नई दिल्ली में बच्चों और युवाओं के लिए आयोजित प्रतिष्ठित स्माइल इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल फॉर चिल्ड्रन एंड यूथ (SIFFCY) के 12वें संस्करण की शुरुआत हो गई है। सात दिनों तक चलने वाले इस फिल्म महोत्सव का आयोजन स्माइल फाउंडेशन द्वारा दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के सहयोग से किया जा रहा है, जिसमें इस वर्ष विविधता, समानता और समावेशन जैसे विषयों पर विशेष फोकस रखा गया है। फेस्टिवल के माध्यम से बच्चों और युवाओं को सामाजिक, नैतिक और वैश्विक मुद्दों के प्रति जागरूक करने के साथ-साथ सकारात्मक संवाद और रचनात्मक सोच को बढ़ावा देने का प्रयास किया जा रहा है। इसमें कई ऐसी फिल्में भी शामिल हैं, जिन्हें स्वयं दिव्यांग बच्चों ने बनाया है, जबकि विभिन्न देशों के दूतावासों और सांस्कृतिक संस्थानों की भागीदारी इसे अंतरराष्ट्रीय स्वरूप प्रदान कर रही है।
नई दिल्ली में आज बच्चों और युवाओं के लिए आयोजित किए जाने वाले प्रतिष्ठित स्माइल इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल फॉर चिल्ड्रन एंड यूथ (SIFFCY) के 12वें संस्करण की औपचारिक शुरुआत हुई। यह सात दिवसीय फिल्म महोत्सव स्माइल फाउंडेशन द्वारा दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है। इस फिल्म फेस्टिवल का उद्देश्य बच्चों और युवाओं को सिनेमा के माध्यम से सामाजिक सरोकारों, नैतिक मूल्यों और वैश्विक मुद्दों से जोड़ना है।
स्माइल फाउंडेशन के 27 राज्यों में 400 से अधिक प्रोजेक्ट्स
उद्घाटन अवसर पर स्माइल फाउंडेशन के सह-संस्थापक शांतनु मिश्रा ने कहा कि स्माइल फाउंडेशन एक भारतीय विकास संगठन है, जो शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में वंचित बच्चों और परिवारों के कल्याण के लिए कार्य कर रहा है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में संस्था देश के 27 राज्यों में 400 से अधिक लाइव वेलफेयर प्रोजेक्ट्स चला रही है, जिनके माध्यम से हर वर्ष लगभग 20 लाख बच्चों और परिवारों के जीवन पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
विविधता, समानता और समावेशन
शांतनु मिश्रा ने कहा कि इस वर्ष के SIFFCY का मुख्य फोकस विविधता (डाइवर्सिटी), समानता (इक्विटी) और समावेशन (इंक्लूजन) पर है। उन्होंने बताया कि इस फिल्म फेस्टिवल के जरिए बच्चों और युवाओं को व्यक्तिगत, सामाजिक, नैतिक और वैश्विक मुद्दों के प्रति जागरूक करने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि वे सकारात्मक संवाद और रचनात्मक कार्यों में भाग लेकर समाज और दुनिया को बेहतर बनाने में अपनी भूमिका निभा सकें।
दिव्यांग बच्चों ने बनाईं फिल्में
इस अवसर पर मीडिया से बातचीत करते हुए दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग की संयुक्त सचिव मनमीत कौर नंदा ने कहा कि फिल्में और सिनेमा संचार का एक अत्यंत सशक्त माध्यम हैं। उन्होंने बताया कि इस वर्ष पहली बार फिल्म फेस्टिवल में दिव्यांगजनों के समावेशन, समानता और विविधता जैसे विषयों को विशेष रूप से शामिल किया गया है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि इस बार कई ऐसी फिल्में भी प्रदर्शित की जा रही हैं, जिन्हें स्वयं दिव्यांग बच्चों ने बनाया है, जो अपने आप में एक प्रेरणादायक पहल है।
SIFFCY में अंतरराष्ट्रीय भागीदारी
फिल्म महोत्सव को अंतरराष्ट्रीय स्वरूप देने के लिए विभिन्न देशों के दूतावासों और सांस्कृतिक संस्थानों का भी सहयोग प्राप्त हुआ है। इनमें यूक्रेन, नीदरलैंड्स, फिनलैंड, चेक गणराज्य, लिथुआनिया, साइप्रस, एस्टोनिया, पोलिश इंस्टीट्यूट और इटालियन कल्चरल सेंटर शामिल हैं। इन देशों की फिल्मों की भागीदारी से बच्चों और युवाओं को अलग-अलग संस्कृतियों, समाजों और सोच से रूबरू होने का अवसर मिलेगा। कुल मिलाकर, SIFFCY का यह 12वां संस्करण न केवल मनोरंजन बल्कि शिक्षा, संवेदनशीलता और सामाजिक जागरूकता का भी एक सशक्त मंच बनकर उभरा है, जो आने वाली पीढ़ी को एक समावेशी और बेहतर समाज के निर्माण के लिए प्रेरित करेगा।
SIFFCY (Smile International Film Festival for Children & Youth) क्या है?
SIFFCY एक वार्षिक अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव है जिसे भारत की विकास संस्था Smile Foundation द्वारा बच्चों और युवाओं के लिए आयोजित किया जाता है। इसका उद्देश्य सिनेमा को सिर्फ मनोरंजन नहीं बल्कि एक शिक्षण, प्रेरणा और जागरूकता का प्रभावी माध्यम बनाना है। यह फेस्टिवल बच्चों और युवाओं को सामाजिक, नैतिक, व्यक्तिगत और वैश्विक मुद्दों पर सोचने, सीखने और चर्चा करने के लिए प्रेरित करता है। SIFFCY का मुख्य उद्देश्य-
• Good Cinema अर्थात् समाज के लिए महत्वपूर्ण और सकारात्मक संदेश देने वाली फिल्मों को बढ़ावा देना।
• बच्चों और युवाओं को जागरूक, प्रेरित और सशक्त बनाना।
• विभिन्न देशों, संस्कृतियों और अनुभूतियों को समझने में मदद करना।
• फिल्म निर्माण, विचार साझा करने और रचनात्मक सोच को बढ़ावा देना।
• फिल्मों, कार्यशालाओं, पैनल चर्चाओं और सत्रों के माध्यम से नए फिल्म निर्माताओं और प्रतिभागियों को प्रोत्साहित करना।
SIFFCY का इतिहास और विकास
SIFFCY की शुरुआत 2015 में हुई थी और यह तब से हर साल आयोजित हो रहा है। पहले संस्करण में रूस और फ्रांस-बेल्जियम की फिल्मों से शुरुआत हुई थी। पिछले वर्षों में इस फेस्टिवल में दुनिया भर से 50+ देशों की 150+ फिल्में दिखाई जा चुकी हैं। फिल्में फीचर, लघु, एनिमेशन और डाक्यूमेंट्री जैसी कई श्रेणियों में दिखाई जाती हैं।
SIFFCY का फॉर्मेट और आयोजन
यह महोत्सव सामान्यतः सात दिनों का होता है, जिसमें कई शहरों और स्कूलों में स्क्रीनटेस्ट, इंटरैक्टिव सत्र और वर्कशॉप होते हैं। कुछ संस्करण हाइब्रिड (ऑनलाइन + ऑफलाइन) तरीके से भी आयोजित किए गए हैं ताकि ज्यादा से ज्यादा बच्चे शामिल हो सकें। SIFFCY@SCHOOLS जैसे आउटरीच कार्यक्रम के माध्यम से यह 100+ स्थानों पर भी पहुंचता है।
सम्मान और पुरस्कार
SIFFCY में फिल्मों को ECFA Award, CIFEJ Award, Film Critics Circle of India Award समेत कई श्रेणियों में पुरस्कार दिए जाते हैं। इसमें बेस्ट फीचर फिल्म, बेस्ट निर्देशन, बेस्ट कहानी, और युवा/बच्चोंद्वारा बनाई गई फिल्मों को भी सम्मान मिलता है। विशेष विशेषताएं-
• यह फेस्टिवल युवा जूरी, पैनल डिस्कशन और मास्टरक्लासेस जैसी गतिविधियों से भरपूर होता है।
• बच्चों और युवाओं को दुनिया भर के फिल्म निर्माताओं के साथ इंटरैक्ट करने का अवसर मिलता है।
• फेस्टिवल संपूर्ण विश्व से फिल्मों को एक मंच पर लाता है और वैश्विक संवाद और सीख को बढ़ावा देता है।
संक्षेप में, SIFFCY एक ऐसा मंच है जहां बच्चे और युवा न केवल फिल्में देखते हैं, बल्कि उनसे सीखते हैं, सोचते हैं और खुद को आगे बढ़ाने के नए दृष्टिकोण प्राप्त करते हैं।
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