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सीएसआर होगा और प्रभावशाली, संचालन नियमों में संशोधन

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सीएसआर होगा और प्रभावशाली, संचालन नियमों में संशोधन
 
कॉरपोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी को और प्रभावशाली बनाने के लिए मिनिस्ट्री ऑफ़ कॉरपोरेट अफेयर्स ने सीएसआर नियमों में संशोधन किया है। मिनिस्ट्री ऑफ़ कॉरपोरेट अफेयर्स ने 20 सितंबर 2022 को अधिसूचना जारी कर New CSR Rules में संशोधन करते हुए बताया कि यदि किसी कंपनी के Corporate Social Responsibility (सीएसआर) खाते में कोई राशि बची रह गई है तो कंपनी के लिए सीएसआर समिति का गठन करना जरूरी होगा।

सीएसआर अमेंडमेंट के तहत बची हुई राशि के लिए गठित करना होगा समिति

दरअसल सीएसआर नियमों के (CSR Amendment Law) तहत किसी फाइनेंशियल ईयर में किसी प्रोजेक्ट पर खर्च की जाने वाली राशि बच गई है या सीएसआर गतिविधियों से कुछ अधिशेष बना है, तो कंपनी को उसे विशेष बैंक खाते ‘बिना खर्च वाला कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व खाता’ में जमा करना होता था। लेकिन संशोधित नियमों के तहत किसी कंपनी को सीएसआर से संबंधित प्रतिबद्धताओं को पूरा करना होगा। इस विशेष बैंक खाते में जब तक कोई राशि बची है, तो कंपनी के लिए सीएसआर समिति का गठन करना जरूरी होगा। साथ ही इस राशि को तीन वित्तीय वर्षों के भीतर उपयोग करना होगा। सीएसआर समिति इसके उपयोग की निगरानी करेगी।
इतना ही नहीं मिनिस्ट्री ऑफ़ कॉर्पोरेट अफेयर्स (Ministry of Corporate Affairs) ने यह भी अमेंड किया कि कंपनियां प्रभाव मूल्यांकन (CSR Impact Assessment) करने के लिए खर्च की गणना कैसे कर सकती हैं। कानून में बड़े सीएसआर खर्च करने वालों को अपनी गतिविधियों का एक स्वतंत्र प्रभाव मूल्यांकन करने की आवश्यकता होती है। इससे कंपनियां और निवेशक अपने सामाजिक निवेश के प्रभाव को समझ सकते हैं और इसे बेहतर तरीके से लक्षित कर सकते हैं। इससे उन्हें बेहतर सीएसआर कार्यक्रम तैयार करने में भी मदद मिलेगी।

सीएसआर संशोधन के बाद प्रोजेक्ट असेसमेंट का क्या कहता है नया नियम

CSR नया नियम कहता है कि सामाजिक प्रभाव मूल्यांकन के लिए खर्च, जिसे सीएसआर खर्च में शामिल किया जा सकता है, संबंधित वित्तीय वर्ष के लिए कुल सीएसआर व्यय के 2.5% से अधिक नहीं होना चाहिए या ₹50 लाख जो भी अधिक हो। पहले के नियम में कुल सीएसआर खर्च के 5% तक की अनुमति थी या ₹50 लाख जो भी कम हो। परिवर्तन बड़ी सीएसआर परियोजनाओं के मामले में प्रभाव मूल्यांकन पर अधिक खर्च की अनुमति देता है। कंपनी कानून, 2013 के तहत मुनाफा कमाने वाली कुछ श्रेणी की कंपनियों को पिछले तीन वित्त वर्ष के औसत शुद्ध लाभ का दो प्रतिशत किसी एक साल में सीएसआर गतिविधियों पर खर्च करना पड़ता है। सीएसआर से समाज में सकारात्मक बदलाव आ रहा है।