लाखों सड़क हादसे होते हैं, जिनमें से बड़ी संख्या हाईवे पर होती है। V2V तकनीक से-
• अचानक ब्रेक लगाने की सूचना पीछे आ रहे वाहन को पहले मिल जाएगी।
• फॉग, बारिश या रात में विजिबिलिटी कम होने पर भी खतरे का अलर्ट मिलेगा।
• ब्लाइंड स्पॉट और ओवरटेकिंग के दौरान होने वाले हादसे कम होंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि V2V लागू होने के बाद हाईवे पर रियर-एंड कोलिजन और चेन एक्सीडेंट में उल्लेखनीय कमी आ सकती है।
ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री की तैयारी
देश की प्रमुख ऑटोमोबाइल कंपनियां पहले से ही कनेक्टेड और स्मार्ट वाहनों पर काम कर रही हैं। आने वाले समय में नई कारों में V2V सपोर्टेड चिप्स और सेंसर्स दिए जा सकते हैं। शुरुआत में यह तकनीक प्रीमियम और कमर्शियल वाहनों में देखने को मिल सकती है, जिसे बाद में आम पैसेंजर कारों तक विस्तार दिया जाएगा।
भविष्य की स्मार्ट ट्रैफिक व्यवस्था
V2V तकनीक को आगे चलकर Vehicle-To-Infrastructure (V2I) और Vehicle-To-Pedestrian (V2P) सिस्टम से भी जोड़ा जा सकता है। इससे ट्रैफिक सिग्नल, टोल प्लाजा और पैदल यात्रियों के साथ भी वाहनों का संवाद संभव होगा। विशेषज्ञ इसे भारत में स्मार्ट और सेफ मोबिलिटी की नींव मान रहे हैं।
देश में भयावह हैं सड़क हादसों के आंकड़े
भारत में सड़क दुर्घटनाओं का आंकड़ा बेहद चिंताजनक है। हर रोज़ हजारों हादसे हो रहे हैं और रोज़ाना सैकड़ों लोगों की जानें जा रही हैं। यह समस्या न केवल सड़क उपयोग में लापरवाही, बल्कि ट्रैफिक नियमों का पालन न होने, अव्यवस्थित ड्राइविंग व्यवहार और कमजोर सड़क सुरक्षा ढांचे को भी दर्शाती है। V2V जैसी नई टेक्नोलॉजी इन आंकड़ों को घटाने में एक लाभकारी उपाय साबित हो सकती है.
2023 में भारत में कुल सड़क हादसे: लगभग 4.80 लाख रिकॉर्ड किए गए।
2023 में मौतें: सड़क दुर्घटनाओं में लगभग 1.72 लाख लोगों की जानें गईं। यह संख्या 2022 से 2.6 फीसदी अधिक है।
रोज़ाना औसतन 1,317 हादसे और 474 मौतें होती हैं, यानी हर घंटे लगभग 55 हादसे और 20 मौतें।
घातक रुझान और कारण
भारत की सड़क सुरक्षा स्थिति दुनिया में सबसे गंभीर में से एक है, जहां प्रति 10,000 किलोमीटर सड़क पर 250 सड़क मौतें दर्ज होती हैं, जो चीन, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया से अधिक है। ओवर-स्पीडिंग, हेलमेट/सीट बेल्ट का न पहनना, वाहन ओवरलोडिंग और बिना वैध लाइसेंस चलाना प्रमुख कारण हैं। 2023 के आंकड़ों के अनुसार लगभग 54,000 मौतें हेलमेट न पहनने वाले टू-व्हीलर राइडर्स की हैं।
राज्य स्तरीय रुझान
2024 के प्रावधिक आंकड़ों के अनुसार भारत में लगभग 4.73 लाख हादसे और 1.70 लाख मौतें दर्ज की गईं, जिसमें कुछ राज्यों में वृद्धि जारी रही। उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, महाराष्ट्र जैसे बड़े राज्यों में सड़क हादसों और मौतों की संख्या उच्च दर्ज की गई है। दुर्घटनाओं में पॉइंट पीडेस्ट्रीअन और टू-व्हीलर उपयोगकर्ता की संख्या अधिक है। यह रोड उपयोगकर्ताओं के सबसे संवेदनशील वर्ग हैं।
डिजिटल नहीं, डायरेक्ट कनेक्शन
Vehicle-to-Vehicle कम्युनिकेशन सिस्टम भारत के सड़क परिवहन क्षेत्र में एक क्रांतिकारी बदलाव साबित हो सकता है। बिना इंटरनेट के रियल टाइम जानकारी साझा कर यह तकनीक न केवल हादसों को कम करेगी, बल्कि ड्राइविंग को अधिक सुरक्षित, स्मार्ट और भरोसेमंद बनाएगी। आने वाले वर्षों में इसके लागू होने से भारतीय सड़कों की तस्वीर बदलने की उम्मीद जताई जा रही है।
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