CAG रिपोर्ट: मिलिट्री अस्पतालों में कमियां, जवानों को समय पर नहीं मिले वेतन

The CSR Journal Magazine
सीएजी यानी नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की रिपोर्ट सोमवार को संसद में पेश की गई। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि कई सेना के जवानों को उनके वेतन और भत्तों का समय पर भुगतान नहीं किया गया। रिपोर्ट के अनुसार, प्रोविजनल फाइनल सेटलमेंट ऑफ अकाउंट्स (PFSA) की समीक्षा समय पर नहीं होने के कारण कई कर्मचारियों को रिटायरमेंट के समय बड़ी राशि की वसूली करने में मुश्किलें आईं।

IT सिस्टम की खामियां

इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि आईटी सिस्टम में आवश्यक नियमों का समावेश नहीं करने के कारण जवानों को उनका उचित भुगतान नहीं मिल सका। इसलिए, प्रिविलेज टिकट ऑर्डर (PTO) जारी करने में देरी हुई। ह्यूमन रिसोर्स मैनेजमेंट सिस्टम (HRMS) में डेटा की कमी के कारण कई आवेदन अस्वीकृत हो गए। रिपोर्ट ने सिफारिश की है कि विभिन्न सिस्टम के बीच तालमेल बेहतर बनाया जाए और रिजेक्ट मामलों की निगरानी के लिए ऑटोमेटेड सिस्टम लागू किया जाए।

मिलिट्री अस्पतालों की अव्यवस्था

रिपोर्ट में मिलिट्री अस्पतालों की समस्याओं का भी जिक्र किया गया है। अस्पतालों की अधिकांश इमारतें पुरानी हैं और उनकी उचित जांच नहीं हुई है। एक मामले में, लैंसडाउन के मिलिट्री अस्पताल का एक हिस्सा जून 2022 में गिर गया था। साथ ही HVAC (हीटिंग, वेंटिलेशन और एयर कंडीशनिंग) और फायरफाइटिंग सिस्टम की कमी भी देखी गई।

दवाओं की कमी और फंड का दुरुपयोग

आर्म्ड फोर्सेज मेडिकल स्टोर्स डिपो (AFMSD) द्वारा आवश्यक दवाओं की आपूर्ति में कमी भी पाई गई। कॉमन ड्रग लिस्ट की दवाएं भी अस्पतालों में पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं थीं। दो डिपो में दवाओं का समय पर नवीनीकरण नहीं हुआ, जिससे लगभग ₹13.52 करोड़ की दवाएं फंस गईं।

अनियमितताओं पर एक गंभीर नजर

रिपोर्ट में कई गंभीर अनियमितताओं की ओर इशारा किया गया है, जैसे कि कई अस्पतालों में बिना लाइसेंस के X-ray मशीनों का संचालन। इसके अलावा, बायो-मेडिकल वेस्ट प्रबंधन नियमों का पालन नहीं किया गया है और मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (MTP) से संबंधित दस्तावेज भी ठीक से नहीं रखे गए हैं।

समस्याओं का समाधान करने की कोशिशें

सीएजी की इस रिपोर्ट में सात कमांड्स में से वेस्टर्न कमांड में सबसे अधिक नियमों का उल्लंघन पाया गया। रक्षा मंत्रालय ने कुछ मामलों में सुधार के कदम उठाने की कोशिश की है, लेकिन कई समस्याएं अब भी बनी हुई हैं। ऑडिट ने सुझाव दिया है कि सभी मिलिट्री अस्पतालों के लिए अधिक व्यवस्थाएं और निगरानी जरूरी है। ऐसे में यह रिपोर्ट सेना के भविष्य और जवानों की भलाई के लिए एक अहम दस्तावेज बन गया है।

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