भिक्षुओं के साथ 2,300 मील की पदयात्रा पर निकला गली का आवारा कुत्ता, करुणा और अहिंसा का बना जीवंत प्रतीक! न कोई भाषा, न कोई सीमा ! अलोका की करुणा भरी वैश्विक यात्रा !
शांति दया और करुणा का मौन संदेशवाहक
कभी भारत की धूल भरी गलियों में भटकने वाला एक आवारा कुत्ता! न कोई ठिकाना, न कोई लक्ष्य। लेकिन किस्मत ने उसके लिए ऐसा रास्ता चुना, जिसने उसे महज़ एक जानवर से कहीं बढ़कर बना दिया। इस कुत्ते का नाम है अलोका, जो आज अमेरिका में बौद्ध भिक्षुओं के साथ हजारों मील की पदयात्रा कर रहा है और शांति, करुणा व मानवता का मूक संदेश पूरी दुनिया तक पहुंचा रहा है।
Meet Aloka, the Peace Dog 🕊️ Born in Kolkata with a heart-shaped mark, he walks with Buddhist monks on a 120-day peace mission across the U.S. More than a journey of miles, Aloka spreads kindness, compassion, and hope—one dog, one mission, many inspired. #Aloka ✊🏾 pic.twitter.com/ER0VuTzSyo
— The Dalit Voice (@ambedkariteIND) January 6, 2026
भारत में शुरू हुई अनोखी यात्रा
यह कहानी कई साल पहले भारत में शुरू होती है। अलोका तब एक साधारण आवारा कुत्ता था, जो रोज़ की तरह भोजन और सुरक्षित ठिकाने की तलाश में सड़कों पर घूमता रहता था। एक सुबह उसने देखा बौद्ध भिक्षुओं का एक शांत समूह, जो बिना बोले, एक अनुशासित पंक्ति में आगे बढ़ रहा था। न ढोल, न नारे, न शोर- सिर्फ मौन और शांति! अलोका को कुछ तो आकर्षित कर गया। वह उनके पीछे चल पड़ा। भिक्षु चलते रहे, दिनों तक, हफ्तों तक, और अलोका भी कभी पीछे नहीं हटा। किसी ने उसे भगाया नहीं, किसी ने अपनाने का दावा नहीं किया। लेकिन धीरे-धीरे वह उस यात्रा का हिस्सा बन गया। यात्रा के अंत तक, अलोका सिर्फ एक आवारा कुत्ता नहीं रहा, बल्कि भिक्षुओं के परिवार का सदस्य बन चुका था।
अमेरिका में शांति की पदयात्रा
आज वही बंधन अलोका को अमेरिका की सड़कों पर ले आया है। पदयात्रा की शुरुआत हुई फोर्ट वर्थ, टेक्सास से, जिसका लक्ष्य है वॉशिंगटन डी.सी.- करीब 2,300 मील लंबा सफर। हर सुबह सूरज उगते ही अलोका भिक्षुओं के साथ सड़क पर उतर आता है, शांत, स्थिर और पूरी तरह उपस्थित। कभी उसकी गर्दन में एक स्कार्फ होता है, जिस पर सिला होता है उसका नाम-“Aloka”। कुछ दिनों में वही स्कार्फ कहता है-“Walk for Peace”।
लोगों का दिल जीतता अलोका
जैसे-जैसे यह यात्रा आगे बढ़ती है, अलोका लोगों का ध्यान सबसे पहले खींच लेता है। बच्चे उसे देखकर हाथ हिलाते हैं, मुस्कुराते हैं। राह चलते लोग रुक जाते हैं। कई बार तो लोग पहले अलोका के पास घुटनों के बल बैठकर उसे सहलाते हैं, फिर भिक्षुओं का अभिवादन करते हैं। उसके माथे पर मौजूद एक छोटा सा सफेद निशान, जो दिल के आकार जैसा दिखता है, मानो प्रकृति ने खुद उसे इस भूमिका के लिए चुना हो।
अलोका की शांति पदयात्रा
अलोका की शांति यात्रा की शुरुआत फोर्ट वर्थ (Fort Worth), टेक्सास, अमेरिका से हुई। यहीं से बौद्ध भिक्षुओं के समूह ने शांति और करुणा के संदेश के साथ लंबी पदयात्रा शुरू की, जिसमें अलोका लगातार उनके साथ चल रहा है। फोर्ट वर्थ, टेक्सास से वॉशिंगटन डी.सी. अनुमानित दूरी: करीब 2,300 मील (लगभग 3,700 किलोमीटर) है। यह अनोखी यात्रा कई अमेरिकी राज्यों से होकर गुजरती है, जहां स्थानीय लोग इस पदयात्रा से जुड़ते और समर्थन देते हैं। पदयात्रा हर सुबह सूर्योदय के साथ शुरू होती है। दिन में तय दूरी पूरी करने के बाद विश्राम किया जाता है। अलोका को थकान होने पर तुरंत आराम दिया जाता है, जिससे उसकी सेहत सुरक्षित रहे। यात्रा का अंतिम पड़ाव वॉशिंगटन डी.सी. है जहां पहुंचकर शांति, अहिंसा और करुणा का वैश्विक संदेश देने का उद्देश्य है।
आध्यात्मिक-मानवीय यात्रा
यह पदयात्रा किसी राजनीतिक या प्रचारात्मक कार्यक्रम से नहीं, बल्कि आध्यात्मिक और मानवीय उद्देश्य से जुड़ी है। इसलिए इसका समय और तारीख कठोर कार्यक्रम की बजाय प्राकृतिक गति और सहभागिता पर आधारित है। अलोका को किसी तरह का कष्ट नहीं होने दिया जाता। जब वह थक जाता है, उसे आराम दिया जाता है। समय-समय पर उसकी वेटरनरी जांच होती है। रास्ते में लोग प्यार से उसे ट्रीट्स देते हैं, जिन्हें वह बड़े सलीके से स्वीकार करता है। यह यात्रा न सिर्फ आध्यात्मिक है, बल्कि जिम्मेदारी और संवेदनशीलता का भी उदाहरण है, जहां एक जानवर को साधन नहीं, बल्कि साथी माना गया है।
बिना शब्दों के दिया गया संदेश
अलोका न तो बोल सकता है, न भाषण देता है। फिर भी उसकी मौजूदगी लोगों को रोक देती है, सोचने पर मजबूर कर देती है। वह याद दिलाता है कि करुणा, शांति और अपनापन शब्दों के मोहताज नहीं होते। कभी-कभी सिर्फ साथ चलना ही सबसे बड़ा संदेश होता है। जिस अलोका के पास कभी कोई रास्ता नहीं था, आज वह उद्देश्य के साथ चल रहा है। उसकी कहानी यह साबित करती है कि करुणा सीमाएं नहीं देखती, न देश की, न भाषा की, न प्रजाति की।
अलोका आज सिर्फ एक कुत्ता नहीं है। वह एक चलती-फिरती सीख है, कि शांति की शुरुआत दिल से होती है, और कभी-कभी चार पैरों पर भी चलती है।
Long or Short, get news the way you like. No ads. No redirections. Download Newspin and Stay Alert, The CSR Journal Mobile app, for fast, crisp, clean updates!

