दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने शुक्रवार को राजधानी में प्रदूषण नियंत्रण के लिए चार साल का सबसे बड़ा और व्यापक एक्शन प्लान लॉन्च किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह लड़ाई लंबी है और इसके लिए सरकार ने लंबी और छोटी अवधि की रणनीतियों तैयार की हैं। इस योजना का लक्ष्य आने वाले चार वर्षों में दिल्ली के वायु प्रदूषण स्तर, खासकर PM2.5, में महत्वपूर्ण कमी लाना है।
मुख्यमंत्री ने बैठक में कहा कि दिल्ली सरकार साल के 12 महीने और हफ्ते के सातों दिन प्रदूषण नियंत्रण पर काम कर रही है। इसके लिए केंद्र सरकार से मार्गदर्शन और सहयोग लगातार मिल रहा है, और सभी विभागों को समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। बैठक में कई कैबिनेट मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
सार्वजनिक परिवहन में बड़ा विस्तार: 14,000 बसें तक पहुंचाने का लक्ष्य
सरकार ने सार्वजनिक परिवहन को प्रदूषण नियंत्रण का मुख्य हथियार बताया। योजना के तहत मार्च 2029 तक दिल्ली में 14,000 बसें सड़कों पर उतारने का लक्ष्य है।
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2026 तक 6,000 बसें, 2027 तक 7,500 और 2028 तक 10,400 बसें उपलब्ध होंगी।
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500 छोटी बसें लास्ट माइल कनेक्टिविटी के लिए घनी आबादी वाले क्षेत्रों में तैनात की जाएंगी।
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10 प्रमुख मेट्रो स्टेशनों पर ई-ऑटो, बाइक टैक्सी और फीडर कैब के पायलट प्रोजेक्ट अगले साल के अंत तक शुरू होंगे।
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फिलहाल 100 इलेक्ट्रिक फीडर बसें सेवा में हैं।
मेट्रो नेटवर्क का विस्तार भी योजना का अहम हिस्सा है। फेज-4 और फेज V-A/V-B के 206 किमी कार्य के पूरा होने पर मेट्रो की दैनिक सवारी दोगुनी होने की संभावना है। NCRTC नेटवर्क को अगले चार वर्षों में 323 किमी तक बढ़ाया जाएगा, जिससे निजी वाहनों पर निर्भरता कम होगी।
ईवी पॉलिसी 2.0: चार्जिंग नेटवर्क में बड़ा विस्तार
दिल्ली के 58 लाख दोपहिया वाहनों को लक्षित करते हुए ईवी पॉलिसी 2.0 में सब्सिडी और स्क्रैपेज इंसेंटिव दिए जाएंगे।
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चार्जिंग और बैटरी‑स्वैपिंग पॉइंट 9,000 से बढ़ाकर 36,000 किए जाएंगे।
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कमर्शियल ट्रक और थ्री‑व्हीलरों के लिए ब्याज अनुदान और PM E‑Drive योजना के तहत लाभ।
इस कदम से न केवल वाहन उत्सर्जन घटेगा, बल्कि इलेक्ट्रिक वाहनों का इस्तेमाल बढ़ेगा।
ट्रैफिक जाम और रोड डस्ट मैनेजमेंट
सरकार ने दिल्ली में 62 ट्रैफिक कंजेशन हॉटस्पॉट चिन्हित किए हैं, जिनमें से 30 स्थानों पर सुधार कार्य शुरू हो चुका है। 1,200 अतिरिक्त DTC कर्मचारी ट्रैफिक पुलिस के सहयोग में तैनात किए गए हैं।
सड़कों की धूल नियंत्रण के लिए मैकेनाइज्ड सफाई व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है। PWD 4,000 करोड़ रुपये की दो बड़ी परियोजनाओं पर काम कर रहा है, जिनमें 250 स्प्रिंकलर-कम-एंटी-डस्ट मशीनें और 70 नई स्वीपिंग मशीनें शामिल हैं।
लैंडफिल और कचरा प्रबंधन
दिल्ली के प्रमुख लैंडफिल साइट्स की समयबद्ध सफाई पर जोर दिया गया है:
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ओखला: जुलाई 2026
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भलस्वा: अक्टूबर 2026
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गाज़ीपुर: दिसंबर 2027
एमसीडी को इस वर्ष ₹500 करोड़ और अगले हर साल ₹300 करोड़ का बजट मिलेगा। 2026–27 तक सारा ताजा कचरा वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट्स में प्रोसेस किया जाएगा।
औद्योगिक प्रदूषण और हरित पहल
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अब तक 1,000 से अधिक प्रदूषणकारी औद्योगिक इकाइयों को सील किया गया।
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बड़े उद्योगों में रियल-टाइम एमिशन मॉनिटरिंग सिस्टम अनिवार्य।
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अगले चार वर्षों में 3.5 मिलियन नए पौधे लगाए जाएंगे, और 365 एकड़ में ‘ब्राउन पार्क’ विकसित होंगे।
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सर्दियों में 15,500 इलेक्ट्रिक हीटर वितरित किए जाएंगे ताकि बायोमास जलाने पर रोक लग सके।
स्मार्ट पार्किंग और ANPR कैमरे

