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जब भिड़े इंसाफ दिलानेवाले और कानून के रखवाले

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रक्षकों की गुहार कब सुनेगी सरकार, यही सवाल आज सुबह से दिल्ली पुलिस का हर जवान पूछ रहा है, दिल्ली में बवाल है, दिल्ली पुलिस लाचार है, लगातार प्रदर्शन जारी है, देश की सबसे स्मार्ट पुलिस में शुमार दिल्ली पुलिस आज बेबस दिखाई दे रही है, जो पुलिस जनसामान्य को इन्साफ देती रही है वही पुलिस आज इंसाफ के लिए दिल्ली की सड़कों पर उतरकर अपने ही बॉस से गुहार लगा रही है। पुलिस हेडक्वॉर्टर पर भारी संख्या में पुलिस के जवान हाथों में काली पट्टी बांधकर और पोस्टर लेकर प्रदर्शन कर रहे है, ना सिर्फ पुलिस वाले बल्कि इस प्रदर्शन में पुलिस वालों के परिवार वाले भी भारी संख्या में पुलिस मुख्यालय के सामने धरना दे रहे है।
राजधानी दिल्ली में पहली बार इस तरह का नजारा देखने को मिला, ये पहला मौका होगा जब राजधानी के पुलिसवाले अपने ही मुखिया के खिलाफ सड़क पर उतर आए हो। पुलिसकर्मी प्रदर्शन के लिए खुद तो उतरे ही अपने पूरे परिवार के साथ मुख्यालय पहुंचे और अपनी बातें रखीं। तीस हजारी कोर्ट में वकीलों और पुलिस के बीच मामूली बात को लेकर हुई कहासुनी के बाद अब मामला इतना बढ़ गया है कि पूरी दिल्ली पुलिस एक साथ आ गई है। और लगातार प्रदर्शन जारी है जिसको देखते हुए गृह मंत्रालय और पीएमओ भी हरकत में आ गया है, दिल्ली पुलिस कमिश्नर ने गृह मंत्रालय को इस पूरे मामले की रिपोर्ट सौप दी है वही इंडिया गेट पर सुरक्षा के लिए अर्धसैनिक बालों की भी तैनाती कर दी गयी है। देश की राजधानी में दिल्ली पुलिस और वकीलों के बीच भिड़ंत का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी कई बार छिटपुट घटनाएं होती रही हैं, लेकिन 2 नवंबर को हुआ मामला बिल्कुल 1988 जैसा है। तब यानी 1988 में तीस हजारी कोर्ट में वकीलों और पुलिस वालों के बीच संघर्ष हुआ था। उस समय किरण बेदी पुलिस में डीसीपी थी और उन्होंने पुलिस वालों का साथ दिया था। 1988 में तीस हजारी कोर्ट में विवाद के बाद लाठी चार्ज कर वकीलों को पीटा गया था। तब किरण बेदी ने पुलिस वालों का पक्ष लिया था, इसलिए आज ये पुलिस वाले किरन बेदी के नाम का नारा लगा रहे हैं।
हड़ताली पुलिस के साथ साथ वकील भी हड़ताल पर चले गए है, सुबह हड़ताली पुलिस जवानों से डीसीपी ने बात की, उन्हें समझाने की कोशिश की, पुलिस कर्मचारियों के गुस्से को ठंडा करने की भरसक कोशिश की, लेकिन पुलिस के जवान टस से मस नहीं हुए वो अपनी बात दिल्ली पुलिस कमिश्नर के सामने रखने पर अड़े रहे, पुलिस कमिश्नर अमूल्य पटनायक भी सामने आये लेकिन उन्हें यहां भी विरोध का सामना करना पड़ा। प्रदर्शन कर रहे जवानों ने अमूल्य पटनायक के सामने नारे लगाए। दरअसल, दिल्ली पुलिस के जवान लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं और कह रहे हैं कि सीनियर अफसरों को झड़प मामले में दखल देना चाहिए और वकीलों के खिलाफ एक्शन लेना चाहिए। पुलिसकर्मियों का कहना है कि जब हाइकोर्ट भी वकीलों के साथ है और वो उनके केस पर पुलिस अधिकारियों पर एक्शन ले रही है तो पुलिस कमिश्रर उनके साथ क्यों नहीं है? वो कोर्ट के सामने सही चीज को रखने में मदद क्यों नहीं कर रहे हैं। इन बातों को लेकर पुलिस महकमे में नाराजगी है। इसी नाराजगी को लेकर महकमे के मुखिया के खिलाफ ही पुलिस टीम लामबंद हो गई।
हम आपको बता दें कि तीस हजारी कोर्ट के पार्किंग एरिया में पुलिस वैन और वकील की गाड़ी की टक्कर के बाद विवाद शुरू हुआ था। वकीलों ने हवालात में घुसने की कोशिश की थी। इसके बाद हिंसक झड़प हुई और दो वकीलों को गोली लगी थी। 20 पुलिसकर्मी भी जख्मी हो गए थे। दिल्ली हाईकोर्ट ने इस मामले की न्यायिक जांच, दोषी पुलिसकर्मियों को सस्पेंड और घायलों के बयान दर्ज करने के निर्देश पुलिस कमिश्नर को दिए थे।