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मुंबई में नेगेटिव हो रहें हैं एचआईवी के मामले

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AIDS Day
 
मुंबई में एचआईवी के मामलों में लगातार गिरावट आ रही है। अब मुंबई में एचआईवी के मामले नेगेटिव हो रहे हैं। मुंबई महानगर में एचआईवी को लेकर चलाए जा रहे जागरुकता कार्यक्रमों का सकारात्मक असर मरीजों के संख्या में आई कमी को देखकर लगाया जा सकता है। मुंबई डिस्ट्रिक्ट एड्स कंट्रोल सोसाइटी द्वारा मुंबई में एचआईवी और एड्स (HIV and AIDS Control in Mumbai) के रोकथाम के लिए कई व्यापक प्रोग्राम चलाये जा रहे हैं जिसका असर अब दिखने लगा है।

मुंबई में एचआईवी एड्स कंट्रोल के क्या कहते है आंकड़े

मुंबई डिस्ट्रिक्ट एड्स कंट्रोल सोसायटी (एमडैक्स) से मिले आंकड़ों के अनुसार, 2016-17 में मुंबई महानगर में कुल 6,772 नए एचआईवी के मरीज रजिस्टर्ड हुए थे, 2019-20 में 4473, जबकि 2020-21 में यह आंकड़ा घटकर 2063 रह गया। सबसे ताजा आंकड़ों की मानें तो इस साल अक्टूबर महीने तक महज 1910 ही HIV Patient मिले।

जागरूकता अभियान से कम हो रहा है मुंबई में एचआईवी एड्स (HIV AIDS) के मामले

The CSR Journal से खास बातचीत करते हुए Mumbai AIDS Control Society एमडैक्स के अतिरिक्त परियोजना निदेशक डॉक्टर विजय करंजकर ने कहा कि “एआरटी सेंटर, जांच के लिए उपलब्ध संसाधनों और बीमारी के प्रति लोगों में बढ़ती जागरुकता के चलते मामलों में कमी दर्ज हुई है। हालांकि गुजरा वर्ष कोरोना में बीतने से टेस्टिंग प्रभावित हुई थी। इसलिए नए मामले कम मिले थे। इस आर्थिक वर्ष टेस्टिंग सामान्य रही, लेकिन मामले कम मिले हैं”।

मुंबई में चलाया जा रहा है Know Your HIV Status अभियान

विश्व एड्स दिवस (World AIDS Day) के उपलक्ष में मुंबई डिस्टिक एड्स कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन द्वारा 1 तारीख से लेकर 10 तारीख तक जन जागरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया है। मुंबई में 9 रेलवे स्टेशनों पर एचआईवी जन जागरण एवं जांच अभियान चलाया जा रहा है। जिसका थीम है Know Your HIV Status।
इसके अलावा मुंबई आर्थर रोड जेल और भायखला महिला जेल में ओएसटी सेंटर का उद्घाटन हुआ। एचआईवी संक्रमित महिलाओं के लिए स्वयं महिला मेला, एचआईवी संक्रमित बच्चों के लिए आनंद मेला और एचआईवी संक्रमित वरिष्ठ नागरिकों के लिए उम्मीद मेला का भी आयोजन किया जा रहा है। एचआईवी संक्रमण रोकथाम के लिए अच्छा काम करने वाले कर्मचारियों का सम्मान भी किया जाएगा।
एड्स को गंभीर बीमारी माना जाता है। एक समय था जब एड्स के नाम से ही लोग घबराते थे। लेकिन समय बदलने के साथ एड्स बीमारी के प्रति लोगों को जागरूक और इसके इलाज का तरीका भी बदला है। एचआईवी यानी ह्यूमन इम्यूनोडिफिशिएंसी वायरस को लेकर जागरूकता और मरीजों की झिझक टूटने से इस लाइलाज बीमारी को नियंत्रित किया जा सका है। एचआईवी संक्रमित मरीज पहले इलाज के अभाव में समय से पहले दम तोड़ देते थे। लेकिन अब ऐसे मरीजों की जिंदगी ना सिर्फ बढ़ी है, बल्कि बेहतर ढंग से जीवन यापन भी करना शुरू कर दिया है।

सरकार के साथ सीएसआर भी कर रहा है HIV का खात्मा

सरकार के साथ साथ सीएसआर भी बढ़चढ़ कर HIV/AIDS के ख़ात्मे के लिए कार्यक्रम कर रहा है। ट्रक ड्राइवरों के बीच एचआईवी/एड्स से निपटने के लिए अंबुजा सीमेंट और अपोलो टायर्स अपने सीएसआर पहल HIV को कंट्रोल कर रहे हैं। तो झारसुगुडा में वेदांत का एचआईवी/एड्स जागरूकता अभियान भी बहुत कारगर है। टाटा अस्पताल भी इस पहल में अपना योगदान देता है तो सीएसआर के तहत जॉनसन एंड जॉनसन इंडिया द्वारा प्रेरणा अभियान चलाया जा रहा है।