ईरान-युद्ध का डबल अटैक! दुनिया पर मंडराया खाद्य संकट, भारी उछाल मारेंगी कीमतें

The CSR Journal Magazine

दुनिया पर मंडरा रहा है खाद्य संकट! ईरान युद्ध से आसमान छुएगी खाने-पीने की चीजों की कीमत

ईरान युद्ध की संभावना से खाद्य संकट बढ़ सकता है। दुनिया भर में खाद्य संकट बढ़ने की चेतावनी दी जा रही है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और वर्ल्ड बैंक ने इस संकट को लेकर चिंता जताई है। रिपोर्ट के अनुसार, अगर ईरान का युद्ध आगे बढ़ता है, तो खाने की चीजों की कीमतें आसमान छू सकती हैं। खासकर उन देशों में जहां लोगों की आय पहले से ही बेहद कम है। संयुक्त राष्ट्र के World Food Programme (WFP) के अनुसार, अगर यह संघर्ष जून 2026 तक खिंचता है, तो दुनिया भर में 4.5 करोड़ और लोग गंभीर भूखमरी का शिकार हो सकते हैं।

कमजोर देशों पर गंभीर असर

उच्च कीमतें गरीबों के लिए बढ़ाएंगी मुसीबतें। खाद्य संकट का सबसे बड़ा असर दुनिया की कमजोर आबादी पर पड़ेगा। जो देश अपनी खाद्य जरूरतों के लिए दूसरे देशों पर निर्भर हैं, वे इस संकट से अधिक प्रभावित होंगे। कई ‘लो इनकम’ वाले देश पहले से ही भारी कर्ज के बोझ तले दबे हुए हैं, और इस युद्ध के कारण उनकी स्थिति और भी बिगड़ सकती है।

आहार सामग्री की बढ़ती कीमतों का असर

आवश्यक वस्तुओं की कीमत और बढ़ने की संभावना। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर युद्ध की स्थिति पैदा होती है, तो गेहूँ, चावल, और अन्य अनाजों की कीमतें और बढ़ सकती हैं। जिससे दुनिया के लिए जरूरी आहार सामग्री अब और महंगी हो जाएगी। इसके चलते सामाजिक असमानता और महंगाई की समस्या लगातार बढ़ेगी। IMF का कहना है कि कई देशों को खाद्य सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। खासकर उन देशों में जो पहले से संकट का सामना कर रहे हैं। इससे लाखों लोगों की जिन्दगी व रोजमर्रा की जरूरतों पर गहरा असर पड़ेगा।

ईंधन और ढुलाई की लागत

भारत अपनी तेल की जरूरतों का लगभग 85% आयात करता है। युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमतें $120 प्रति बैरल के पार जा चुकी हैं। जब डीजल महंगा होगा, तो फल, सब्जियां और दूध जैसी बुनियादी चीजों को लाने-ले जाने का खर्च बढ़ जाएगा जिससे सीधा असर उपभोक्ता की जेब पर पड़ेगा।

खेती पर संकट

खाड़ी देश उर्वरक (urea) के बड़े निर्यातक हैं। युद्ध से इनकी सप्लाई बाधित हुई है, जिससे फसलों की पैदावार कम हो सकती है और अनाज के दाम बढ़ सकते हैं। भारत और ब्राजील जैसे देशों में 2026 में फसल की पैदावार सामान्य से कम रहने की आशंका जताई गई है।

सप्लाई चेन में रुकावट

हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्ग है, जहाँ से दुनिया का 20% तेल और भारी मात्रा में खाद गुजरती है। इसकी आंशिक बंदी या जोखिम ने वैश्विक शिपिंग नेटवर्क को हिला दिया है। जहाजों का बीमा प्रीमियम बढ़ने और सुरक्षित लंबे रास्ते अपनाने से माल आने में देरी हो रही है और लागत बढ़ रही है।

कमजोर अर्थव्यवस्थाएं संकट में

आर्थिक तंगी से जूझ रहे देश परेशान। कोरोना महामारी के बाद अब ईरान युद्ध के खतरे ने कई गरीब देशों की अर्थव्यवस्थाओं को और कमजोर कर दिया है। इन देशों में खाद्य सामग्री की कमी और महंगाई का दुष्चक्र देखने को मिल सकता है।

सामाजिक समस्याएं बढ़ने की आशंका

खाद्य संकट से झेलेंगे कई सामाजिक समस्याएं। खाद्य संकट से न केवल आर्थिक अस्थिरता बढ़ेगी, बल्कि इससे सामाजिक समस्या भी पैदा हो सकती है। देश में मौजूदा महंगाई और खाद्य सामग्री का संकट आम जनता के लिए बड़ी मुसीबत बन सकता है।

भविष्य की चुनौतियां

दुनिया को खाद्य संकट का सामना करना पड़ सकता है। इस संकट से निपटने के लिए जरूरी है कि सभी देशों को एक साथ आकर उपाय करना होगा। खाद्य सामग्री की वृद्धि और उसका सुरक्षित वितरण सुनिश्चित करने के लिए वैश्विक सहयोग अनिवार्य होगा।

राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तैयारी की आवश्यकता

खाद्य संकट से सुरक्षा के लिए मिलकर काम करना होगा। ईरान युद्ध को लेकर बनी परिस्थितियों से निपटने के लिए वैश्विक स्तर पर ध्यान देने की आवश्यकता है। विभिन्न देशों के सरकारों को अपनी खाद्य सुरक्षा योजनाओं को मजबूत करना होगा ताकि कमजोर तबकों का समर्थन किया जा सके। हालांकि, हाल ही में 8 अप्रैल 2026 को अमेरिका और ईरान के बीच एक दो सप्ताह के अस्थायी युद्धविराम (Ceasefire) का समझौता हुआ है, जिससे हॉर्मुज मार्ग को फिर से खोलने की योजना है। इससे बाजार में थोड़ी राहत देखी गई है, लेकिन कीमतें अभी भी युद्ध-पूर्व स्तर से ऊपर बनी हुई हैं

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