29 जनवरी 2026 (अपडेट)- आज गुरुवार को सोने और चांदी की कीमतों में जबरदस्त तेजी बनी हुई है। निवेशकों और सर्राफा बाजार के रेटर्स के अनुसार चांदी की कीमत आज पहली बार ₹4,00,000 प्रति किलो से ऊपर पहुंच गई है, जबकि सोने के दाम भी लगातार नए स्तर पर पहुंच रहे हैं।
भारत में आज सोना और चांदी दोनों की कीमतों में जबरदस्त तेजी दर्ज की गई है। सर्राफा बाजारों में चांदी का भाव पहली बार ₹4,00,000 प्रति किलोग्राम के पार चला गया है, जबकि सोने (24 कैरेट) की कीमत लगभग ₹1,75,000-₹1,80,000 प्रति 10 ग्राम के आसपास ताज़ा रिकॉर्ड स्तर पर ट्रेंड कर रही है। यह तेजी न सिर्फ निवेशकों बल्कि आम खरीदारों, ज्वेलर्स और अर्थव्यवस्था के कई दूसरे हिस्सों पर भी असर डाल रही है। बाजार के जानकारों का कहना है कि निवेशक लंबे समय से सुरक्षित निवेश की तलाश में सोना-चांदी की तरफ बढ़ रहे हैं, जिससे कीमतों को मजबूती मिल रही है।
आज के लेटेस्ट रेट-शहरवार अपडेट,सोना (24 कैरेट)- प्रति 10 ग्राम अनुमान
• दिल्ली: लगभग ₹1,80,100
• मुंबई: लगभग ₹1,80,410
• चेन्नई: लगभग ₹1,80,930
• हैदराबाद: लगभग ₹1,80,690
• बेंगलुरु: लगभग ₹1,80,550 !
चांदी – प्रति किलोग्राम अनुमान
• दिल्ली: करीब ₹3,80,000-₹3,90,000
• मुंबई: करीब ₹3,80,000-₹3,90,000
• चेन्नई: लगभग ₹4,00,000
• हैदराबाद: लगभग ₹4,00,000
कृपया ध्यान दें: ये अनुमान बाजार के लेटेस्ट ट्रेंड और रिपोर्टेड एवरेज रेट के आधार पर दिए गए हैं। स्थानीय सर्राफा कर और जीएसटी के आधार पर अंतिम रेट में मामूली भिन्नता हो सकती है।)
क्या वजह है इतनी तेजी की? विशेषज्ञ क्या कहते हैं ?
विशेषज्ञों के अनुसार, सोना-चांदी की रिकॉर्ड उछाल के पीछे कई बड़े कारण काम कर रहे हैं-
1. वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और भू-राजनीतिक तनाव
हाल के महीनों में दुनियाभर की इक्विटी मार्केट में अस्थिरता बढ़ी है। निवेशक ऐसे समय में सुरक्षा निवेश (Safe Heaven) खोजते हैं और सोना-चांदी इसकी प्राथमिक पसंद होता है। इस वजह से भारत में भी निवेशकों की ओर से सोने-चांदी की मांग बढ़ी है, जो दामों को ऊपर खींच रही है।
2. डॉलर की कमजोरी और अंतरराष्ट्रीय बाजार
जब अमेरिकी डॉलर कमजोर होता है तो सोना-चांदी जैसे मुद्रास्थिरता वाले धातुओं की मांग बढ़ जाती है क्योंकि इन धातुओं को डॉलर के मुकाबले सुरक्षित माना जाता है। अंतरराष्ट्रीय मार्केट में भी आज सोने के दाम रिकॉर्ड लेवल की ओर बढ़ते दिख रहे हैं।
3. महंगाई और निवेश का बदलता रुझान
भारत में लगातार महंगाई दबाव, मुद्रास्फीति के उच्च स्तर पर बने रहने और पारंपरिक बचत योजनाओं पर कम रिटर्न मिलने के कारण भी निवेशक सोने-चांदी की ओर अधिक आकर्षित हो रहे हैं।
4. त्योहार एवं विवाह का सीज़न
जनवरी-फरवरी के महीनों में कई बड़े पर्व व शादियां होती हैं। इस सीज़न के कारण भी ज्वेलरी की मांग औसत से अधिक रहती है, जो भावों को ऊंचा ले जा सकती है।
आम लोगों और ज्वेलर्स पर क्या असर ?
आज के भावों पर सोना और चांदी खरीदना कई लोगों के लिए महंगा हो गया है। शादी-विवाह जैसे अवसरों पर सोने की ज्वेलरी की खरीदारी पर खर्च में भारी इज़ाफ़ा हो सकता है। कुछ उपभोक्ता इस समय सिर्फ भाव पूछकर ही लौट रहे हैं, क्योंकि निवेश की अपेक्षा वर्तमान स्तर पर खरीदारी की लागत अधिक है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर आप सोना-चांदी को लंबी अवधि के निवेश के रूप में सोचते हैं, तो अभी भी यह सुरक्षित विकल्प माना जा सकता है, लेकिन तुरंत जबरदस्त खरीदारी जोखिम भरी हो सकती है।भारत और अंतरराष्ट्रीय संकेतों के आधार पर आप डिजिटल गोल्ड, गोल्ड ईटीएफ़्स या चरणबद्ध निवेश जैसे विकल्पों पर विचार कर सकते हैं।
रिकॉर्ड बने रहना क्यों मायने रखता है?
आज चांदी का ₹4,00,000 प्रति किलोग्राम पार कर जाना सिर्फ एक संख्या नहीं है, बल्कि यह सोने-चांदी बाज़ार में व्यापक मांग और स्थिरता निवेश की भावना को दर्शाता है। ऐसा पिछले कई वर्षों में पहले कभी नहीं हुआ है कि चांदी इतनी ऊंची कीमत पर ट्रेड कर रही हो। सोना भी ₹1.8 लाख के पार लगभग नया स्तर स्थापित कर रहा है। इतिहास में चांदी और सोने के भाव समय-समय पर ऊंचाइयों को छूते रहे हैं, लेकिन चांदी के ₹4 लाख प्रति किग्रा पार करना एक ऐसा रिकॉर्ड है जिसे अब तक कई दशक में पहली बार पार होते देखा गया है। सोना का ₹1.8 लाख प्रति 10 ग्राम के करीब होना भी पिछले वर्षों के औसत से कहीं ऊपर है।
क्या भावों में और उछाल आने की संभावना है?
विश्लेषकों की राय दो भागों में बंटी हुई है-
लंबी अवधि के लिए: अगर वैश्विक अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता बनी रहती है, तो सोना-चांदी की कीमतें और ऊपर जा सकती हैं।
मध्यम अवधि के लिए: बाजार सत्रों के बीच कुछ गिरावट या स्थिरीकरण चिन्ह भी देखने को मिल सकता है, खासकर अगर डॉलर मजबूत होता है या प्रमुख केंद्रीय बैंकों के संकेत सकारात्मक आते हैं।
सरकारी नीतियों और बाजार के संकेत
भारत जैसे देशों में सोना-चांदी के दाम प्रमुख रूप से अंतरराष्ट्रीय बाजार, मौद्रिक नीतियों, कच्चे माल की सप्लाई और वित्तीय संकेतों से प्रभावित होते हैं।सरकार द्वारा कोई नया टैक्स, निर्यात-आयात नीति या व्यापार प्रतिबंध भी भावों को प्रभावित कर सकता है। शादी-विवाह की खरीदारी करने वाले परिवार, छोटे एवं मध्यम-वर्गीय निवेशक, ज्वेलरी दुकानदार और सर्राफा व्यवसाय, अर्थशास्त्री और वित्तीय विश्लेषक और विदेशी निवेशकों के साथ घरेलू बाजार के लिए यह खबर खास मायने रखती है।
आम लोगों के लिए विशेषज्ञों की राय (शॉर्ट टर्म बनाम लॉन्ग टर्म)
अगले 1–2 हफ्ते भाव ऊंचे बने रह सकते हैं। हल्की गिरावट या मुनाफावसूली संभव है। अगले 3–6 महीनेतक अगर वैश्विक अनिश्चितता बनी रही तो सोना ₹1.85 लाख और चांदी ₹4.25 लाख तक भी जा सकती है। (हालांकि यह पूरी तरह बाज़ार संकेतों पर निर्भर करेगा) आम आदमी के लिए विशेषज्ञों की सलाह है कि शादी या ज़रूरी खरीद है तो सीमित मात्रा में लें। भारी ज्वेलरी खरीदने से पहले इंतज़ार करना बेहतर होगा। निवेश के लिए ख़रीद रहे हैं तो एक साथ बड़ी रकम न लगाएं। डिजिटल गोल्ड / ETF / SIP मॉडल अपनाएं।
सर्राफा बाज़ार का हाल
सर्राफा बाजारों में ग्राहक कम, भाव पूछने वालों की संख्या ज़्यादा हुई है। इसी तरह खरीदने वालों की अपेक्षा पुराने गहने बेचने वालों की संख्या बढ़ी है।व्यापारियों का कहना है, “इतिहास में पहली बार ग्राहक दाम सुनकर चुप हो जा रहा है।” सोना और चांदी आज सिर्फ़ धातु नहीं, बल्कि डर, भरोसे और भविष्य की चिंता का संकेत बन चुके हैं। जब कानून, राजनीति और अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता बढ़ती है, तो सोना-चांदी चमकने लगते हैं और आज वही हो रहा है। चांदी ₹4 लाख के करीब, सोना ₹1.8 लाख के आसपास ! ये सिर्फ़ आंकड़े नहीं, बल्कि देश-दुनिया के मूड का आईना हैं।
क्या यह उछाल महंगाई का संकेत भी है?
सोना और चांदी के ऊंचे भाव अक्सर महंगाई, मुद्रा अस्थिरता या वित्तीय संकट के संकेत के रूप में भी लिए जाते हैं। जब लोग भविष्य को लेकर अनिश्चित होते हैं, तो वे सोने-चांदी जैसे स्थिर निवेश की ओर रुख करते हैं। आज की तेजी इसी भावना को सपोर्ट करती दिखती है। आज भारत के सर्राफा बाज़ार में सोना-चांदी की रिकॉर्ड उछाल ने न सिर्फ़ बाजार को बल्कि आम उपभोक्ता के बजट और निवेश योजनाओं को भी प्रभावित किया है। चांदी ₹4,00,000 प्रति किग्रा पार, सोना लगभग ₹1,80,000 प्रति 10 ग्राम के आसपास- ये भाव आज की ख़बर के आधार पर इतिहास में दर्ज किए जाने योग्य स्तर हैं और आने वाले दिनों में अर्थव्यवस्था पर इसका असर बड़ा और दीर्घकालिक हो सकता है। अगर आप सोना-चांदी खरीदने, बेचने या निवेश करने का विचार कर रहे हैं, तो विशेषज्ञ सलाह लेना ज़रूरी है, क्योंकि भावों में उतार-चढ़ाव अभी बना हुआ है।
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