जापान में चरम मौसम के बाद भूमिगत केबलिंग, महंगी लेकिन भरोसेमंद, शहरी लचीलेपन में मजबूती! भारत और जापान दोनों बड़े प्राकृतिक आपदा-प्रवण क्षेत्र में स्थित हैं। भारत बाढ़, चक्रवात, भूकंप और मानसून जैसी घटनाओं का सामना करता है, जबकि जापान भूकंप, सुनामी और बड़े तूफानों का अक्सर सामना करता है। जापान ने इन अनुभवों से Disaster-Resilient Infrastructure और Urban Resilience के लिए उन्नत तकनीक, नीति और सार्वजनिक-निजी भागीदारी विकसित की है। इन सब पहलुओं से भारत के लिए सीखना एक ज़रूरी रणनीतिक कदम है।
जापान में चरम मौसम के बाद भूमिगत केबलिंग पर ज़ोर!
जापान ने हाल के वर्षों में आए तीव्र तूफानों, भूकंपों और भारी वर्षा जैसी Extreme Weather घटनाओं के बाद अपने बिजली और संचार नेटवर्क को अधिक सुरक्षित बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। इसके तहत Overhead (हवा में लटकी) बिजली और टेलीकॉम लाइनों को तेजी से Underground Cabling में बदला जा रहा है। यह प्रक्रिया लागत के लिहाज़ से महंगी है, लेकिन इसकी विश्वसनीयता और आपदा-रोधी क्षमता कहीं अधिक मानी जाती है। जापान सरकार, नगरपालिकाओं और यूटिलिटी कंपनियों के साझा प्रयासों से यह बदलाव शहरी ढांचे को पहले से कहीं ज्यादा Resilient बना रहा है।
क्यों लिया गया यह फैसला ?
जापान प्राकृतिक आपदाओं के लिहाज़ से दुनिया के सबसे संवेदनशील देशों में है। टाइफून के दौरान पेड़ों के गिरने से बिजली लाइनें टूटना, बाढ़ में ट्रांसफॉर्मर फेल होना और भूकंप के बाद लंबे समय तक बिजली गुल रहना, ये समस्याएं बार-बार सामने आईं। विशेषज्ञों के मुताबिक, Underground Cabling से तूफान और तेज़ हवाओं का असर काफी हद तक खत्म हो जाता है, क्योंकि केबलें ज़मीन के नीचे सुरक्षित रहती हैं।
जापान ने extreme weather के बाद
underground cabling तेज़ की।
Cost ज़्यादा,
लेकिन reliability बहुत बेहतर।
Urban resilience बढ़ी—
यही long-term सोच है।#ResilientCities #UndergroundUtilities #WorldFacts #ViralInfra #conformitygate pic.twitter.com/iPuwSWXuW1— Chandan Babu (@csm_present) January 8, 2026
लागत अधिक, लेकिन दीर्घकालिक लाभ
भूमिगत केबलिंग की लागत पारंपरिक Overhead लाइनों की तुलना में कई गुना अधिक होती है। खुदाई, विशेष सुरंगें, जल-रोधी और भूकंप-सहिष्णु सामग्री, इन सब पर बड़ा निवेश चाहिए। लेकिन जापान के शहरी विकास मंत्रालय और ऊर्जा एजेंसियों का आकलन है कि लंबी अवधि में मेंटेनेंस लागत कम होती है, आउटेज घटते हैं और आपदा के बाद सेवा बहाली तेज़ होती है। यही कारण है कि इसे Investment In Resilience माना जा रहा है, न कि सिर्फ खर्च।
शहरी लचीलापन (Urban Resilience) कैसे बढ़ा !
1. कम आउटेज, तेज़ रिकवरी– भूमिगत नेटवर्क में बिजली और इंटरनेट बाधित होने की घटनाएं कम हुई हैं।
2. आपदा के समय जीवन रक्षक सेवाएं सुरक्षित – अस्पताल, मेट्रो, डेटा सेंटर्स और इमरजेंसी नेटवर्क निर्बाध रहते हैं।
3. शहर की सुंदरता और सुरक्षा– खुले तार और खंभे कम होने से सड़क सुरक्षा और शहरी सौंदर्य दोनों बेहतर हुए हैं।
जापान की उन्नत तकनीक के उदाहरण
• Seismic-Resistant Ducts: भूकंप के झटकों को सहने वाले लचीले डक्ट्स, जिनमें केबल्स सुरक्षित रहती हैं।
• Waterproof & Flood-Proof Cabling: बाढ़ संभावित इलाकों में जल-रोधी कोटिंग और ड्रेनेज सिस्टम।
• Smart Grid Monitoring: सेंसर और AI आधारित सिस्टम जो ज़मीन के नीचे के नेटवर्क की Real-Time निगरानी करते हैं।
• Utility tunnels (Common Ducts): एक ही सुरंग में बिजली, फाइबर और गैस लाइनों का प्रबंधन, जिससे मरम्मत आसान होती है।
• Robotic Inspection: संकरी भूमिगत सुरंगों में रोबोटिक उपकरणों से जांच, जिससे मानवीय जोखिम घटता है।
दुनिया के लिए सीख
जापान का अनुभव दिखाता है कि जलवायु परिवर्तन के दौर में बुनियादी ढांचे की योजना केवल लागत नहीं, बल्कि जोखिम और निरंतरता को ध्यान में रखकर बननी चाहिए। भारत सहित कई देश अब शहरी इलाकों में Underground Cabling और Common Utility Corridors पर विचार कर रहे हैं।
भारत को जापान से सीखने का औचित्य
भारत और जापान दोनों बड़े प्राकृतिक आपदा-प्रवण क्षेत्र में स्थित हैं। भारत बाढ़, चक्रवात, भूकंप और मानसून जैसी घटनाओं का सामना करता है, जबकि जापान भूकंप, सुनामी और बड़े तूफानों का अक्सर सामना करता है। जापान ने इन अनुभवों से Disaster-Resilient Infrastructure और Urban Resilience के लिए उन्नत तकनीक, नीति और सार्वजनिक-निजी भागीदारी विकसित की है। इन सब पहलुओं से भारत के लिए सीखना एक ज़रूरी रणनीतिक कदम है।
1. जलवायु परिवर्तन और आपदा जोखिम में वृद्धि
भारत की तेज़ी से बढ़ती शहरी आबादी और अनियोजित शहरीकरण के कारण SDG-11 (Resilient and Sustainable Cities) के उपायों में प्रगति धीमी रही है जिसमें बुनियादी सुविधाओं में स्थिरता और सुरक्षा प्रमुख हैं। जापान ने इसी चुनौती का सामना करते हुए, Underground Utility Systems, Food Control Tunnels, और Smart Disaster Management Frameworks को विकसित किया है जिससे शहरों की बुनियादी सेवाएं आपदा के समय भी बनी रह सकें। इसी तरह भारत के लिए जलवायु-प्रभावित आपदा जोखिम को प हचानना और भविष्य-निहित प्रणालि यों को विकसित करना जरूरी है ता कि बिजली, संचार और आपदा सेवाएं आपदा के दौरान भी कार्यशील रहें ।
2. जापान का तकनीकी नेतृत्व और प्रबंधन मॉडल
जापान ने अपने शहरों में Public-Private Partnerships (PPPs) और Risk-Based Planning के आधार पर बुनियादी ढांचे का डिज़ाइन किया है। Sendai City जैसे उदाहरणों में, परियोजनाओं में आपदा जोखिम को मूल्यांकन के मूल घटक के रूप में शामिल किया जाता है, जिससे कार्यान्वयन और आपदा के दौरान त्वरित प्रतिक्रिया संभव होती है। जापान में उन्नत तकनीकों जैसे उच्च क्षमता वाले भूमिगत डिस्चार्ज चैनल (Underground Flood Tunnels), AI-आधारित Real-Time Monitoring Systems, सुप्रीम रोबोटिक्स और ड्रोन आधारित निरीक्षण तकनीकों का उपयोग किया जाता है ताकि आपदा के समय संरचनाएं सुरक्षित रहें और त्वरित प्रतिक्रिया संभव हो। जापान की ये तकनीकी Transfer और स्मार्ट Sens ing/Monitoring प्रणालियां भा रतीय शहरों के लिए अनुकूल और ला गत-प्रभावी समाधान प्रदान कर सकती हैं।
3. नीति और नियोजन में जापान का दृष्टिकोण
जापान में आपदा जोखिम प्रबंधन को केवल इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट के रूप में नहीं देखा जाता, बल्कि वह नगर नियोजन, सार्वजनिक जागरूकता, शिक्षा और सामुदायिक तैयारी का हिस्सा है। आंकड़ों के अनुसार न केवल तकनीकी समाधान बल्कि जनता का ज्ञान और तैयारी भी महत्वपूर्ण है, जैसे कि Disaster Literacy कार्यक्रम जो सामाजिक इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करते हैं। भारत में भी नीति रूपरेखा में तकनीक ही नहीं , बल्कि नागरिक समझ और भागीदारी भी शामिल की जानी चाहिए।
4. सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPPs) का महत्व
जापान के मॉडल में निजी क्षेत्र को Value-For-Money Analysis, Force Majeure Clauses और डिजास्टर-प्रबंधन क्षमताओं में शामिल करके जो आर्थिक दक्षता और जोखिम प्रबंधन मिला है, वह भारत जैसे अर्थव्यवस्था में भी सार्वजनिक संसाधनों का बेहतर उप योग सुनिश्चित कर सकता है। भारत में भारी निवेश की जरूरत को देखते हुए PPP मॉडल राज्य- स्त र और शहर-स्तर पर बेहतर परिणाम ला सकता है।
5. भारत-जापान सहयोग की प्रासंगिकता
जापान और भारत के बीच Infrastructure And Disaster Resilience से जुड़े कार्यक्रम और सहयोग लगातार आगे बढ़ रहे हैं, जिसमें तकनीकी कंपनियों की Study Tours, प्रशिक्षण कार्यक्रम और सहयोग शामिल हैं ताकि भारत के शहरी और ग्रामीण बुनियादी ढांचे में सुधार किया जा सके। मुख्य निष्कर्ष-
1. आपदा-प्रवणता का अनुभव– जापान ने दीर्घकालिक अनुभव के आधार पर आपदा-रेज़िलिएंट सिस्टम विकसित किए हैं। भारत को भी इसी तरह की रणनीतियां अपनानी होंगी।
2. तकनीकी अनुकूलन और नवीनता– उन्नत तकनीकें जैसे Underground Cabling, Flood Tunnels, Monitoring Systems आदि शहरों को अधिक सुरक्षित बना सकती हैं।
3. नीति और नियोजन में आकर्षक बदलाव– Risk Based Planning, Education और PPP Frameworks भारत की शहरी रणनीतियों को मजबूत कर सकते हैं।
4. सामुदायिक भागीदारी और साक्षरता– केवल तकनीक ही नहीं, बल्कि नागरिकों की Awareness और Preparedness भी Resilience का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
जापान से मिला अनुकूलन समाधान
भारत को जापानी मॉडल से अनुकूलित समाधान अपनाना चाहिए, विशेष रूप से Urban Resilience Planning, Disaster Risk Management और Smart Infrastructure Technologies में। सरकारी, निजी और शैक्षिक संस्थानों के बीच स्थानीय-स्थानीय Knowledge Exchange और Capacity Building कार्यक्रम विकसित किए जाने चाहिए। नीति-निर्माण में डेटा-संचालित निर्णय और Risk-Assessment Tools को मानकीकृत किया जाना चाहिए।
जापान- तकनीकी क्षेत्र में विश्वगुरु
जापान की तकनीकी विशेषज्ञता, नीति-दृष्टि , और आपदा-प्रबंधन मॉडल भारत के लिए सिर्फ प्रेरणादायक नहीं, बल्कि व्यवहारिक और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण सीख प्रदान करते हैं। विशेषकर तब जब भारत जलवायु परिवर्तन और शहरीकरण की चुनौतियों का सामना कर रहा है। जापान द्वारा Extreme Weather के बाद Underground Cabling को तेज़ी देना तथ्यात्मक रूप से सही और रणनीतिक रूप से दूरदर्शी कदम है। भले ही शुरुआती लागत अधिक हो, लेकिन बेहतर Reliability, कम व्यवधान और मजबूत urban resilience इसे भविष्य की आवश्यक नीति बनाते हैं। जापान की उन्नत तकनीक और दीर्घकालिक सोच आज के बदलते मौसम में शहरी विकास का एक प्रभावी मॉडल पेश करती है।
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