बीते कुछ वर्षों में चांदी की कीमतों ने रिकॉर्ड तोड़ बढ़त दर्ज की है। जो चांदी कभी 50–60 हजार रुपये प्रति किलो में मिल जाती थी, वह अब 3 लाख रुपये प्रति किलो के स्तर को पार कर चुकी है। आम धारणा के विपरीत, यह उछाल गहनों की मांग से नहीं बल्कि आधुनिक तकनीक, ग्रीन एनर्जी और इंडस्ट्रियल जरूरतों से जुड़ा है। चांदी अब सिर्फ कीमती धातु नहीं, बल्कि वैश्विक तकनीकी विकास की रीढ़ बनती जा रही है।
इलेक्ट्रॉनिक्स और टेक्नोलॉजी चांदी के बिना अधूरी आधुनिक दुनिया
आज की डिजिटल दुनिया में शायद ही कोई ऐसा इलेक्ट्रॉनिक उपकरण हो, जिसमें चांदी का इस्तेमाल न होता हो। चांदी बेहतरीन विद्युत चालक (कंडक्टर) मानी जाती है, इसलिए इसका उपयोग स्मार्टफोन, लैपटॉप, टीवी, कैमरा, माइक्रोचिप, प्रिंटेड सर्किट बोर्ड (PCB) और सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री में बड़े पैमाने पर होता है।
5G टेक्नोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और हाई-स्पीड कंप्यूटिंग के बढ़ते उपयोग ने चांदी की मांग को और तेज कर दिया है। हर नया इलेक्ट्रॉनिक गैजेट थोड़ी-सी ही सही, लेकिन चांदी जरूर खपत करता है। यही वजह है कि टेक्नोलॉजी सेक्टर में विस्तार के साथ चांदी की इंडस्ट्रियल डिमांड लगातार बढ़ रही है।

सोलर एनर्जी और ग्रीन प्रोजेक्ट्स बढ़ती मांग का सबसे बड़ा कारण
चांदी की कीमत में उछाल के पीछे ग्रीन एनर्जी को सबसे बड़ी वजह माना जा रहा है। सोलर पैनल में इस्तेमाल होने वाले फोटोवोल्टिक सेल्स में चांदी के पेस्ट का उपयोग किया जाता है, जो सूरज की रोशनी को बिजली में बदलने की क्षमता को बढ़ाता है।
दुनियाभर के देश कार्बन उत्सर्जन घटाने और रिन्यूएबल एनर्जी अपनाने पर जोर दे रहे हैं।
भारत, चीन, अमेरिका और यूरोप में सोलर प्रोजेक्ट्स बड़े पैमाने पर लगाए जा रहे हैं। एक अनुमान के मुताबिक, आने वाले वर्षों में सोलर इंडस्ट्री अकेले ही चांदी की खपत का बड़ा हिस्सा बन सकती है। इसी वजह से बाजार में इसकी मांग अचानक तेज हुई है।

मेडिकल, ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रिक वाहन हर सेक्टर में मजबूत पकड़
मेडिकल सेक्टर में चांदी की एंटी-बैक्टीरियल खूबियों के कारण इसका इस्तेमाल लगातार हो रहा है। वाउंड ड्रेसिंग, मेडिकल उपकरणों की कोटिंग, पानी शुद्ध करने वाले फिल्टर और कुछ विशेष मेडिकल डिवाइसेज में चांदी का प्रयोग होता है।
वहीं ऑटोमोबाइल और खासतौर पर इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) में चांदी की भूमिका तेजी से बढ़ी है। बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम, चार्जिंग यूनिट, सेंसर, ऑटोनोमस ड्राइविंग चिप्स और वायरिंग में चांदी की जरूरत पड़ती है। जैसे-जैसे ईवी सेक्टर का विस्तार हो रहा है, वैसे-वैसे चांदी की खपत भी बढ़ती जा रही है।


