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Civil Service Day पर जानें ऐसे आईएएस राजेंद्र भारुड़ की कहानी जिसे पढ़ाने के लिए मां ने बेचा देसी शराब

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ये कहानी है ऐसे आईएएस अफसर की जिसे पढ़ाने के लिए मां ने देसी शराब बेचा। ये कहानी ऐसे आईएएस अफसर की है जिसके घर की आर्थिक हालात ऐसी थी कि दो वक़्त की रोटी भी सही से नसीब नहीं हो पाता था। लेकिन मेहनत और लगन से किस्मत बदला जा सकता है और ये कारनामा कर दिखाया डॉ राजेंद्र भरुड़ ने। डॉ राजेंद्र भारुड़ (IAS Rajendra Bharud) का बचपन बेहद गरीबी में गुजरा। उनके परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद खराब थी और उनके पिता का निधन हो गया, जब वे मां के गर्भ में थे। जैसे-तैसे उनकी मां और दादी ने एक झोपड़ी में रहकर शराब बेचने का काम किया और जीवन व्यापन करने लगे।

आईएएस राजेंद्र भारुड़ ने झोपड़ी में रहकर की पढ़ाई

जब राजेंद्र तीन चार महीने के थे, तब उनके रोने पर कुछ कस्टमर उन्हें शराब की कुछ बूंदे चटा देते थे जिसके बाद वे सो जाते थे। जब वे थोड़े बड़े हुए तो उन्हें कस्टमर के लिए पास की दुकान से स्नैक्स लाने पड़ते थे। लेकिन उनका मन हमेशा से पढ़ाई में रहा (IAS Aspirant)। एक दिन जब राजेंद्र से एक ग्राहक ने स्नैक्स लाने के लिए कहा, तो उन्होंने कहा कि वह पढ़ाई कर रहे हैं। इस पर उस व्यक्ति ने कहा कि तुम भील समाज में पैदा हुए हो, तुम भी शराब ही बेचोगे। भील का बेटा क्या कलेक्टर बनेगा।

एक ताने ने बदल दी आईएएस राजेंद्र भारुड़ की जिंदगी

यह ताना सुनकर राजेंद्र और उनकी मां खूब रोई थीं।  धीरे-धीरे राजेंद्र बड़े हुए तो उन्होंने अपनी किस्मत बदलने का फैसला किया। इंटरमीडिएट के बाद उन्होंने मेडिकल का एंट्रेंस एग्जाम क्लियर कर लिया और एमबीबीएस की डिग्री हासिल कर ली। इसके बाद उन्होंने यूपीएससी की तैयारी थी और लगातार दो बार परीक्षा क्रैक कर आईएएस बनने का सपना पूरा कर लिया।

चुनौतीपूर्ण रहा IAS Rajendra Bharud का जीवन, फिर भी सफलता की बुलंदियों को छुआ

राजेंद्र ने बचपन से कठिन चुनौतियों का सामना किया। इसके बावजूद वे पढ़ाई को लेकर गंभीर रहें और आगे बढ़ते रहे। उनका जन्म महाराष्ट्र के आदिवासी भील समुदाय में हुआ था, जहां के तमाम लोगों की परिस्थितियां बेहद खराब होती हैं। लेकिन राजेंद्र ने शुरू से ही अपनी किस्मत को बदलने की ठान ली थी, जिसके लिए उन्होंने कड़ी मेहनत की। डॉक्टरी की पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने सिविल सेवा की तैयारी की और आईएएस अफसर बन गए। आज वे महाराष्ट्र के आदिवासी संशोधन व प्रशिक्षण संस्था के प्रमुख है। डॉ राजेंद्र भारुड़ की कहानी हमें संघर्षों के बावजूद कोशिश करने की सलाह देती है। वे आज समाज के लिए मिसाल बन चुके हैं।

कोरोना काल में आईएएस राजेंद्र भारुड़ की हुई थी जमकर तारीफ

डॉक्टर होने के नाते राजेंद्र भारुड़ ने कोरोना के परिणाम को पहले ही भाप लिया था। कोरोना की दूसरी लहर आने से पहले ही राजेंद्र भारुड़ ने नंदुरबार जिले को ऑक्सीजन युक्त बना दिया था। कोरोना को पहला वेव खत्म हो गया था। जनजीवन पटरी पर लौटने लगा था। प्रशासन भी राहत की सांस लेने लगा था, मगर फरवरी से अचानक महाराष्ट्र से देश में कोरोना की दूसरी लहर शुरू हुई, ऑक्सीजन के अभाव में लोगों की मौतें होने लगी। लेकिन सितंबर 2020 में ही नंदुरबार जिला प्रशासन के प्रयासों से जिले में 600 लीटर प्रति मिनट उत्पादन वाला पहला ऑक्सीजन प्लांट स्थापित किया जा चुका था। इस काम के लिए राजेंद्र भारुड़ की खूब तारीफे हुई थी।