साल 2026 में स्मार्टफोन, लैपटॉप और कंप्यूटर जैसे रोज़मर्रा के डिजिटल डिवाइस की कीमतें बढ़ सकती हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह रैंडम एक्सेस मेमोरी (RAM) की कीमतों में तेज़ उछाल है। AI से जुड़े डेटा सेंटर्स की बढ़ती मांग ने रैम की सप्लाई पर दबाव बढ़ा दिया है, जिसका सीधा असर उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है।
रैम की कीमतों में रिकॉर्ड बढ़ोतरी
अक्टूबर 2025 के बाद से रैम की कीमतों में अभूतपूर्व बढ़ोतरी देखी गई है। कुछ मामलों में रैम की लागत दोगुनी से भी ज्यादा हो चुकी है। कंप्यूटर बनाने वाली कंपनी साइबर पावर पीसी के जनरल मैनेजर स्टीव मेसन के अनुसार, कुछ सप्लायर्स पहले के मुकाबले लगभग 500 प्रतिशत तक ज़्यादा कीमत मांग रहे हैं।
रैम लगभग हर डिजिटल डिवाइस का अहम हिस्सा है चाहे वह कंप्यूटर हो, स्मार्टफोन, स्मार्ट टीवी या फिर मेडिकल डिवाइस। बिना रैम किसी भी डिवाइस का काम करना संभव नहीं है। यही वजह है कि जब रैम महंगी होती है, तो पूरे डिवाइस की कीमत पर उसका असर पड़ता है।

AI और डेटा सेंटर्स ने बढ़ाई मांग
रैम की बढ़ती कीमतों के पीछे सबसे बड़ा कारण आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस का तेज़ी से विस्तार है। “चिप वॉर” के लेखक क्रिस मिलर के मुताबिक, एआई सिस्टम को हाई-एंड और हाई-बैंडविड्थ मेमोरी की ज़रूरत होती है।
बड़ी टेक कंपनियां जैसे अमेज़न, गूगल और माइक्रोसॉफ्ट अपने एआई और क्लाउड डेटा सेंटर्स के लिए भारी मात्रा में मेमोरी खरीद रही हैं। टेक इनसाइड्स के माइक हॉवर्ड बताते हैं कि ये कंपनियां 2026 और 2027 तक की ज़रूरतों के लिए पहले से ही रैम बुक कर रही हैं।
इसका नतीजा यह हुआ है कि डिमांड बहुत तेज़ी से बढ़ी है, लेकिन सप्लाई उस स्तर तक नहीं पहुंच पा रही है। इसी असंतुलन के कारण कीमतें लगातार ऊपर जा रही हैं।

निर्माताओं की मुश्किलें और बाज़ार की स्थिति
रैम बनाने वाली कंपनियों की स्थिति एक जैसी नहीं है। कुछ कंपनियों के पास स्टॉक मौजूद है, इसलिए उन्होंने कीमतें डेढ़ से दो गुना तक बढ़ाई हैं। वहीं जिन कंपनियों के पास स्टॉक की कमी है, उन्होंने कीमतें पांच गुना तक बढ़ा दी हैं।
पीसी स्पेशलिस्ट के डैनी विलियम्स का कहना है कि अगर मेमोरी की कीमतों में गिरावट नहीं आती, तो 2026 में उपभोक्ताओं की मांग पर भी असर पड़ सकता है।
दिलचस्प बात यह है कि कंप्यूटर की कुल लागत में पहले मेमोरी का हिस्सा आमतौर पर 15 से 20 प्रतिशत होता था, लेकिन अब यह 30 से 40 प्रतिशत तक पहुंच गया है। इससे निर्माताओं को मजबूरन अंतिम उत्पाद की कीमत बढ़ानी पड़ सकती है।

उपभोक्ताओं पर असर और आगे का रास्ता
विशेषज्ञों का मानना है कि 2026 में उपभोक्ताओं के सामने मुश्किल विकल्प होंगे। स्टीव मेसन के अनुसार, 16 जीबी रैम वाले सामान्य लैपटॉप की कीमत में 40 से 50 डॉलर तक का इज़ाफ़ा हो सकता है। वहीं स्मार्टफोन की कीमत भी लगभग 30 डॉलर तक बढ़ सकती है।
उपभोक्ताओं को या तो ज्यादा कीमत चुकानी होगी या फिर कम पावरफुल डिवाइस चुनना पड़ेगा। कुछ कंपनियां पहले ही आम उपभोक्ताओं की बजाय एआई से जुड़े हाई-एंड ग्राहकों पर फोकस करने लगी हैं।
उदाहरण के तौर पर माइक्रोन ने संकेत दिया है कि वह एआई से जुड़ी मांग पर ज्यादा ध्यान देगी, जिससे सामान्य उपभोक्ताओं के लिए विकल्प और सीमित हो सकते हैं।
विशेषज्ञ एक विकल्प यह भी सुझाते हैं कि लोग अपने पुराने डिवाइस का इस्तेमाल कुछ समय और लंबा कर सकते हैं। हालांकि, डिजिटल युग में कंप्यूटर और स्मार्टफोन रोज़मर्रा की ज़रूरत बन चुके हैं, इसलिए कीमतों में यह बढ़ोतरी आम लोगों के बजट पर सीधा दबाव डाल सकती है।



