जब भी भारतीय सेना की बात होती है, तो हमारे मन में सीमाओं की रक्षा करते वीर सैनिकों की तस्वीर उभरती है। लेकिन इन सैनिकों के साथ-साथ एक और अदृश्य शक्ति हर पल सक्रिय रहती है, जो युद्ध, आपदा, महामारी और शांति काल में सैनिकों के जीवन की रक्षा करती है। यही शक्ति है आर्मी मेडिकल कॉर्प्स (AMC)। आर्मी मेडिकल कॉर्प्स भारतीय सेना की वह इकाई है, जो न केवल युद्ध के मैदान में घायल सैनिकों का इलाज करती है, बल्कि शांति काल में भी सैनिकों, उनके परिवारों और कभी-कभी नागरिकों तक को स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराती है।
आर्मी मेडिकल कॉर्प्स-कश्मीर से कारगिल तक भारतीय सेना की चिकित्सा रीढ़
आर्मी मेडिकल कॉर्प्स का इतिहास भारत में ब्रिटिश शासन काल से जुड़ा है। इसकी स्थापना 3 अप्रैल 1943को की गई थी। इससे पहले सेना में अलग-अलग मेडिकल सेवाएं थीं, जिन्हें एकीकृत कर AMC का गठन किया गया। स्वतंत्रता के बाद आर्मी मेडिकल कॉर्प्स को भारतीय सेना की एक संगठित और आत्मनिर्भर चिकित्सा शाखा के रूप में विकसित किया गया।
1947 के बाद हुए सभी प्रमुख युद्धों—
• 1947-48 का कश्मीर युद्ध
• 1962 भारत-चीन युद्ध
• 1965 और 1971 के भारत-पाक युद्ध
• कारगिल युद्ध 1999
• आतंकवाद-रोधी अभियानों
में AMC की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है।
भारतीय युद्धों में आर्मी मेडिकल कॉर्प्स की ऐतिहासिक भूमिका
भारतीय सैन्य इतिहास में जितना महत्व हथियारों, रणनीति और वीरता का है, उतना ही महत्व युद्धक्षेत्र में जीवन बचाने वाली चिकित्सा सेवा का भी है। हर युद्ध में जब गोलियों, बमों और दुर्गम परिस्थितियों ने सैनिकों की परीक्षा ली, तब आर्मी मेडिकल कॉर्प्स (AMC) ने अदृश्य मोर्चे पर खड़े होकर मृत्यु से जीवन की लड़ाई लड़ी। 1947 से लेकर कारगिल तक, AMC ने सीमित संसाधनों में असाधारण साहस और समर्पण का परिचय दिया।
1. 1947–48 का कश्मीर युद्ध और आर्मी मेडिकल कॉर्प्स
भारत की स्वतंत्रता के तुरंत बाद जम्मू-कश्मीर पर कबायली आक्रमण और उसके बाद भारत-पाक युद्ध छिड़ा। यह युद्ध दुर्गम पहाड़ी इलाकों, बर्फीली चोटियों और सीमित संचार व्यवस्था में लड़ा गया।AMC को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा, जैसे ऊंचाई वाले क्षेत्र, अत्यधिक ठंड, अपर्याप्त सड़क और परिवहन, प्राथमिक चिकित्सा संसाधनों की कमी !
AMC की भूमिका
• फील्ड मेडिकल यूनिट्स की स्थापना – दुर्गम इलाकों में अस्थायी चिकित्सा केंद्र बनाए गए
• घायल सैनिकों का तत्काल उपचार – गोली और छर्रे लगने से घायल जवानों का प्राथमिक उपचार
• एवाक्यूएशन सिस्टम – खच्चरों और पैदल माध्यम से घायल सैनिकों को पीछे के अस्पतालों तक पहुँचाया गया
• संक्रमण नियंत्रण – ठंड और गंदे हालात में संक्रमण रोकना बड़ी चुनौती थी। यह पहला युद्ध था जिसमें AMC ने स्वतंत्र भारत की सेना के साथ अपनी कार्यक्षमता सिद्ध की और भविष्य की सैन्य चिकित्सा प्रणाली की नींव रखी।
2. 1962 का भारत–चीन युद्ध और AMC
1962 का युद्ध अत्यंत कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में लड़ा गया। लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश के ऊंचे पर्वतीय क्षेत्र, जहां तापमान शून्य से नीचे रहता है। इस युद्ध में भी के सामने अभूतपूर्व चुनौतियां खड़ी हुईं। हाई एल्टीट्यूड सिकनेस (HAPE/HACE), शीतदंश (Frostbite), ऑक्सीजन की कमी और सीमित मेडिकल इन्फ्रास्ट्रक्चर!
AMC की भूमिका
• हाई एल्टीट्यूड मेडिसिन का विकास – ऊंचाई से जुड़ी बीमारियों पर विशेष अध्ययन
• फॉरवर्ड मेडिकल पोस्ट – सीमावर्ती चौकियों के पास चिकित्सा सहायता
• ठंड से सुरक्षा उपाय – सैनिकों के लिए स्वास्थ्य सलाह और निवारक उपाय
• तेज चिकित्सा निर्णय – सीमित समय और साधनों में जीवन रक्षक निर्णय! 1962 के बाद AMC ने पर्वतीय चिकित्सा, ठंडे इलाकों में सर्जरी और मेडिकल लॉजिस्टिक्स को आधुनिक रूप दिया।
3. 1965 का भारत–पाक युद्ध और AMC
1965 का युद्ध पश्चिमी सीमा पर व्यापक सैन्य टकराव का युद्ध था, जिसमें टैंक, तोपखाने और वायुसेना का भी उपयोग हुआ।
AMC की भूमिका
• मोबाइल फील्ड हॉस्पिटल – युद्ध क्षेत्र के पास चलायमान अस्पताल
• ट्रॉमा केयर – बम और शेलिंग से घायल सैनिकों का उपचार
• रक्तदान और ट्रांसफ्यूजन – बड़े पैमाने पर ब्लड सप्लाई
• नर्सिंग सेवाएं– मिलिट्री नर्सिंग सर्विस की महत्वपूर्ण भूमिका!
AMC ने घायल युद्धबंदियों और नागरिकों को भी अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार चिकित्सा सुविधा दी।
4. 1971 का भारत–पाक युद्ध और AMC
1971 का युद्ध बांग्लादेश मुक्ति संग्राम से जुड़ा था और इसका परिणाम पाकिस्तान की निर्णायक हार के रूप में सामने आया। AMC की जिम्मेदारियां भी बढ़ गईं थीं।
• तीन मोर्चों पर कार्य – पूर्वी, पश्चिमी और उत्तरी सीमा
• भारी संख्या में घायल सैनिक – युद्ध की तीव्रता अधिक थी
• रणनीतिक मेडिकल प्लानिंग – बड़े पैमाने पर चिकित्सा प्रबंधन
AMC की भूमिका
• बड़े सैन्य अस्पतालों का संचालन
• घायल सैनिकों की शीघ्र सर्जरी
• युद्धबंदियों की चिकित्सा देखभाल
• महामारी नियंत्रण – शरणार्थी संकट के बीच संक्रामक रोगों की रोकथाम!
AMC की कुशल चिकित्सा व्यवस्था ने सैनिकों की शीघ्र वापसी सुनिश्चित की, जिससे युद्ध में भारत को रणनीतिक लाभ मिला।
5. 1999 का कारगिल युद्ध और AMC
कारगिल युद्ध आधुनिक भारत का सबसे कठिन पर्वतीय युद्ध था—
• 18,000 फीट से अधिक ऊंचाई
• अत्यधिक ठंड
• लगातार गोलाबारी
AMC की ऐतिहासिक भूमिका
• हेलिकॉप्टर मेडिकल एवाक्यूएशन – घायल सैनिकों को हवा से सुरक्षित निकालना
• ऑपरेशन थियेटर इन टेंट्स – तंबुओं में सर्जरी
• ट्रॉमा मैनेजमेंट – गोली, शेल और ऊँचाई से जुड़ी चोटों का इलाज
• मानसिक स्वास्थ्य सहायता – लगातार युद्ध तनाव का उपचार!
कारगिल में AMC ने आधुनिक ट्रॉमा केयर, बेहतर एवाक्यूएशन चेन, तेज संचार प्रणाली का प्रभावी उपयोग किया।
आर्मी मेडिकल कॉर्प्स का उद्देश्य
आर्मी मेडिकल कॉर्प्स का मुख्य उद्देश्य है-
1. सैनिकों के जीवन की रक्षा करना,
2. युद्ध और शांति दोनों परिस्थितियों में चिकित्सा सेवाएं देना,
3. सैन्य तैयारियों को चिकित्सा दृष्टि से सक्षम बनाना,
4. आपदा और मानवीय सहायता अभियानों में भाग लेना।
AMC यह सुनिश्चित करता है कि हर सैनिक शारीरिक और मानसिक रूप से युद्ध के लिए फिट रहे।
आर्मी मेडिकल कॉर्प्स की संरचना
आर्मी मेडिकल कॉर्प्स एक अत्यंत सुव्यवस्थित और अनुशासित संगठन है। इसमें विभिन्न प्रकार के चिकित्सा और सहायक कर्मी शामिल होते हैं—
1. मेडिकल ऑफिसर-
ये सेना में कमीशंड अधिकारी होते हैं, जिनमें-
• डॉक्टर (MBBS, MD, MS, सुपर स्पेशलिस्ट)
• सर्जन
• एनेस्थेटिस्ट
• फिजिशियन
शामिल होते हैं।
2. नर्सिंग अधिकारी
• मिलिट्री नर्सिंग सर्विस (MNS)
• घायल सैनिकों की देखभाल, ऑपरेशन थियेटर और ICU प्रबंधन
3. पैरामेडिकल स्टाफ
• फार्मासिस्ट
• लैब टेक्नीशियन
• रेडियोलॉजी असिस्टेंट
• फिजियोथेरेपिस्ट
4. मेडिकल सपोर्ट स्टाफ
• एंबुलेंस ड्राइवर
• फील्ड मेडिकल असिस्टेंट
• लॉजिस्टिक्स और स्टोर प्रबंधन
युद्ध के समय आर्मी मेडिकल कॉर्प्स की भूमिका
युद्ध के दौरान AMC की भूमिका अत्यंत चुनौतीपूर्ण और जीवन-जोखिम से भरी होती है।
फ्रंटलाइन मेडिकल सहायता– गोलीबारी और बमबारी के बीच घायल सैनिकों का प्राथमिक उपचार, ब्लीडिंग रोकना, दर्द नियंत्रण, शॉक मैनेजमेंट!
फील्ड हॉस्पिटल- अस्थायी अस्पतालों की स्थापना, सीमित संसाधनों में ऑपरेशन और सर्जरी!
मेडिकल एवाक्यूएशन– हेलिकॉप्टर और एंबुलेंस द्वारा घायल सैनिकों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाना!
मनोवैज्ञानिक सहायता– युद्ध तनाव, PTSD और मानसिक आघात से जूझ रहे सैनिकों का उपचार
शांति काल में AMC की भूमिका
युद्ध के अलावा शांति काल में भी आर्मी मेडिकल कॉर्प्स की भूमिका अत्यंत व्यापक है-
सैनिकों और परिवारों का इलाज,
सैन्य अस्पतालों का संचालन,
स्वास्थ्य जांच और टीकाकरण,
संक्रामक रोगों की रोकथाम,
मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं!
भारत में स्थित कई प्रमुख सैन्य अस्पताल AMC द्वारा संचालित होते हैं।
प्रमुख सैन्य अस्पताल और संस्थान
आर्मी मेडिकल कॉर्प्स देशभर में अत्याधुनिक चिकित्सा संस्थान संचालित करता है—
• आर्मी हॉस्पिटल (रिसर्च एंड रेफरल), दिल्ली
• कमांड हॉस्पिटल (पुणे, चंडीमंदिर, लखनऊ, कोलकाता)
• बेस हॉस्पिटल
• फील्ड हॉस्पिटल
ये अस्पताल केवल सैनिकों के लिए ही नहीं, बल्कि कई बार नागरिकों के लिए भी जीवन रक्षक सिद्ध होते हैं।
आपदा और मानवीय सहायता में भूमिका
AMC केवल युद्ध तक सीमित नहीं है। यह प्राकृतिक और मानव-निर्मित आपदाओं में भी अग्रणी भूमिका निभाता है। जैसे बाढ़, चक्रवात, भूकंप, महामारी (कोविड-19)! कोविड-19 महामारी के दौरान AMC ने सैन्य और नागरिक अस्पतालों में सेवाएं दीं, ऑक्सीजन प्लांट स्थापित किए, वैक्सीनेशन अभियान में सहयोग किया।
आर्मी मेडिकल कॉर्प्स में भर्ती प्रक्रिया, प्रशिक्षण और अनुशासन
AMC में भर्ती विभिन्न माध्यमों से होती है। डॉक्टरों के लिए-
• Short Service Commission (SSC)
• Permanent Commission (PC)
• NEET-PG आधारित चयन (कुछ श्रेणियों में)
नर्सिंग स्टाफ- मिलिट्री नर्सिंग सर्विस (MNS) परीक्षा
अन्य मेडिकल स्टाफ के लिए सेना भर्ती बोर्ड की विशेष चयन प्रक्रियाएं! AMC के सदस्यों को सैन्य प्रशिक्षण, हथियारों का मूल ज्ञान और युद्ध क्षेत्र में चिकित्सा प्रबंधन का प्रशिक्षण दिया जाता है। डॉक्टर होने के साथ-साथ वे सैनिक भी होते हैं।
रैंक और पद संरचना
AMC में भी सेना जैसी रैंक संरचना होती है।
• लेफ्टिनेंट
• कैप्टन
• मेजर
• लेफ्टिनेंट कर्नल
• कर्नल
• ब्रिगेडियर
• मेजर जनरल
वरिष्ठ अधिकारी नीति निर्धारण और चिकित्सा रणनीति का नेतृत्व करते हैं।
सम्मान, वीरता, चुनौतियां
AMC के कई डॉक्टरों और नर्सों को शौर्य चक्र, सेना मेडल और विशिष्ट सेवा मेडल से सम्मानित किया गया है, क्योंकि युद्ध के मैदान में घायल सैनिक को बचाना भी उतना ही वीरतापूर्ण कार्य है जितना दुश्मन से लड़ना। AMC को कई कठिन चुनौतियों का सामना करना पड़ता है जैसे दुर्गम और अत्यधिक ठंडे/गर्म इलाके, सीमित संसाधन, लगातार तनावपूर्ण वातावरण, संक्रमण और जैविक खतरे! फिर भी AMC हर परिस्थिति में अपने कर्तव्य पर अडिग रहता है।
आधुनिक तकनीक और AMC
आज AMC आधुनिक चिकित्सा तकनीकों को अपना रहा है-
• टेलीमेडिसिन
• रोबोटिक सर्जरी
• मोबाइल मेडिकल यूनिट
• AI आधारित डायग्नोस्टिक्स!
इससे सीमावर्ती क्षेत्रों में भी बेहतर इलाज संभव हो पाया है।
आर्मी मेडिकल कॉर्प्स का सामाजिक योगदान
AMC केवल सेना तक सीमित नहीं, बल्कि ग्रामीण चिकित्सा शिविर, मुफ्त सर्जरी अभियान, रक्तदान शिविर और स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम से समाज को भी लाभ पहुंचाता है।
रणभूमि से बाहर देशसेवा करते सैनिक
आर्मी मेडिकल कॉर्प्स भारतीय सेना की वह रीढ़ है, जो हर सैनिक के जीवन की सुरक्षा सुनिश्चित करती है। बिना AMC के सेना की युद्ध क्षमता अधूरी है। जहां एक ओर सैनिक सीमा पर दुश्मन से लड़ता है, वहीं AMC का डॉक्टर और नर्स जीवन और मृत्यु के बीच लड़ाई लड़ते हैं। आर्मी मेडिकल कॉर्प्स न केवल एक चिकित्सा संगठन है, बल्कि यह सेवा, समर्पण और मानवता का प्रतीक है। हर युद्ध में भारतीय सेना की जीत के पीछे केवल हथियार नहीं, बल्कि आर्मी मेडिकल कॉर्प्स का समर्पण, साहस और चिकित्सा कौशल भी रहा है। AMC ने यह सिद्ध किया कि
युद्ध केवल दुश्मन से नहीं, बल्कि समय, परिस्थिति और मृत्यु से भी लड़ा जाता है। सीमा पर लड़ता सैनिक और उसे जीवनदान देने वाला AMC, दोनों ही भारत की सुरक्षा के स्तंभ हैं।
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