भारत की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर एक अहम सवाल खड़ा हो गया है। हालिया विश्लेषण और भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट के मुताबिक देश के रणनीतिक कच्चे तेल भंडार मौजूदा स्थिति में केवल लगभग 5 दिन की जरूरत पूरी कर सकते हैं। जबकि सरकार का दावा है कि कुल मिलाकर भारत के पास करीब 74 दिनों की तेल जरूरत को पूरा करने की क्षमता मौजूद है।
रणनीतिक भंडार क्षमता का बड़ा हिस्सा खाली
सरकार के अनुसार भारत के पास आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में स्थित तीन प्रमुख स्थानों पर 5.33 मिलियन मीट्रिक टन (MMT) कच्चे तेल को स्टोर करने की क्षमता है। लेकिन राज्यसभा में दिए गए आंकड़ों के अनुसार फिलहाल इसमें से केवल 3.372 MMT ही भरा हुआ है, यानी करीब एक-तिहाई क्षमता खाली पड़ी है। देश हर दिन औसतन 0.67 MMT पेट्रोलियम उत्पादों की खपत करता है। इस हिसाब से मौजूदा रणनीतिक भंडार केवल 5 दिनों की मांग को ही पूरा कर सकता है।
CAG रिपोर्ट वर्षों से पूरा इस्तेमाल नहीं
भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की 2025 की ऑडिट रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि इन भंडारण सुविधाओं का लंबे समय से पूरा उपयोग नहीं किया गया। रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2024 में 3.98 MMT क्षमता वाले भूमिगत रॉक केवर्न्स में केवल 2.91 MMT तेल ही रखा गया, यानी 27% क्षमता खाली रही। ऑडिट में यह भी कहा गया कि सरकार ने पहले चरण में 19 दिन के आयात को कवर करने का लक्ष्य रखा था, लेकिन अब तक केवल 7.88 दिन के आयात के बराबर ही क्षमता विकसित की जा सकी है।
कुल भंडारण 74 दिन, फिर भी आयात पर भारी निर्भरता
हालांकि रणनीतिक भंडार कम है, लेकिन सरकार का कहना है कि तेल विपणन कंपनियों के पास 64.5 दिन की मांग के बराबर स्टॉक मौजूद है।
इसे रणनीतिक भंडार की लगभग 9.5 दिन की क्षमता के साथ जोड़ें तो भारत की कुल भंडारण क्षमता करीब 74 दिन की हो जाती है। इसके बावजूद भारत अपनी जरूरत का 88% से ज्यादा कच्चा तेल आयात करता है और दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता है। 2025 में भारत के कुल आयात का 50% से अधिक हिस्सा मध्य-पूर्व देशों—इराक, सऊदी अरब और यूएई—से आया। इससे साफ है कि किसी भी भू-राजनीतिक संकट का सीधा असर भारत की आपूर्ति पर पड़ सकता है।
विशेषज्ञों की राय भंडार बढ़ाने और विकल्प तलाशने की जरूरत
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को अपनी रणनीतिक और परिचालन भंडारण क्षमता बढ़ाने की जरूरत है। आईसीआरए के वरिष्ठ अधिकारी प्रशांत वशिष्ठ के अनुसार, मौजूदा स्तर एक कमजोरी है और इसे धीरे-धीरे बढ़ाया जाना चाहिए। वहीं, ऊर्जा नीति विशेषज्ञ किरीट पारिख का मानना है कि केवल भंडार बढ़ाने के बजाय तेल की मांग कम करने पर भी ध्यान देना चाहिए।
उनके अनुसार, नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा देना, घरेलू उत्पादन बढ़ाना और ऊर्जा खपत को नियंत्रित करना ज्यादा टिकाऊ समाधान हो सकता है।
कुल मिलाकर, भारत के पास भले ही कुल 74 दिन का तेल भंडार हो, लेकिन रणनीतिक स्तर पर यह अभी भी सीमित है। ऐसे में वैश्विक संकट या सप्लाई बाधित होने की स्थिति में ऊर्जा सुरक्षा को लेकर चुनौती बनी रह सकती है।
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