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April 5, 2025

Delhi-Dehradun Expressway: एक घर के कारण रुका दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का निर्माण

Delhi Dehradun Expressway का निर्माण लगभग पूरा होने वाला है, लेकिन मंडोला में दिवंगत वीरसेन सरोहा का दो मंजिला मकान कानूनी लड़ाई के कारण इसे रोक रहा है। यह विवाद 1998 की मंडोला हाउसिंग स्कीम से शुरू हुआ और अब तक इसका निपटारा नहीं हो पाया है।

Expressway ने उजाड़ा गांव

Delhi Dehradun Expressway: वीरसेन सरोहा जब 1990 के दशक में मंडोला में 1600 स्क्वेयर मीटर के घर में रहते थे, तब उनके आसपास एक छोटा सा गांव बसा हुआ था, जहां लोग अपने परिवार सहित रहा करते थे। 1998 में उत्तर प्रदेश हाउसिंग बोर्ड ने Delhi Ghaziabad Border पर छह गांवों को नोटिस भेजा कि वह मंडोला हाउसिंग स्कीम के लिए उनकी 2614 एकड़ जमीन का अधिगृहण चाहता है, तब विरसेन सरोहा सहित गांव के लोगों के सामने अचानक ‘क्या करें-क्या ना करें’ वाली परिस्थिति आ खड़ी हुई। कई परिवारों को अपनी जमीन छोड़ने के लिए मनाया गया, और उचित मुआवजा देने का वादा भी किया गया । कुछ समय बाद सभी गांव वाले अपनी ज़मीन, अपना घर और गांव छोड़कर कहीं और बसने के लिए तैयार भी हो गए, लेकिन वीरसेन इसके लिए राज़ी नहीं हुए। उन्होंने इलाहबाद हाई कोर्ट का रुख किया। विरोध प्रदर्शनों के कारण यह Housing Scheme कभी पूरी भी न हो सकी। कुछ सालों बाद हाउसिंग बोर्ड ने यह जमीन Delhi Dehradun Expressway के लिए नेशनल हाइवे ऑथोरिटी को दे दी। लेकिन परेशानी वही- वीरसेन सरोहा का घर! Delhi Dehradun Expressway अब लगभग तैयार हो चुका है, लेकिन वह घर अब भी बड़ी बाधा बना हुआ है। मकान अब वीरान हो चुका है लेकिन इसकी वजह से हाईवे का यह हिस्सा अधूरा पड़ा है। 90 के दशक से यह मकान जस का तस ऐसे ही मौजूद है। एक्सप्रेसवे के दोनों ओर निर्माण पूरा हो चुका है, लेकिन यह बीच का हिस्सा अब भी अधर में लटका है। गाजियाबाद के मंडोला में एक घर 90 के दशक से जस का तस खड़ा है, और उसके दोनों तरफ़ हाईवे बनकर तैयार हो चुका है।

क्या है पूरा मामला

Delhi Dehradun Expressway का निर्माण लगभग पूरा होने वाला है, लेकिन मंडोला में दिवंगत वीरसेन सरोहा का दो मंजिला मकान कानूनी लड़ाई के कारण इसे रोक रहा है। यह विवाद 1998 की मंडोला हाउसिंग स्कीम से शुरू हुआ। यहां UP Housing Board ने 1,100 रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से ज़मीन का अधिग्रहण किया था। वीरसेन ने मुआवज़ा लेने से इनकार कर दिया और अदालत का दरवाज़ा खटखटाया। हाउसिंग स्कीम के खिलाफ प्रोटेस्ट करने वाले नीरज त्यागी ने बताया कि सरोहा उन लोगों में से थे जो मुआवज़े की रकम बढ़वाना चाहते थे। उन्होंने 2007 में अदालत का रुख किया। मामला लंबा खिंचा और फैसला आने से पहले ही सरोहा का निधन हो गया। साल 2017 से 2020 के बीच हाइवे ऑथोरिटी ने एक्सप्रेसवे बनाने का काम शुरू कर दिया। प्राधिकरण को मंडोला में रैंप बनाने के लिए मंडोला में जमीन की जरूरत थी। Housing Board ने यह जमीन हाइवे प्राधिकरण को दे दी जिसके बाद मामला और उलझ गया। अब 2024 में सरोहा के पोते ने भारतीय हाइवे प्राधिकरण को ज़मीन हस्तांतरण को चुनौती दी है। उन्होंने अदालत में दावा किया है कि जमीन हाउसिंग बोर्ड की थी ही नहीं।

निर्माण के आखिरी चरण में Delhi Dehradun Expressway

Delhi Dehradun Experssway मामला अब सुप्रीम कोर्ट में है। अगली सुनवाई 16 अप्रैल को होनी है। अक्षरधाम से उत्तराखंड तक फैले 212 किलोमीटर के Expressway का निर्माण कार्य अपने अंतिम चरण में है। एक्सप्रेसवे का उद्देश्य दिल्ली-बागपत ड्राइव के समय को 30 मिनट से कम करना है। अगर यह हाइवे बन जाता है तो लोनी से होते हुए दिल्ली-बागपत को कनेक्ट किया जा सकेगा। Delhi Dehradun Expressway चालू हो जाने से दिल्ली से देहरादून पहुंचने में 6 घंटे की बजाय मात्र ढाई घंटे का समय लगेगा। दिल्ली से बागपत का हिस्सा बनकर तैयार है, जो कि 32 किलोमीटर है। दिल्ली के अंतगर्त आने वाला 17 किलोमीटर वाला सेक्शन Elevated है। बाकी 15 किलोमीटर वाला हिस्सा गाजियाबाद और बागपत में आता है। बागपत में मवीकला गांव के पास एक्सप्रेसवे को ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे से जोड़ा गया है। Expressway अक्षर धाम से शुरू होता है और लक्ष्मी नगर, गीता कॉलोनी, शास्त्री पार्क, करतार नगर, खजूरी खास, अंकुर विहार, शारदा सिटी, लोनी से होते हुए मावीकला NBCC टाउनशिप से बागपत होते हुए देहरादून की ओर जाता है।

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