Thecsrjournal App Store
Thecsrjournal Google Play Store
April 3, 2025

World Autism Awareness Day: विशेष योग्यता वाले बीमार होते हैं Autistics

World Autism Awareness Day हर साल 2 April को मनाया जाता है। इस दिन का उद्देश्य ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (ASD) के बारे में जागरूकता बढ़ाना और समाज में Autism से प्रभावित लोगों को सहयोग प्रदान करना है। संयुक्त राष्ट्र (UN) ने 18 दिसंबर 2007 को आधिकारिक रूप से इस दिवस को मान्यता दी, और 2008 से इसे वैश्विक स्तर पर मनाया जाने लगा। यह दिन Autism से ग्रसित व्यक्तियों को समान अवसर, शिक्षा और रोजगार देने की दिशा में कार्य करने के लिए प्रेरित करता है।

Autism क्या है

Autism Spectrum Disorder – (ASD) एक स्नायविक (Neurological) और विकास संबंधी विकार है, जो आमतौर पर बचपन में ही उभरता है। यह व्यक्ति के Social Interaction, Communication, और Behavior को प्रभावित करता है। ASD एक Spectrum Disorder है, जिसका अर्थ है कि इसके लक्षण हल्के से गंभीर तक हो सकते हैं। प्रत्येक Autistic व्यक्ति अलग होता है और उसकी ज़रूरतें भी अलग-अलग हो सकती हैं। Autism से पीड़ित बच्चों को लोगों से बातचीत करने में तकलीफ हो सकती है। उन्हें सामने वाले की भाव-भंगिमा समझने में मुश्किल हो सकती है, जिस कारण उन्हें सामने वाला व्यक्ति क्या कह रहा है, यह समझने में परेशानी होती है। इसके अलावा, भाषा से जुड़ी Skills का देर से विकसित होना, लोगों के साथ रिश्ते न बना पाना, एक ही एक्शन को बार-बार दोहराना, बदलाव पसंद न करना या जिन कामों में उनके Sense Organs को ज्यादा इंगेज होना पड़ता हो, ऐसे कामों को नापसंद करना जैसे कई लक्षण Autism से पीड़ित बच्चों में नजर आ सकते हैं।

Autism के सामान्य लक्षण:

सामाजिक कठिनाइयां, जैसे दूसरों से संवाद करने में परेशानी, आंखों से संपर्क न बनाना, भावनाएं व्यक्त करने में कठिनाई। संवाद में समस्या – देर से बोलना सीखना, शब्दों को बार-बार दोहराना, बातचीत को समझने में दिक्कत। Repetitive Behavior- एक ही गतिविधि या क्रिया को बार-बार दोहराना, अत्यधिक रूटीन का पालन करना।संवेदनशीलता में भिन्नता – आवाज़, रोशनी, गंध, या स्पर्श के प्रति असामान्य प्रतिक्रिया देना। अत्यधिक रुचि – किसी विशेष चीज़ में असामान्य रूप से गहरी रुचि लेना। Autism का कोई स्थायी इलाज नहीं है, लेकिन समय पर थेरेपी और विशेष शिक्षा से व्यक्ति के जीवन को बेहतर बनाया जा सकता है।

World Autism Awareness Day का महत्व

दुनिया भर में अनुमानित 6.18 करोड़ लोग Autism से ग्रस्त हैं, यानी हर 127वां व्यक्ति Autistic है। पुरुषों में ऑटिज्म महिलाओं की तुलना में दोगुने से अधिक पाया गया है। दुनिया भर में ऑटिज्म से ग्रस्त लोगों की संख्या 6.18 करोड़ है। यानि हर 127वां व्यक्ति Autistic है। अकेले भारत में 1.8 करोड़ लोग ऑटिज्म से पीड़ित हैं।World Autism Awareness Day, Autism से ग्रसित लोगों को समझने, उनका समर्थन करने और उनके प्रति सहानुभूति बढ़ाने के लिए मनाया जाता है। इस दिन को मनाने का मुख्य उद्देश्य यह है कि Autism से प्रभावित व्यक्तियों को समाज में अलग-थलग न समझा जाए, बल्कि उन्हें समान अवसर दिए जाएं। संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) इस दिन को मनाने के लिए विभिन्न संगठनों, सरकारों और गैर-सरकारी संस्थाओं को जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने के लिए प्रोत्साहित करती है। इस दिन को ख़ास तरह से Celebrate करने के लिए इस दिन कई प्रसिद्ध इमारतों और स्मारकों को नीली रोशनी (Blue Light) से रोशन किया जाता है, क्योंकि नीला रंग ऑटिज्म जागरूकता का प्रतीक है। School, College और सामाजिक संगठनों द्वारा Autism के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। गैर-सरकारी संगठन (NGOs) और स्वास्थ्य संस्थाएं Autistic बच्चों और उनके परिवारों की मदद के लिए विशेष योजनाएं चलाते हैं। सोशल मीडिया पर #WorldAutismAwarenessDay और #LightItUpBlue जैसे हैशटैग का उपयोग करके जागरूकता बढ़ाई जाती है। कई स्कूल और संस्थाएं ऑटिज्म से प्रभावित बच्चों के लिए कला, संगीत और खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन करती हैं।

Autism के प्रति जागरूकता ज़रूरी

Autism से प्रभावित व्यक्ति को समाज में समान अधिकार और सम्मान मिलना चाहिए। इसके लिए समाज में जागरूकता लाना ज़रूरी है। ऑटिज्म से ग्रसित कई व्यक्ति विशेष योग्यताओं वाले होते हैं। उन्हें रोजगार के अवसर दिए जाने चाहिए। समाज में फैली भ्रांतियों को दूर करके Autism को एक बीमारी की बजाय एक विशेषता के रूप में स्वीकार करना ज़रूरी है। Autism पीड़ित बच्चों को विशेष शिक्षा और चिकित्सा सुविधाएं मिलनी चाहिए, जिससे वे आत्मनिर्भर बन सकें। Autism के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए उस से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण तथ्य जानना ज़रूरी है। हर 100 में से लगभग 1 बच्चा Autism Spectrum Disorder से प्रभावित होता है। लड़कों में ऑटिज्म होने की संभावना लड़कियों की तुलना में चार गुना अधिक होती है। Autism का कोई निश्चित कारण नहीं है, लेकिन यह आनुवंशिक और पर्यावरणीय कारणों से जुड़ा हो सकता है। यदि शुरुआती अवस्था में पहचान हो जाए, तो सही थेरेपी से बच्चों की सामाजिक और संचार क्षमता में सुधार किया जा सकता है। ऑटिज्म से प्रभावित कई व्यक्तियों में अद्भुत प्रतिभाएं होती हैं, जैसे गणित, संगीत, और कला में असाधारण कौशल।

Autistics की विशेष देखभाल है ज़रूरी

भारत में करीब 1.8 करोड़ लोग Autism से जूझ रहे हैं। 2 से 9 साल की उम्र के बच्चों में लगभग 1 से 1.5 प्रतिशत मामलों में ASD की समस्या पाई जाती है। Autism के शिकार बच्चों को हैंडल करना पेरेंट्स के लिए बहुत ही मुश्किल होता है। ऑटिज्म को कैसे पहचानें, और अगर आपका बच्चा इसका शिकार है, तो उसे कैसे हैंडल करें, इसके बारे में बात करते हैं।
Autistic बच्चों को समझने और सही तरीके से हैंडल करने के लिए सबसे पहले पेरेंट्स को उन मनोविकारों के बारे में समझना होगा कि इसमें बच्चों को किन चैलेंजेस का सामना करना पड़ता है। सबसे जरूरी है कि उनकी जरूरतों को समझें और उनके साथ कैसे कम्युनिकेट करना है, इसपर काम करें।Autistic बच्चे स्पेशल होते हैं, तो उन्हें डांटने या गुस्सा होने से कोई फायदा नहीं होने वाला। यहां आपको पेशेंस और समझदारी से काम लेना होगा। Autistic बच्चों को समझने और बोलने में परेशानी हो सकती है, तो उनके साथ Communication करते वक्त बहुत लंबे-लंबे वाक्यों की जगह छोटे-छोटे शब्दों का इस्तेमाल करें, जैसे- पढ़ने के लिए Read, खाने के लिए Eat, सोने के लिए Sleep आदि। ऑटिस्टिक बच्चों के साथ पेरेंट्स को थोड़ा सब्र और समझदारी से काम लेना होता है। अगर वे किसी काम को करने में ज्यादा वक्त लेते हैं, तो चिढ़ने, गुस्सा होने की जगह उन्हें समय दें। Autistic बच्चे ज़्यादातर रूटीन में रहना पसंद करते हैं। सोने-उठने से लेकर पढ़ने, खेलने का एक समय निर्धारित करें। इससे उनके साथ आपको भी आसानी रहेगी। अगर बच्चे की किसी तरह की थेरेपी चल रही है, तो आप भी उसे फॉलो करें। कितने भी बिजी हो, थेरेपी न मिस करें। वो जितना लोगों से घुलेंगे-मिलेंगे, उनके लिए उतना ही अच्छा होता है। ऑटिस्टिक बच्चों के इंटरेस्ट को जानने की कोशिश करें। अगर उन्हें किसी खास चीज़ में रुचि है, तो रोकने-टोकने के बजाय उन्हें सपोर्ट करें। ऑटिस्टिक बच्चे भले ही सही तरीके से कम्युनिकेट नहीं कर पाते, लेकिन दिमाग से बहुत शॉर्प होते हैं।
Autism से जूझ रहे बच्चों की देखभाल के लिए पॉजिटिव नजरिए की जरूरत होती है। इसकी शुरुआत उनके व्यक्तित्व को पहचानने और उसका सम्मान करने से होती है। उनकी देखभाल में यह ध्यान दिया जाता है कि ASD से ग्रसित हर एक बच्चे की जिंदगी अलग-अलग होती है। Communication भी अक्सर बिना बोले होता है, जिसके लिए अतिरिक्त ध्यान और समझ की आवश्यकता होती है। इसके अलावा, उन्हें सुनना और लगातार सपोर्ट करना भी जरूरी है। ये सारी चीज़ें इस समस्या से ग्रसित बच्चों के विकास में मददगार साबित हो सकते हैं।
World Autism Awareness Day सिर्फ एक दिन नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज को यह याद दिलाने का अवसर है कि Autism से ग्रसित व्यक्ति भी समाज का अभिन्न अंग हैं। इस दिन का उद्देश्य जागरूकता बढ़ाना, स्वीकृति को प्रोत्साहित करना, और ऑटिज्म से प्रभावित व्यक्तियों को बेहतर जीवन प्रदान करना है। ऑटिज्म के बारे में अधिक से अधिक जानें, भेदभाव को समाप्त करें, और उन्हें समान अवसर प्रदान करें। इस दिवस को मनाकर हम स्नेह, सहानुभूति और सहयोग का संदेश फैला सकते हैं ताकि हर Autistic व्यक्ति अपनी ज़िंदगी को खुलकर जी सके।

Latest News

Popular Videos