राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ जारी सैन्य तनाव को स्थायी रूप से समाप्त करने के लिए एक महत्वाकांक्षी ‘शांति योजना’ (Peace Plan) का प्रस्ताव रखा है। इस योजना का केंद्र ईरान के परमाणु कार्यक्रम को जड़ से मिटाना और मध्य पूर्व में शक्ति संतुलन को फिर से स्थापित करना है। 7 अप्रैल को घोषित दो सप्ताह के ऐतिहासिक युद्धविराम के बीच आई इस योजना ने दुनिया भर का ध्यान खींचा है।
यूरेनियम संवर्धन पर पूर्ण प्रतिबंध
पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ एक ‘शांति प्लान’ पेश किया है। इस योजना के तहत, उन्होंने बताया कि ईरान को यूरेनियम संवर्धन की दिशा में आगे नहीं बढ़ना होगा। ट्रंप का दावा है कि अमेरिका इस बात को सुनिश्चित करेगा कि ईरान के परमाणु ठिकानों पर कड़ी निगरानी रखी जाएगी। ट्रंप के 15-सूत्रीय शांति प्रस्ताव की सबसे बड़ी शर्त ईरान के भीतर यूरेनियम संवर्धन (Uranium Enrichment) को पूरी तरह से रोकना है। अमेरिका का तर्क है कि बिना संवर्धन के ईरान कभी भी परमाणु बम बनाने के करीब नहीं पहुँच पाएगा। योजना के तहत, ईरान को अपने सभी सेंट्रीफ्यूज (Centrifuges) को नष्ट करना होगा और भविष्य में संवर्धन न करने की लिखित गारंटी देनी होगी।
‘न्यूक्लियर डस्ट’ की सफाई का अनोखा प्रावधान
राष्ट्रपति ट्रंप ने एक विशेष और सख्त शर्त रखी है, जिसे उन्होंने ‘परमाणु धूल’ (Nuclear Dust) का नाम दिया है। ट्रंप प्रशासन का कहना है कि हालिया अमेरिकी और इजरायली हमलों में ईरान के जो भूमिगत परमाणु केंद्र (जैसे फोर्डो और नातान्ज) क्षतिग्रस्त हुए हैं, वहां भारी मात्रा में रेडियोधर्मी कचरा और मलबे दबे हुए हैं। अमेरिका इन केंद्रों को “खोदकर” वहां से सभी परमाणु अवशेषों को पूरी तरह से साफ करेगा और उन्हें नष्ट कर देगा, जिसका उद्देश्य: यह सुनिश्चित करना होगा कि उन साइटों का भविष्य में कभी भी परमाणु गतिविधियों के लिए पुन: उपयोग न किया जा सके।
शांति योजना के अन्य प्रमुख बिंदु
इस्फहान, नातान्ज और फोर्डो जैसे रणनीतिक केंद्रों को स्थायी रूप से बंद या नागरिक ऊर्जा अनुसंधान तक सीमित करना।
मिसाइल कार्यक्रम पर लगाम: ईरान की बैलिस्टिक मिसाइलों की मारक क्षमता (Range) पर सख्त अंतरराष्ट्रीय सीमा तय करना।
प्रॉक्सी वार की समाप्ति: हिजबुल्लाह, हमास और अन्य क्षेत्रीय गुटों को मिलने वाली सैन्य और वित्तीय सहायता को तत्काल रोकना।
खुली समुद्री राह: होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए हमेशा खुला और सुरक्षित रखना।
बदले में ईरान को क्या मिलेगा?
यदि ईरान इन शर्तों को स्वीकार करता है, तो ट्रंप प्रशासन ने ‘ईरान की नई सुबह’ का वादा किया है कि ईरान के बैंकिंग और तेल क्षेत्र पर लगे सभी कड़े प्रतिबंधों को चरणबद्ध तरीके से हटा लिया जाएगा। ट्रंप ने “अरबों डॉलर” के अमेरिकी और वैश्विक निवेश का संकेत दिया है, जिससे ईरान की गिरती अर्थव्यवस्था को उबारा जा सके। केवल बिजली बनाने के लिए बुशहर संयंत्र में अंतरराष्ट्रीय सहयोग की अनुमति दी जाएगी।
सीधी शर्तें और सुरक्षा के उपाय
ट्रंप द्वारा साझा की गई शर्तों में स्पष्ट किया गया है कि अगर ईरान इन शर्तों का पालन करता है तो अमेरिका उसके परमाणु कार्यक्रम से संबंधित सामग्री को हटाने में मदद करेगा। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर यह जानकारी साझा की, जहां उन्होंने ईरान के साथ बातचीत के महत्व पर जोर दिया।
अमेरिकी सेना की भूमिका
ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी सेना ईरान के परमाणु ठिकानों में मौजूद सामग्री को हटाने की प्रक्रिया की निगरानी करेगी। यह कदम सुरक्षा के दृष्टिकोण से जरूरी बताया गया है ताकि भविष्य में कोई भी परमाणु कार्यक्रम न चल सके। ट्रंप का यह बयान एक नया मोड़ हो सकता है, जिससे ईरान के साथ बिगड़े रिश्तों में सुधार हो सके।
ईरान की प्रतिक्रिया
हालांकि ईरान ने युद्धविराम का स्वागत किया है, लेकिन उसने ट्रंप की इस योजना को “अत्यधिक सख्त और संप्रभुता के खिलाफ” बताया है। जवाब में ईरान ने अपना 10-सूत्रीय प्रस्ताव पेश किया है, जिसमें उसने अपनी रक्षात्मक मिसाइल क्षमता को बनाए रखने और कुछ स्तर तक शांतिपूर्ण संवर्धन की मांग की है। दुनिया की नजरें अब अगले 10 दिनों पर टिकी हैं, जब ओमान या स्विट्जरलैंड में दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच इस “ग्रैंड डील” पर औपचारिक बातचीत शुरू होने की संभावना है।
ईरान के 10-सूत्रीय जवाबी प्रस्ताव के मुख्य बिंदु
ईरान ने ट्रंप की शर्तों को “अत्यधिक सख्त” और “एकतरफा” बताते हुए अपना खुद का एजेंडा रखा है, जिसे वह ‘सम्मानजनक शांति’ का नाम दे रहा है।
सीमित यूरेनियम संवर्धन का अधिकार: ईरान का सबसे बड़ा तर्क है कि उसे एनपीटी (NPT) के तहत 5% तक यूरेनियम संवर्धन करने का अधिकार मिलना चाहिए, जो केवल शांतिपूर्ण कार्यों (जैसे कैंसर के इलाज और बिजली बनाने) के लिए होगा।
बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम पर कोई समझौता नहीं: ईरान ने स्पष्ट किया है कि उसका मिसाइल कार्यक्रम उसकी राष्ट्रीय सुरक्षा का हिस्सा है और वह इस पर किसी भी तरह की सीमा (Range Restriction) स्वीकार नहीं करेगा।
प्रतिबंधों की तत्काल और पूर्ण समाप्ति: ईरान की पहली शर्त है कि बातचीत के साथ ही तेल निर्यात और बैंकिंग सेक्टर पर लगे सभी अमेरिकी और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों को तुरंत हटाया जाए।
जमी हुई संपत्ति (Frozen Assets) की वापसी: अमेरिका और अन्य देशों में ईरान की जो अरबों डॉलर की संपत्ति दशकों से फ्रीज है, उसे तुरंत वापस करने की मांग की गई है।
सैन्य उपस्थिति में कमी: ईरान चाहता है कि अमेरिका फारस की खाड़ी (Persian Gulf) से अपनी नौसेना और सैन्य ठिकानों को धीरे-धीरे कम करे।
क्षेत्रीय सुरक्षा गठबंधन: ईरान का प्रस्ताव है कि मध्य पूर्व की सुरक्षा की जिम्मेदारी बाहरी ताकतों (अमेरिका) के बजाय क्षेत्र के देशों (सऊदी अरब, यूएई, ईरान आदि) की होनी चाहिए।
इजरायल पर शर्त: ईरान ने मांग की है कि इजरायल को भी अपने परमाणु हथियारों के भंडार को अंतरराष्ट्रीय निगरानी (IAEA) के दायरे में लाना चाहिए।
परमाणु केंद्रों की सुरक्षा: ईरान ने ट्रंप की ‘न्यूक्लियर डस्ट’ और केंद्रों को खोदने वाली शर्त को संप्रभुता का उल्लंघन बताया है और कहा है कि वह अपने केंद्रों को बंद नहीं करेगा, बल्कि उन्हें अंतरराष्ट्रीय निरीक्षण के लिए खुला रखेगा।
आर्थिक क्षतिपूर्ति (Compensation): ईरान ने पिछले वर्षों में प्रतिबंधों के कारण हुए आर्थिक नुकसान के लिए मुआवजे की मांग की है।
गारंटी की मांग: ईरान एक ऐसी लिखित और कानूनी गारंटी चाहता है कि भविष्य में कोई भी नया अमेरिकी राष्ट्रपति इस समझौते से बाहर नहीं निकलेगा (जैसा कि 2018 में हुआ था)।
वर्तमान गतिरोध (Deadlock)
दोनों प्रस्तावों में सबसे बड़ा अंतर ‘यूरेनियम संवर्धन’ और ‘मिसाइल क्षमता’ को लेकर है। ट्रंप “जीरो संवर्धन” (Zero Enrichment) चाहते हैं, जबकि ईरान “सीमित संवर्धन” पर अड़ा है। अभी दोनों पक्ष ओमान (Oman) में गुप्त वार्ताओं के जरिए इन दोनों प्रस्तावों के बीच का रास्ता (Middle Ground) तलाशने की कोशिश कर रहे हैं।
वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण फेरबदल
ट्रंप के इस नए भाीषण से वैश्विक स्तर पर भी हलचल मच सकती है। कई विशेषज्ञों का मानना है कि इससे मध्य पूर्व में हालात में बदलाव आ सकता है। यदि यह शांति प्लान सफल होता है, तो अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम हो सकता है और अन्य देश भी इसकी मांग कर सकते हैं।
उम्मीदें और संभावनाएं
इस प्रकार के प्रस्तावों से यह भी स्पष्ट होता है कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत की एक नई शुरुआत हो सकती है। अमेरिकी प्रशासन इस समय अंतरराष्ट्रीय समुदाय के समक्ष एक सकारात्मक छवि पेश करने की कोशिश कर रहा है। हालांकि, यह देखना होगा कि क्या ईरान इस नई राजनीतिक दिशा में आगे बढ़ने के लिए तैयार है।
शांति की अनिवार्यता
ट्रंप का यह प्रयास ईरान के परमाणु हथियारों के खतरे को कम करने के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। अगर ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम पर नियंत्रण रखने में सफल होता है तो यह न केवल देश के लिए, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए एक सकारात्मक कदम होगा। ट्रंप की शांति योजना पर सभी की नजरें बनी रहेंगी।
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