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February 4, 2026

‘युगे युगेन भारत’ राष्ट्रीय संग्रहालय: भारत की 5,000 साल पुरानी सभ्यता एक छत के नीचे लाने की ऐतिहासिक पहल! 

The CSR Journal Magazine

 

रायसीना हिल के नॉर्थ और साउथ ब्लॉक में बन रहा विश्व का सबसे बड़ा संग्रहालय, 2026 के अंत तक पहली गैलरी आम जनता के लिए खोलने की तैयारी! यह संग्रहालय भारत की लगभग 5,000 वर्षों से अधिक की सभ्यतागत यात्रा को एक ही परिसर में जीवंत रूप से प्रस्तुत करेगा।

भारत की 5000 वर्षों की सनातन सांस्कृतिक विरासत एक ही छत के नीचे

भारत अपनी सांस्कृतिक विरासत को विश्व पटल पर नए स्वरूप में प्रस्तुत करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाने जा रहा है। राजधानी नई दिल्ली में विकसित हो रहा ‘युगे युगेन भारत’ राष्ट्रीय संग्रहालय देश की अब तक की सबसे महत्वाकांक्षी सांस्कृतिक परियोजनाओं में से एक है। ‘युगे युगेन भारत’ का अर्थ है- सनातन शाश्वत भारत। यह संग्रहालय भारत की लगभग 5,000 वर्षों से अधिक की सभ्यतागत यात्रा को एक ही परिसर में जीवंत रूप से प्रस्तुत करेगा। यह भव्य संग्रहालय राष्ट्रपति भवन के निकट रायसीना हिल स्थित नॉर्थ ब्लॉक और साउथ ब्लॉक की ऐतिहासिक इमारतों में विकसित किया जा रहा है। ये वही भवन हैं, जहां अब तक देश के कई महत्वपूर्ण केंद्रीय मंत्रालय संचालित होते रहे हैं। सरकार द्वारा इन विरासत भवनों को उनकी मूल स्थापत्य पहचान को संरक्षित रखते हुए विश्वस्तरीय सांस्कृतिक केंद्र में बदला जा रहा है।

सिंधु घाटी सभ्यता से आधुनिक भारत तक का सफ़र- क्षेत्रफल, संरचना और प्रदर्शन की व्यापकता

करीब 1.55 लाख वर्ग मीटर क्षेत्र में फैले इस संग्रहालय में लगभग 80,000 वर्ग मीटर का प्रदर्शनी क्षेत्र होगा। संग्रहालय में कुल करीब 950 कक्ष होंगे और इसमें 30 से अधिक विषयगत (थीमैटिक) गैलरियां विकसित की जाएंगी। यहां लगभग 1 लाख ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों का प्रदर्शन किया जाएगा, जिन्हें राष्ट्रीय संग्रहालय, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) और विभिन्न राज्यों के संग्रहों से एकत्र किया जा रहा है। इन गैलरियों के माध्यम से दर्शकों को सिंधु घाटी सभ्यता से लेकर आधुनिक भारत तक की निरंतर ऐतिहासिक यात्रा पर ले जाया जाएगा।

पहली गैलरी 2026 के अंत तक खोलने की तैयारी

संग्रहालय की पहली गैलरी ‘टाइम एंड टाइमलेसनेस’ (काल और कालातीतता) के नाम से विकसित की जा रही है, जिसमें लगभग 100 प्रमुख और प्रतीकात्मक कलाकृतियां प्रदर्शित होंगी। इनमें सिंधु घाटी काल की टेराकोटा कलाकृतियां, गुप्तकालीन मूर्तियां और चोलकालीन कांस्य प्रतिमाएं शामिल होंगी। इस गैलरी को 2026 के अंत तक आम जनता के लिए खोलने का लक्ष्य रखा गया है। इसके बाद नॉर्थ ब्लॉक और साउथ ब्लॉक में स्थित अन्य गैलरियां 2027 और उसके बाद चरणबद्ध तरीके से खोली जाएंगी। इस तरह यह संग्रहालय एक सतत विकसित होने वाला सांस्कृतिक केंद्र बनेगा।

केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय और फ्रांस म्यूजियम्स डेवलपमेंट का साझा प्रयास

इस महत्त्वाकांक्षी परियोजना का प्रबंधन केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय कर रहा है। संग्रहालय के डिज़ाइन, क्यूरेशन और प्रदर्शनी मानकों को वैश्विक स्तर का बनाने के लिए फ्रांस की संस्था ‘फ्रांस म्यूज़ियम्स डेवलपमेंट’ के साथ सहयोग किया गया है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि संग्रहालय न केवल भारत में बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी एक उदाहरण बने।

पर्यटन और सांस्कृतिक पहचान को मिलेगा नया आयाम

अनुमान है कि ‘युगे युगेन भारत’ राष्ट्रीय संग्रहालय में हर साल एक करोड़ से अधिक पर्यटक और दर्शक आएंगे। यह परियोजना न केवल देश के सांस्कृतिक पर्यटन को नई ऊंचाई देगी, बल्कि भारत की प्राचीन सभ्यता, कला, विज्ञान, दर्शन और सांस्कृतिक निरंतरता को विश्व समुदाय के सामने प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करेगी। सरकार और सांस्कृतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह संग्रहालय आने वाले वर्षों में भारत की सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक बनेगा और हर भारतीय के लिए गर्व का विषय होगा।

युगे युगेन भारत: अतीत, वर्तमान और भविष्य को जोड़ने वाला राष्ट्रीय सांस्कृतिक स्वप्न

भारत सभ्यता, संस्कृति और ज्ञान की उन विरल परंपराओं में से एक है, जिसकी जड़ें हजारों वर्षों में फैली हैं। लेकिन विडंबना यह रही है कि इस विराट विरासत को एक समग्र और सशक्त रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास अब तक सीमित रहा। ऐसे समय में नई दिल्ली के रायसीना हिल पर आकार ले रहा ‘युगे युगेन भारत’ राष्ट्रीय संग्रहालय केवल एक सांस्कृतिक परियोजना नहीं, बल्कि भारत की आत्मा को दुनिया के सामने रखने का एक ऐतिहासिक प्रयास है। नॉर्थ ब्लॉक और साउथ ब्लॉक जैसी औपनिवेशिक काल की प्रतिष्ठित इमारतों को संग्रहालय में परिवर्तित करना अपने आप में एक गहरा प्रतीकात्मक अर्थ रखता है। जहां कभी सत्ता और प्रशासन के केंद्र थे, वहीं अब भारत की सभ्यता, कला और विचार परंपरा का सार्वजनिक उत्सव होगा। यह परिवर्तन इस बात का संकेत है कि राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में संस्कृति को अब केंद्रीय स्थान दिया जा रहा है।

इतिहास को देखने नहीं, समझने- महसूस करने की जरूरत

‘युगे युगेन भारत’ का अर्थ- शाश्वत भारत, अपने आप में उस निरंतरता को दर्शाता है, जिसने सिंधु घाटी से लेकर आधुनिक गणराज्य तक भारत को जोड़े रखा है। लगभग एक लाख दुर्लभ कलाकृतियों, 30 से अधिक विषयगत दीर्घाओं और हजारों वर्षों की ऐतिहासिक यात्रा को एक ही परिसर में समेटना निस्संदेह एक असाधारण कार्य है। यह संग्रहालय इतिहास को केवल देखने की वस्तु नहीं बनाएगा, बल्कि उसे समझने, महसूस करने और उससे संवाद करने का माध्यम बनेगा। महत्वपूर्ण यह भी है कि यह परियोजना भविष्य की ओर देखती है। अंतरराष्ट्रीय सहयोग, आधुनिक क्यूरेशन तकनीक और चरणबद्ध विकास इसे एक जीवंत संग्रहालय बनाएगा, न कि स्थिर स्मारक। अनुमानित करोड़ों दर्शकों की उपस्थिति न केवल सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा देगी, बल्कि युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने में भी अहम भूमिका निभाएगी।

युगे युगेन भारत राष्ट्रीय संग्रहालय- अतीत के आईने में भविष्य की झलक

हालांकि, इस महत्वाकांक्षी परियोजना की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि इसे कितनी संवेदनशीलता, समावेशिता और विद्वतापूर्ण दृष्टि से विकसित किया जाता है। भारत की विविधता क्षेत्रीय, भाषाई और सांस्कृतिक, को संतुलित रूप में प्रस्तुत करना इसकी सबसे बड़ी चुनौती और जिम्मेदारी होगी। कुल मिलाकर, युगे युगेन भारत राष्ट्रीय संग्रहालय आज़ादी के बाद भारत के सबसे बड़े सांस्कृतिक वक्तव्यों में से एक है। यदि इसे सही दृष्टि और निरंतर प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ाया गया, तो यह न केवल अतीत का दर्पण बनेगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए सांस्कृतिक चेतना का प्रकाशस्तंभ भी सिद्ध होगा।

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