“हमें दलित मत कहिए”: तमिलनाडु की DKV जाति ने लिया बड़ा फैसला, SC/ST एक्ट की खिलाफत

The CSR Journal Magazine
नई दिल्ली: आईआईटी बॉम्बे में एक दलित छात्र की आत्महत्या के बाद SC/ST एक्ट का मुद्दा फिर से गरमाने लगा है। तमिलनाडु की देवेंद्रकुला वेल्लालर (DKV) जाति ने एक अनोखा निर्णय लिया है जिसमें उन्होंने कहा है कि वे इस एक्ट के तहत किसी मामले का समर्थन नहीं करेंगे। इसके साथ ही, इस समुदाय के लोग अब आरक्षण का लाभ नहीं लेना चाहते हैं और अनुसूचित जाति की सूची से बाहर निकलना चाहते हैं।

साहिल वकोडे की आत्महत्या का मामला

आईआईटी बॉम्बे में परीक्षा के दौरान एक छात्र, साहिल वकोडे, को चीटिंग करते हुए पकड़ा गया था। इसके बाद उसने आत्महत्या कर ली जो पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया है। साहिल के माता-पिता ने चर्चित फैकल्टी प्रोफेसर सूर्यनारायण डूला के खिलाफ SC/ST एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया है। वे उनकी गिरफ्तारी के लिए धरना-प्रदर्शन भी कर रहे हैं।

प्रोफेसर डूला का समर्थन

तमिलनाडु के दलित नेता अनंतन अय्यासामी ने प्रोफेसर डूला का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि वे SC/ST एक्ट के तहत दर्ज किए गए आरोपों का विरोध करते हैं। अनंतन ने इसे एक बड़ी समस्या बताते हुए कहा कि इस कानून का दुरुपयोग करने से न केवल शिक्षकों को, बल्कि समाज के वरिष्ठ तबके को भी नुकसान हो रहा है।
अनंतन ने स्पष्ट किया है कि उनके DKV समुदाय ने एक सहमति बनाई है कि वे SC/ST मामलों का समर्थन नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि उनके समुदाय के लोग इस कानून के दुरुपयोग के खिलाफ हैं। उन्होंने इसे एक हथियार के रूप में इस्तेमाल किए जाने की आवश्यकता पर भी चिंता जाहिर की।

आरक्षण का मुद्दा

अनंतन अय्यासामी, जो दिल्ली में भाजपा के जिलाध्यक्ष भी हैं, ने इस बात पर जोर दिया कि उनके समुदाय का एक बड़ा हिस्सा आरक्षण का लाभ छोड़ना चाहता है। उन्होंने कहा, “हमें दलित मत कहिए। हम अपने अधिकारों के लिए संकल्पित हैं और आगे बढ़ना चाहते हैं।”
DKV समुदाय की आवाज अब और भी मजबूत हो रही है। अनंतन ने कहा कि इस प्रकार के निर्णय से वे समाज में एक सकारात्मक बदलाव लाने की कोशिश कर रहे हैं। उनका मानना है कि इस तरीके से वे न केवल अपने अधिकारों की रक्षा कर सकते हैं, बल्कि शिक्षा क्षेत्र में भी सुधार ला सकते हैं।

देश का संदेश

अनंतन ने कहा कि यदि प्रोफेसर डूला जैसे शिक्षकों पर सवाल उठाए जाते हैं और उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता है तो इससे युवा छात्रों में गलत संदेश जाएगा। उनका स्पष्ट संदेश है कि शिक्षकों और छात्रों दोनों को एक सकारात्मक वातावरण में काम करने का हक है।

समाज में नई सोच का आगाज़

डीकेवी समुदाय का यह नया निर्णय न केवल उनकी पहचान को नया आयाम दे रहा है, बल्कि यह समाज में एक नई सोच को भी जनम दे रहा है। यह निश्चित रूप से देखने लायक होगा कि आने वाले समय में इस समुदाय के कदम किस दिशा में बढ़ते हैं।

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