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दगडूशेठ हलवाई गणपति इन सामाजिक कामों के लिए हैं विख्यात

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अपने वैभव के साथ सीएसआर और समाज सेवा के लिए भी जाने जाते हैं श्रीमंत दगडूशेठ हलवाई गणपति
 
पूरे महाराष्ट्र में गणेशोत्सव की धूम है, मुंबई हो या पुणे पूरे महाराष्ट्र में भक्तगण अपने भगवान की पूरी निष्ठा और भक्तिभाव से पूजा अर्चना कर रहे हैं। श्रीमंत दगडूशेठ हलवाई गणपति पुणे में भक्तों के लाडले भगवान हैं। श्रीमंत दगडूशेठ हलवाई गणपति को पुणे शहर (Pune City News) के गौरव का उच्चतम स्थान माना जाता है। हर साल भारत भर के और देश विदेशों के अनगिनत भक्त इस भगवान के दर्शन पाने के लिये आते हैं। श्री दगडूशेठ हलवाई गणपति मंदिर भक्तों के आदर और भक्ती का स्थान तो है ही, पर इतना ही नहीं, बल्कि समाज-सेवा और संस्कृति-संवर्धन के लिए प्रयत्नशील रही हुई एक महत्त्वपूर्ण संस्था के रूप में भी लोग इसे जानते हैं। गणेशोत्सव के इस पावन त्योहार पर आइए जानते हैं श्री दगडूशेठ हलवाई गणपति मंदिर के सीएसआर (CSR – Corporate Social Responsibility) और सामाजिक (Social Initiatives during Ganesh Utsav) पहल।

अच्छे स्वास्थ्य के लिए मरीजों को भोजन वितरित करता है श्रीमंत दगडूशेठ हलवाई गणपति

‘श्री दगडूशेठ हलवाई गणपति मंदिर ट्रस्ट’ (Shreemant Dagdusheth Halwai Sarvajanik Ganpati Trust, Pune) इस नाम से यह संस्था कार्यरत है और अन्नदान, ओल्ड ऐज होम, ग्रामीण विकास, स्वास्थ्य, शिक्षा, जल संरक्षण जैसे कई सामाजिक और सीएसआर के कामों को करती है। सितंबर 2013 से, श्रीमंत दगडूशेठ हलवाई गणपति ट्रस्ट पुणे के ससून जनरल अस्पताल में प्रतिदिन 1200 रोगियों को स्वस्थ और शुद्ध शाकाहारी भोजन प्रदान करता है। ट्रस्ट ने अस्पताल में भर्ती मरीजों के परिजनों के लिए वेटिंग रूम की भी व्यवस्था की है। ‘श्री दगडूशेठ हलवाई गणपति मंदिर ट्रस्ट’ (Shreemant Dagdusheth Halwai Sarvajanik Ganpati Trust, Pune) वृद्धाश्रम भी संचालित करता है। पिताश्री ओल्ड एज होम पुणे के कोंढवा इलाके में श्रीमंत दगडूशेठ हलवाई गणपति ट्रस्ट द्वारा शुरू किया गया था। यह पहल वरिष्ठ नागरिकों को अपना शेष जीवन शांति और सद्भाव में बिताने में मदद करता है।

बच्चों की शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान देता है श्रीमंत दगडूशेठ हलवाई गणपति

बच्चों के सर्वांगीण विकास की बात करें तो ट्रस्ट हमेशा से आगे रहा है। ट्रस्ट पूरे पुणे में 550 वंचित बच्चों को संरक्षण प्रदान करता है जिसमें वह बच्चों की शिक्षा और उससे आगे की देखभाल करता है। बच्चों की पूर्ण सुरक्षा और अच्छे स्वास्थ्य को सुनिश्चित करने के लिए बच्चों के लिए मेडिकल कैंप आयोजित करता है। उन्हें मुफ्त स्वास्थ्य बीमा और काउंसलिंग भी प्रदान करता है। श्रीमंत दगडूशेठ हलवाई गणपति ट्रस्ट वंचित छात्रों की भलाई और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की दिशा में भी काम करता है। ज्ञानवर्धन अभियान के तहत पुणे भर के 55 स्कूलों के 550 वंचितों तक योग्य छात्रों को सुविधा प्रदान करता है। एक साधारण छात्र को एक असाधारण इंसान में बदलने के लिए ट्रस्ट हर संभव उपाय करता है।

जल संरक्षण कर महाराष्ट्र के दुर्गम क्षेत्रों और सूखाग्रस्त इलाकों में पानी पहुंचाता है गणपति मंदिर

ट्रस्ट ने महाराष्ट्र के सूखाग्रस्त इलाकों में पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए एक पहल शुरू की है। ‘जलगंगा’ के नाम से मशहूर इस पहल ने कई किसानों और गांवों को उम्मीद दी है। पानी की निरंतर आपूर्ति के लिए महाराष्ट्र के दुर्गम क्षेत्रों में पानी के टैंकर भेजे जाते हैं। इस पहल के तहत बांधों में जमा अतिरिक्त मिट्टी को निकालने का कार्य भी किया जाता है। श्रीमंत दगडूशेठ हलवाई गणपति ट्रस्ट 1986 से पुणे और उसके आसपास मुफ्त एम्बुलेंस सेवाएं प्रदान कर रहा है। इस सेवा के पीछे की विचारधारा ‘मनुष्य की सेवा करना भगवान की सेवा करने के बराबर है।’

पुणे नगर निगम के मरीज मुफ्त एम्बुलेंस सेवाओं का लाभ उठा सकते हैं और इससे बाहर के मरीज भी आ सकते हैं। क्षेत्र को केवल ईंधन के लिए भुगतान करने की आवश्यकता है। यह सेवा ससून जनरल अस्पताल और लोहे गांव हवाई अड्डे पर प्रदान की जाती है। इसके अलावा, ट्रस्ट पालखी समारोह के दौरान मुफ्त एम्बुलेंस सेवाएं भी प्रदान करता है। ग्रामीण क्षेत्र में बेरोजगार लोगों के लिए रोजगार के अवसरों का लाभ उठाने के लिए सरकार द्वारा प्रमाणित औद्योगिक प्रशिक्षण केंद्र ट्रस्ट की एक और पहल है। ग्रामीण विकास कुछ ऐसा ट्रस्ट है जिसका लक्ष्य आईटीआई की स्थापना करना है।

श्रीमंत दगडूशेठ हलवाई गणपति के पीछे है वैभवशाली परंपरा

कई साल पहले अपना इकलौता बेटा प्लेग में खोने के बाद श्रीमंत दगडूशेठ और उनकी पत्नी लक्ष्मीबाई, इन दोनों ने इस गणेश मूर्ति की स्थापना की थी। उसके बाद अब हर साल ना केवल श्री दगडूशेठ का परिवार बल्कि आसपास के सभी लोग भाव-भक्ति से और बड़े जोश के साथ गणेशोत्सव मनाते रहे। तब अपनी जवान उम्र में तात्यासाहेब गोडसे इस गणेश-उत्सव के एक उत्साही कार्यकर्ता थे। बाद में जब लोकमान्य तिलक जी ने आजादी के संघर्ष में लोगों को इकट्ठा करने के लिये गणेशोत्सव को सार्वजनिक उत्सव का रूप दिया तब दगडूशेठ गणपति को सर्वाधिक लोकप्रियता का सम्मान प्राप्त हुआ।
उदार व्यक्ति और भक्त मंदिर के दान-पात्र में बहुत उदारता के साथ अपना दान देते रहे। तब तात्यासाहेब और उनके मित्र-परिवार ने सोचा, कि इस निधि से अपने ही लोगों की सेवा करने से बढ़कर ईश्वरसेवा और क्या हो सकती है? इस ध्येय से प्रेरित इन युवकों ने सामाजिक और सांस्कृतिक विकास के क्षेत्र में कदम रखा। मंदिर में किये जाने वाले धर्मकार्य तो पूरे हर्षोल्लास से होते ही रहे, पर उन्होंने अपने राज्य के सामाजिक और राजनीतिक प्रश्नों की ओर भी। अपना ध्यान मोडा। आज श्री गणेश जी के आशीर्वाद से ’श्रीमंत दगडूशेठ हलवाई सार्वजनिक गणपती ट्रस्ट’ ये एक समाज की अगुवाई करने वाली समृद्ध संस्था बन चुकी है।