आंध्र प्रदेश के पुट्टापर्थी के पास बेंगलुरु- कडपा- विजयवाड़ा इकोनॉमिक कॉरिडोर पर 24 घंटे में 28.95 लेन-किलोमीटर बिटुमिनस कंक्रीट बिछाने और 10,675 मीट्रिक टन सामग्री उपयोग का अनोखा रिकॉर्ड! 343 किमी लंबा यह कॉरिडोर कर्नाटक–आंध्र प्रदेश कनेक्टिविटी, व्यापार और पर्यटन को देगा नई गति!
राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण में भारत का नया कीर्तिमान
बेंगलुरु- कडपा- विजयवाड़ा इको नॉमिक कॉरिडोर पर NHAI ने रचा इ तिहास! राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने सड़क निर्माण के क्षेत्र में भारत की क्षमता और गति का एक और मजबूत प्रमाण प्रस्तुत किया है। बेंगलुरु- कडपा- विजयवाड़ा इकोनॉमिक कॉरिडोर (NH-544G) पर आंध्र प्रदेश के पुट्टापर्थी के पास 6 जनवरी 2026 को NHAI ने दो गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड स्थापित कर इतिहास रच दिया। ये रिकॉर्ड न केवल तकनीकी दक्षता का प्रतीक हैं, बल्कि भारत के तेजी से बदलते इंफ्रास्ट्रक्चर परिदृश्य की भी झलक देते हैं।
24 घंटे में दो ऐतिहासिक रिकॉर्ड
NHAI द्वारा बनाए गए दोनों रिकॉर्ड राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं के इतिहास में पहली बार दर्ज हुए हैं।
• 28.95 लेन-किलोमीटर तक लगातार बिटुमिनस कंक्रीट बिछाने का रिकॉर्ड– यह 24 घंटे में सबसे लंबी निरंतर बिटुमिनस लेयरिंग है।
• 10,675 मीट्रिक टन सामग्री का उपयोग– 24 घंटे के भीतर सड़क निर्माण में अब तक की सबसे अधिक मात्रा!
यह उपलब्धि न केवल श्रमबल की कड़ी मेहनत का परिणाम है, बल्कि आधुनिक मशीनरी, सटीक योजना, उच्च-स्तरीय समन्वय और समयबद्ध निर्णय क्षमता का भी प्रमाण है।
क्या है NH-544G इकोनॉमिक कॉरिडोर
करीब 343 किलोमीटर लंबा बेंगलुरु- कडपा- विजयवाड़ा इकोनॉमिक कॉरिडोर दक्षिण भारत के दो प्रमुख राज्यों, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश को रणनीतिक रूप से जोड़ता है। यह कॉरिडोर भारत सरकार के भारत मालापरियोजना के तहत विकसित किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य लॉजिस्टिक्स लागत घटाना, यात्रा समय कम करना और आर्थिक गतिविधियों को गति देना है।
इंजीनियरिंग कौशल और तकनीक का संगम
रिकॉर्ड निर्माण के दौरान हाई-कैपेसिटी पेवर्स, ऑटोमैटिक ग्रेड कंट्रोल सिस्टम, रियल-टाइम मॉनिटरिंग और गुणवत्ता जांच की उन्नत तकनीकों का इस्तेमाल किया गया। 24 घंटे की इस निरंतर प्रक्रिया में इंजीनियरों, तकनीशियनों, मशीन ऑपरेटरों और श्रमिकों ने शिफ्ट-आधारित समन्वय के साथ काम किया, जिससे काम की गति और गुणवत्ता दोनों बनी रही। विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह के रिकॉर्ड यह दिखाते हैं कि भारत अब बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में वैश्विक मानकों पर खरा उतरने लगा है।
क्षेत्रीय विकास को मिलेगा नया आयाम
कॉरिडोर के पूरा होने के बाद इसके बहुआयामी लाभ सामने आएंगे-
• व्यापार और उद्योग: माल ढुलाई तेज होगी, लॉजिस्टिक्स लागत घटेगी और औद्योगिक क्लस्टर्स को नया प्रोत्साहन मिलेगा।
• पर्यटन: पुट्टापर्थी जैसे धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों तक पहुंच आसान होगी, जिससे पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।
• रोज़गार और स्थानीय अर्थव्यवस्था: निर्माण और उससे जुड़ी सेवाओं के माध्यम से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
• यात्रियों के लिए सुविधा: तेज, सुरक्षित और सुगम यात्रा अनुभव मिलेगा, जिससे सड़क सुरक्षा भी बेहतर होगी।
‘न्यू इंडिया’ की इंफ्रास्ट्रक्चर कहानी
NHAI की यह उपलब्धि उस व्यापक बदलाव का हिस्सा है, जिसमें भारत सड़क, रेल, बंदरगाह और हवाई अड्डों के क्षेत्र में अभूतपूर्व निवेश कर रहा है। बीते कुछ वर्षों में एक्सप्रेसवे, इकोनॉमिक कॉरिडोर और ग्रीनफील्ड हाईवे परियोजनाओं ने देश की कनेक्टिविटी को नई दिशा दी है। गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड जैसी अंतरराष्ट्रीय मान्यता यह दर्शाती है कि भारतीय एजेंसियां अब केवल घरेलू जरूरतें ही नहीं, बल्कि वैश्विक मंच पर भी अपनी पहचान बना रही हैं।
आत्मविश्वास और भविष्य की राह
पुट्टापर्थी के पास बना यह रिकॉर्ड सिर्फ आंकड़ों की उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह संदेश है कि कौशल, इंजीनियरिंग क्षमता और दृढ़ संकल्प के साथ भारत किसी भी चुनौती को अवसर में बदल सकता है। NH-544G पर रचा गया यह इतिहास आने वाले वर्षों में और भी बड़े, तेज़ और टिकाऊ इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए प्रेरणा बनेगा। एक बार फिर, भारत ने साबित किया है कि जब बात राष्ट्र निर्माण की हो, तो रिकॉर्ड बनाना भी विकास यात्रा का स्वाभाविक हिस्सा बन जाता है।
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