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इंफोसिस लिमिटेड (Infosys Limited) की सीएसआर रिपोर्ट

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इंफोसिस सीएसआर रिपोर्ट
 
कॉर्पोरेट दुनिया में इंफोसिस लिमिटेड (Infosys Limited) का नाम नैतिकता के लिए जाना जाता है। इंफोसिस भारत की आईटीईएस (Information Technology Enabled Services) क्षेत्र की प्रमुख कंपनी है। इंफोसिस Sustained Financial Performance के साथ, कंपनी ने बहुत पहले से ही कॉर्पोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी पहल की शुरुआत की थी। इंफोसिस कंपनी ने भारत की शिक्षा, ग्रामीण विकास, लिंग समानता और महिला सशक्तिकरण, पर्यावरण स्थिरता, संरक्षण, राष्ट्रीय धरोहर और संस्कृति, भूख, गरीबी, कुपोषण और स्वास्थ्य के क्षेत्रों में काम करती है।
भारत में कंपनियों के लिए कॉर्पोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी कानून (Corporate Social Responsibility Law in India) के आने से पहले इंफोसिस फाउंडेशन (Infosys Foundation) अपने सीएसआर पहल के माध्यम से विकास परियोजनाओं पर खर्च कर रहा है। The CSR Journal अपनी #LetsTalkCSR सीरीज में, Infosys की CSR पहलों का मूल्यांकन कर रहा है। इंफोसिस के कॉर्पोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी पहल ने अपनी स्थापना के बाद से एक लाख से अधिक जीवन में बदलाव लाया है और हर साल हजारों की जिंदगियों को सकारात्मक रूप से प्रभावित कर रहा है।

इंफोसिस का सीएसआर खर्च

CSR spend of Infosys Ltd in the last 5 years

1. इंफोसिस फाउंडेशन – इंफोसिस का सीएसआर आर्म

कंपनी इंफोसिस फाउंडेशन (Infosys Foundation) के माध्यम से भारत में अपनी सीएसआर गतिविधियों को अंजाम देती है। इंफोसिस फाउंडेशन की स्थापना 1996 में हुई थी। जहां कंपनी संचालित होती है उसके आसपास इंफोसिस अपने सीएसआर परियोजनाओं के माध्यम से काम करती है।

2. सीएसआर नीति

इंफोसिस के सीएसआर नीति का इरादा –
– आर्थिक विकास के लिए प्रयास करना जो न्यूनतम संसाधन के साथ बड़े पैमाने पर समाज को सकारात्मक (Positive Social Impact) रूप से प्रभावित करता है।
– कंपनी के कार्यों से भूख, गरीबी, कुपोषण, पर्यावरण, समुदायों, हितधारकों और समाज पर अपनी गतिविधियों के माध्यम से सकारात्मक प्रभाव को प्रोत्साहित करता है।

2.1 सीएसआर समिति

कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय के दिशानिर्देशों के अनुसार, कंपनी ने सीएसआर नीति के कार्यान्वयन की निगरानी के लिए एक बोर्ड-स्तरीय सीएसआर समिति का गठन किया है। कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 135 की अनुसूची VII के अनुसार इंफोसिस की सीएसआर कमेटी जरूरतमंद क्षेत्रों, और महत्वपूर्ण आवश्यकताओं को सूचीबद्ध करती है। इंफोसिस के सीएसआर समिति में दो स्वतंत्र निदेशक और एक पूर्णकालिक निदेशक सदस्य के रूप में शामिल हैं:
1) सुश्री किरण मजूमदार शॉ (अध्यक्ष)
2) डॉ पुनीता कुमार-सिन्हा
3) श्री यू.बी. प्रवीण राव
4) रूपा कुडवा (एक स्वतंत्र निदेशक के रूप में अपना कार्यकाल पूरा होने पर, वह 03 फरवरी, 2020 से प्रभावी समिति की सदस्य बनीं)
सीएसआर समिति निम्नलिखित कार्य करती है –
– सीएसआर गतिविधियों के लिए खर्च की राशि की सिफारिश करती है।
– समय-समय पर सीएसआर गतिविधियों की निगरानी करती है।
समिति रणनीति बनाने और सीएसआर के कामों की निगरानी करने के साथ-साथ इंफोसिस की सामाजिक विकास परियोजनाओं के परिणामों के लिए हर तिमाही में बैठक करती है।

2.2 इंफोसिस की सीएसआर टीम (CSR Team of Infosys)

इंफोसिस फाउंडेशन की अध्यक्षता जानी मानी लेखक और परोपकारी श्रीमती सुधा मूर्ति (Sudha Murthy) करती है। नेतृत्व टीम में कंपनी के स्टालवार्ट भी शामिल हैं जिसमें श्री यू.बी. प्रवीण राव, श्री रामदास कामथ, श्री बिनोद हमपुर और श्री सुनील कुमार देवेश्वर है।

3. सीएसआर रणनीति

इंफोसिस अपने सीएसआर पहल से विकास के लिए प्रयास करती है। जो समाज पर सकारात्मक प्रभाव डालती है और समुदाय के जीवन में एक स्थायी बदलाव लाती है। सीएसआर परियोजनाएं कंपनी के कार्यों की जिम्मेदारी लेती हैं और भूख, गरीबी, कुपोषण, पर्यावरण, समुदायों, हितधारकों और समाज पर इसकी गतिविधियों के माध्यम से सकारात्मक प्रभाव को प्रोत्साहित करती हैं।

4. इंफोसिस के सीएसआर में हेल्थ केयर

4.1 निराश्रित देखभाल केंद्र – एम्स की भागीदारी के साथ

गरीब कैंसर रोगियों को अक्सर अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (All India Institute of Medical Sciences – AIIMS), झज्जर, हरियाणा के राष्ट्रीय कैंसर संस्थान (NCI – National Cancer Institute) में पेशेंट के साथ आने वाले परिवार के सदस्यों के साथ अस्थायी आश्रयों की तलाश करनी पड़ती है। ऐसे रोगियों और उनके परिवारों के लिए इंफोसिस फाउंडेशन ने अस्पताल के साथ परिसर में एक 800-बेड धर्मशाला बनाने के लिए सहयोग किया है।
NCI, AIIMS – नई दिल्ली (झज्जर परिसर) भारत सरकार की सबसे बड़ी फ्लैगशिप परियोजनाओं में से एक है। ये संस्थान कैंसर देखभाल और रोकथाम में अनुसंधान के लिए शीर्ष केंद्र के रूप में स्थापित है। NCI में 710 मरीजों के देखभाल के लिए बेड है, 25 ऑपरेशन थिएटर, 1,500 आवास इकाइयां, अत्याधुनिक निदान व अन्य उपचार की सुविधाएं है।
उपचार के दौरान कैंसर रोगियों को अक्सर लंबे समय तक अस्पताल के चक्कर लगाने पड़ते हैं, जिसके दौरान उन्हें अपने और अपने परिवार के लिए रहने के लिए आवास की आवश्यकता होती है। इंफोसिस फाउंडेशन ऐसे गरीब और जरूरतमंद कैंसर रोगियों और उनके परिवार वालों को रहने के लिए आश्रय प्रदान करना है।

4.2 बेसिक हेल्थ केयर प्रदान करना

पूरे देश की तुलना में झारखंड में महिलाएं पीछे हैं, क्योंकि झारखंड ज्यादातर एक आदिवासी क्षेत्र है, जो दुर्गम क्षेत्रों और गांवों में टेक्नोलॉजी से अछूता है। झारखंड अपने खनिज उत्पादों और इस्पात निर्माण के लिए जाना जाता है। जन चेतना मंच, बोकारो (JCMB – Jan Chetna Manch, Bokaro) झारखंड शहर के आसपास ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं के स्वास्थ्य, वित्तीय स्वतंत्रता और सशक्तिकरण पर कई वर्षों से काम कर रहा है। इंफोसिस फाउंडेशन जन चेतना मंच, बोकारो के साथ मिलकर काम कर रहा है। 1994-95 में स्थापित जन चेतना मंच, झारखंड के बोकारो जिले के चंदनकियारी ब्लॉक में स्थित है। जन चेतना मंच बड़े पैमाने पर इस ब्लॉक के गांवों और पड़ोसी चास ब्लॉक में महिलाओं के स्वास्थ्य और सशक्तिकरण पर काम कर रहा है। संगठन में अब 8,000 से अधिक सदस्य हैं।
इन दुर्गम इलाकों में महिलाएं स्वास्थ्य सेवाओं से जूझ रही थी, खासकर गर्भावस्था और प्रसव के दौरान। 1997 में, Self Help Groups द्वारा आर्थिक रूप से समर्पित पहला महिला स्वास्थ्य केंद्र स्थापित किया गया था। इन वर्षों में, महिला स्वास्थ्य केंद्र का विस्तार हुआ और अब यह लगभग 1,600 महिलाओं और प्रसव सेवाओं को प्रति वर्ष 1,000 से अधिक महिलाओं को प्रसव पूर्व देखभाल प्रदान करता है। इस वर्ष, इंफोसिस फाउंडेशन ने केंद्र में अधिक देखभाल सेवाएं प्रदान करने के लिए स्वास्थ्य केंद्र के संचालन में महत्वपूर्ण योगदान दिया, ताकि महिलाओं को बेहतर देखभाल प्राप्त करने के लिए लंबी दूरी की यात्रा न करनी पड़े।
वर्तमान स्वास्थ्य केंद्र में महिलाओं के लिए 12 बेड, दो बेड का शिशु कक्ष, एक ऑपरेशन थियेटर, प्रयोगशाला, फार्मेसी, दो एम्बुलेंस और एक क्लिनिक है। जेसीएमबी में आठ सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं और 70 स्वास्थ्य गाइडों (स्वास्थ्य साखियों) की एक टीम है, जो लगभग एक लाख की आबादी तक पहुंचते हैं, जो 100 गांवों में फैले हुए हैं। 30 बेड का एक नया स्वास्थ्य केंद्र बनाया जा रहा है और निर्माण पूरे जोरों पर है। इंफोसिस ने कई और ग्रामीण महिलाओं को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने के लिए अपने सीएसआर फंड का उपयोग किया।
2018 में फाउंडेशन की मदद के बाद, JCMB ने स्वास्थ्य केंद्र के लिए एक अतिरिक्त एम्बुलेंस खरीदी और महिलाओं के स्वास्थ्य केंद्र में सुविधाओं में सुधार किया। केंद्र और आउटरीच क्लीनिकों में 5,800 से अधिक परामर्श आयोजित किए गए थे, और पिछले 6 महीनों में 850 से अधिक महिलाओं को केंद्र में इलाज के लिए भर्ती कराया गया था। सालों से, बोकारो में लोग किफायती मूल्य पर गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा प्राप्त करने के लिए संघर्ष कर रहे थे और जेसीएमबी और इंफोसिस फाउंडेशन के बीच इस सहयोग ने बोकारो के नागरिकों को गुणवत्ता स्वास्थ्य सेवा तक पहुंच का यह मूल अधिकार दिया है।

5. इंफोसिस सीएसआर में शिक्षा

इंफोसिस एक टेक्नोलॉजी कंपनी है और देश में शिक्षा के मानकों में सुधार लाने अग्रसर है। कंपनी हर साल हजारों इंजीनियरों को भर्ती करती है और प्रशिक्षित करती है और देश में शिक्षा के स्तर के बारे में पहले से जानकारी रखती है। यह अवंती फेलो जैसे अन्य नॉन प्रॉफिट पार्टनर के साथ काम कर रही है, जो एसटीईएम (STEM – Science, Technology, Engineering and Mathematics) में हाई पेइंग वाले करियर को हासिल करने के लिए सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे लो इनकम ग्रुप के छात्रों की मदद करने के क्षेत्र में काम कर रही हैं।

5.1 अवंती फैलो पार्टनरशिप

2014 में, इंफोसिस फाउंडेशन ने अवंती फैलो के साथ भागीदारी की, जो एक नॉन प्रॉफ़िट्स है। भारत में शिक्षा स्तर कैसे है ये जग जाहिर है, यहां रट-लर्निंग ज्यादा है इसलिए अधिकांश ग्रेजुएट भी बेरोजगार हैं। Avanti Fellows की शुरुआत 2010 में हुई, जो सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले गरीब और शोषित समुदायों के छात्रों की मदद करने के लिए STEM (विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित) में हाई पेइंग वाले करियर हासिल करने में मदद करता है। अवंती की मदद से पिछले 8 वर्षों में 40,000 छात्रों ने अच्छी गुणवत्ता शिक्षा के अपने सपने को हासिल करने में मदद की है। इस साझेदारी से वंचित छात्रों को गुणवत्तापूर्ण एसटीईएम शिक्षा प्राप्त करने और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) और राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) में प्रवेश पाने के अपने सपने को साकार करने में मदद मिली है।

5.2 इंजीनियरिंग के छात्रों को रोजगारपरक बनाना

इंफोसिस फाउंडेशन ने सितंबर 2014 में स्पार्क-आईटी कार्यक्रम शुरू किया। स्पार्क-आईटी कार्यक्रम की शुरुआत विशेष रूप से इंजीनियरिंग छात्रों के लिए किया गया था, तीन महीने के कोर्स के दौरान जिन छात्रों ने लगातार अकादमिक रूप से अच्छा प्रदर्शन किया उनके लिए टेक्नोलॉजी और कम्युनिकेशन स्किल की ट्रेनिंग दिया जाता है। इस कार्यक्रम को जबरदस्त प्रतिसाद मिला और पूरे देश के छात्रों को आकर्षित किया। इंफोसिस फाउंडेशन ने दायरा बढ़ाते हुए दिल्ली, हैदराबाद और पुणे में कई संस्थानों के साथ इस तरह कार्यक्रम के लिए करार किया।

5.3 कक्षाओं में भूख को खत्म करना

प्राथमिक स्कूलों में ड्रॉप आउट्स की दर बहुत अधिक है, इसका सबसे बड़ा कारण है गरीबी। क्योंकि गरीबी के कारण कम आय वाले परिवारों के बच्चों को दो वक़्त का खाना भी नसीब नहीं हो पाता। इंफोसिस फाउंडेशन ने बेंगलुरु के बन्नेरघट्टा फॉरेस्ट एरिया में श्री रामकृष्ण विद्या केंद्र के साथ मिलकर बीपीएल (गरीबी रेखा से नीचे) परिवारों के बच्चों को मुफ्त भोजन दिया इससे उनके बीच शिक्षा को बढ़ावा मिला।

6. सस्टेनेबल प्रोजेक्ट्स

6.1 कार्बन ऑफसेट कार्यक्रम

2011 में इंफोसिस ने कार्बन न्यूट्रल बनने की प्रतिबद्धता जताई। तब से लगातार इस लक्ष्य के लिए कंपनी काम कर रही हैं। संयुक्त राष्ट्र ने भी इंफोसिस के कार्बन-न्यूट्रल कार्यक्रम की उपलब्धियों की सराहना की है। इंफोसिस ने मैड्रिड, स्पेन में संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन में 2019 संयुक्त राष्ट्र वैश्विक जलवायु का पुरस्कार हासिल किया। इंफोसिस इस गौरव को हासिल करने वाली पहली भारतीय कंपनी बन गई। इंफोसिस में लगभग 3 लाख कर्मचारी हैं। आईटी दिग्गज होने और दुनिया के विभिन्न देशों में ऑफिस और सर्वर होने के कारण उनके पास एक विशाल कार्बन फुटप्रिंट था। 2011 में, इंफोसिस ने कार्बन-न्यूट्रल कंपनी बनने की प्रतिबद्धता जताई। पिछले दशक में, कंपनी ने इस लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में बहुत बड़ा कदम उठाया है, जो भविष्य की पीढ़ी के लिए बेहतर स्थिति में पृथ्वी को छोड़ देगा।
वर्तमान में, इंफोसिस के पास कर्नाटक, महाराष्ट्र, राजस्थान, लद्दाख और ओडिशा में फैले लगभग 145 करोड़ रुपये की कुल लागत वाली आठ सामुदायिक-आधारित ऑफसेट परियोजनाओं का एक पोर्टफोलियो है। इनमें से छह परियोजनाएँ, जो एक वर्ष से अधिक समय से चल रही हैं, 1,25,000 से अधिक ग्रामीण परिवारों और लगभग 5,00,000 लोगों को लाभान्वित करती हैं। पोर्टफोलियो में दो परियोजनाएं वित्त वर्ष 2020 में शुरू हुईं – कर्नाटक में एक घरेलू बायोगैस परियोजना और महाराष्ट्र में एक कुशल कुकस्टोव परियोजना। इन परियोजनाओं से लगभग 60,000 ग्रामीण परिवारों को लाभ मिलने वाला है।
मिनिस्ट्री ऑफ़ स्टेटिस्टिक्स एंड प्रोग्राम इम्प्लीमेंटेशन के अनुसार, भारत में खाना पकाने के पारंपरिक तरीकों से घरेलू वायु प्रदूषण के कारण एक वर्ष में करीब दस लाख मौतें होती हैं। महिलाओं और लड़कियों को इस प्रदूषण का खामियाजा भुगतना पड़ता है और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इंफोसिस के सीएसआर द्वारा इस परियोजना से ग्रामीण क्षेत्रों में खाना पकाने की सुविधा और घर की रोशनी में सुधार हुआ है। ऑफसेट परियोजनाओं का सबसे महत्वपूर्ण लाभ स्वास्थ्य में सुधार है। इंफोसिस सीएसआर की बायोगैस और कुकस्टोव परियोजनाएं अनिवार्य रूप से स्मोक फ्री और गर्मी से मुक्त खाना पकाने का वातावरण प्रदान करती हैं जो पारंपरिक खाना पकाने के प्रतिकूल स्वास्थ्य प्रभावों को कम करती हैं।

6.2 कार्बन की बचत के लिए स्मार्ट इन्फ्रास्ट्रक्चर

इंफोसिस की नई इमारतों ने कॉर्पोरेट्स के लिए एक मिसाल कायम करते हुए इनोवेशंस और एफिशिएंसी की सीमाओं को आगे बढ़ाया है। स्मार्ट ऑटोमेशन की वजह से लगभग 30 मिलियन स्क्वायर फीट में रिमोटली निगरानी, नियंत्रण और संचालन को सक्षम किया है। बिजली बचत के लिए इन इमारतों में सेंसर लगाए गए है। सिस्टम ऑटो पायलट मोड में इन-बिल्ट शेड्यूलिंग और ऊर्जा-बचत एल्गोरिदम के साथ ये तकनीक काम करती है। यह कंपनी के लिए हर साल भारी बचत करता है और साथ ही इसके कार्बन उत्सर्जन को कम करता है।
इन स्मार्ट पहलों ने न केवल प्रदूषण को कम करने में मदद की बल्कि COVID-19 महामारी के कारण मौजूदा अभूतपूर्व स्थिति में भी काफी हद तक मदद की। स्मार्ट बिल्डिंग ऑटोमेशन इमारतों में निर्बाध संचालन को प्रबंधित करने का एक महत्वपूर्ण कारक रहा है, जिसमें डेटा सेंटर जैसी महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे शामिल हैं। स्मार्ट शेड्यूलिंग और इंटेलिजेंट एल्गोरिदम का उपयोग करके, ऑपरेशन के कर्मचारियों की भौतिक उपस्थिति को कम से कम किया गया है।

6.3 इंफोसिस ने सीएसआर से किया मैसूरु झील का कायाकल्प

मैसूरु में हेब्बल झील लगभग 40 एकड़ में फैली हुई है। ये झील कभी पीने योग्य पानी के एक महत्वपूर्ण स्रोत के रूप में जाना जाता था। लेकिन सालों से इस खूबसूरत झील के चारों ओर सीवेज छोड़ दिया गया। नतीजा कभी इस इलाके पीने का पानी ये झील देती थी और आज ये झील प्रदूषित हो गयी। अपनी सीएसआर गतिविधियों में इंफोसिस ने मैसूर प्रशासन – केआईएडीबी और मुडा के साथ मिलकर झील का कायाकल्प किया और इसके पिछले गौरव को बहाल किया।
Mrs Sudha Murty at Hebbal Lake, Mysuru
इस परियोजना में डिसिल्टिंग और सौंदर्यीकरण शामिल था। झील के आसपास पैदल पथ बनाया गया। इसके चारों ओर पेड़ लगाया गया। इंफोसिस की मदद से झील के पास एक सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) का निर्माण किया जा रहा है, जिसमें प्रतिदिन 8 मिलियन लीटर सीवेज के ट्रीटमेंट की क्षमता है।

7. COVID-19 राहत के उपाय

भारत में पहला COVID-19 का मामला 30 जनवरी 2020 को दर्ज किया गया था। COVID-19 के कारण भारत में पहली मौत 12 मार्च को हुई थी। 30 मार्च, 2019 को, Infosys Foundation ने COVID-19 के रोकथाम के प्रयासों के लिए 100 करोड़ की घोषणा की । कोरोना वायरस से बचाव के लिए इंफोसिस ने पीएम केयर्स फंड को 50 करोड़ रुपये का दान भी दिया। इंफोसिस फाउंडेशन ने नारायण हेल्थ सिटी (एनएचसी) की मदद से बेंगलुरु में 100-बेड की सुविधा स्थापित करने के लिए अपने सीएसआर फंड का उपयोग किया। इस सुविधा का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों को आवास, डॉक्टरों द्वारा गुणवत्तापूर्ण उपचार और आवश्यक दवाएं उपलब्ध कराना रहा। फाउंडेशन ने बौरिंग और लेडी कर्जन मेडिकल कॉलेज एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट, बेंगलुरु के लिए 182-बेड की क्वारंटीन सुविधा स्थापित की। संस्थान के परिसर में बीबीएमपी सुपर स्पेशलिटी अस्पताल को एक विशेष COVID-19 अस्पताल में बदल दिया गया। फाउंडेशन ने सभी आवश्यक उपकरण खरीदे और स्थापित किए, बुनियादी ढांचे की स्थापना की, जिसमें फर्नीचर और फिटिंग शामिल हैं। आपातकालीन जरूरतों के लिए दो एम्बुलेंस भी प्रदान की गईं।

7.1 इंफोसिस सीएसआर द्वारा फ्रंटलाइन वर्कर्स के लिए वेंटिलेटर, टेस्टिंग किट और पीपीई प्रदान करना

इंफोसिस फाउंडेशन ने COVID-19 के खिलाफ लड़ाई में लगे विभिन्न अस्पतालों की तत्काल आवश्यकताओं की पहचान की और मदद करने के लिए कदम बढ़ाया। वेंटिलेटर, पेशेंट मॉनिटरिंग सिस्टम, वायरल ट्रांसपोर्ट मीडिया, एन 95 मास्क, अन्य मास्क, थर्मामीटर, मेडिकल गैस पाइपलाइन और गैस मैनिफोल्ड सिस्टम और पीपीई किट जैसे मेडिकल उपकरण और इन्फ्रास्ट्रक्चर को पूरे देश भर के अस्पतालों में प्रदान किया गया है। इंफोसिस ने बेंगलुरु में कमांड अस्पताल (आर एंड आर), कानपुर में 7 वायु सेना अस्पताल, गाजियाबाद में 11 वायु सेना अस्पताल, बेलगाम में सैन्य अस्पताल, चिन्मया मिशन अस्पताल, बॉरिंग और लेडी कर्जन मेडिकल कॉलेज एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट, श्री जयदेव इंस्टीट्यूट ऑफ कार्डियोवैस्कुलर साइंसेज और बेंगलुरु में अनुसंधान, और पुणे में सरकारी सिविल अस्पताल में ये मेडिकल इक्विपमेंट्स पहुंचाया गया।

7.2 गरीबों के लिए भोजन और पोषण तक पहुंच

कोरोना की वजह से प्रभावित लोगों की जिंदगियों को इंफोसिस फाउंडेशन ने सुधारने की कोशिश की। गरीबों, जरूरतमंदों और दैनिक भटकने वालों की देखभाल करने की आवश्यकता को इंफोसिस फाउंडेशन ने स्वीकार किया जिनकी आजीविका कोरोना काल में प्रभावित हुई थी।

निष्कर्ष

इंफोसिस फाउंडेशन ने अपनी सीएसआर परियोजनाओं के माध्यम से समाज की मदद करने और सस्टेनेबल डेवलपमेंट को हासिल करने की दिशा में काम किया है। इंफोसिस ने अपनी हाई टेक तकनीकों का इस्तेमाल कर परियोजनाओं का रियल टाइम आधार पर ट्रैक करता हैं। इसलिए कम्युनिटी में प्रभावशाली बदलाव लाने के लिए इंफोसिस सफल है।