कांग्रेस का पीएम मोदी पर हमला: BRICS+ समिट क्यों नहीं आगे बढ़ा रहे?

The CSR Journal Magazine

प्रश्नों के घेरे में प्रधानमंत्री

कांग्रेस पार्टी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए यह सवाल उठाया है कि वेस्ट एशिया संकट का समाधान निकालने के लिए BRICS+ समिट को आगे क्यों नहीं बढ़ाया जा रहा है। कांग्रेस ने कहा है कि मोदी सरकार अमेरिका और इजराइल की नाराजगी से बचने की कोशिश कर रही है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पर इस मुद्दे पर टिप्पणी की और भारत की भूमिका को लेकर चिंता जताई।

विश्वगुरु का दंभ

रमेश ने कहा कि भारत इस साल नई दिल्ली में 18वीं BRICS+ समिट की मेजबानी करने वाला है। उन्होंने पूछा कि इस महत्वपूर्ण अवसर का उपयोग करना चाहिए, ताकि वेस्ट एशिया संकट पर ठोस कूटनीतिक पहल की जा सके। उन्होंने पीएम मोदी पर तंज कसा कि खुद को ‘विश्वगुरु’ कहने वाले प्रधानमंत्री इस दिशा में क्यों कोई पहल नहीं कर रहे हैं।

फोन कॉल की सीमाएं

कांग्रेस नेता ने यह भी कहा कि केवल फोन कॉल के जरिए बातचीत करने से कोई ठोस परिणाम नहीं निकलता है। समिट के माध्यम से आमने-सामने चर्चा करना और निर्णायक फैसले लेना अधिक प्रभावी होता है। इससे कूटनीतिक तंत्र को मजबूती मिल सकती है, जिससे वेस्ट एशिया में चल रहे संकट का समाधान निकालने में मदद मिल सकती है।

G20 की अध्यक्षता पर सवाल

रमेश ने आगे कहा कि इस साल G20 की अध्यक्षता अमेरिका के पास है, जिससे भारत को कोई ठोस नतीजा निकलने की उम्मीद नहीं है। उन्होंने दावा किया कि यह मंच केवल बयानबाजी तक सीमित रह सकता है, जबकि वास्तविकता कुछ और ही है। कांग्रेस का मानना है कि भारत को BRICS+ चेयर की जिम्मेदारी का सही इस्तेमाल करना चाहिए।

सरकार की आलोचना का सिलसिला

पिछले हफ्ते भी कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा था कि BRICS+ की अध्यक्षता के बावजूद भारत ने वेस्ट एशिया संघर्ष पर कोई सामूहिक बयान जारी नहीं किया। यह आलोचना तब हुई जब सरकार ने अमेरिका और इजराइल के खिलाफ हमलों की निंदा करने से भी परहेज किया। कांग्रेस अब इस मुद्दे पर सरकार से सख्त जवाब मांग रही है।

समिट का महत्व और चुनौतियाँ

BRICS+ समिट सरलता से एक अवसर है जब विश्व के प्रमुख नेता एक साथ आकर वैश्विक मुद्दों पर चर्चा कर सकते हैं। ऐसे में अगर भारत इसे सही तरीके से नहीं उठाता है, तो इसका नुकसान देश की कूटनीति को हो सकता है। इस समिट का इस्तेमाल न केवल वेस्ट एशिया संकट, बल्कि अन्य वैश्विक चुनौतियों के समाधान के लिए भी किया जाना चाहिए।

कांग्रेस की योजना

कांग्रेस का स्पष्ट कहना है कि सरकार को अपनी वर्किंग स्ट्रेटेजी को बेहतर बनाना चाहिए, ताकि भारत वैश्विक स्तर पर अपनी प्रभावशीलता को साबित कर सके। अगर सरकार इस दिशा में काम नहीं करती है, तो भारतीय कूटनीति की गंभीरता पर सवाल उठेंगे। अब देखना यह है कि क्या प्रधानमंत्री मोदी इस यथार्थ को समझते हैं या नहीं।

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