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March 28, 2025

दुनिया की सबसे शांत जगह ‘Valley of Peace’ जहां दफन हैं सुल्‍तानों से लेकर भ‍िखारी तक

‘Valley Of Peace’ Iraq- घर हो या बाहर, कहीं भी निकल जाइए, चारों ओर आपको सिर्फ शोर सुनाई देगा। लोगों का शोर, गाड़ी-मोटरों का शोर, हर तरफ़ बस शोर ही शोर! कुछ घाटियां हैं, जहां आपको शांत‍ि और सुकून का अनुभव होगा। लेकिन धरती पर एक जगह ऐसी भी है, जिसे ‘Valley of Peace’ कहा जाता है। लोग इसे ‘दुनिया की सबसे शांत जगह’ के नाम से जानते हैं। यहां सुल्‍तानों से लेकर भ‍िखारी तक ज़मीन के नीचे दफ़न हैं। दुनियाभर से मुसलमान इस जगह को देखने के ल‍िए जाते हैं। इस जगह को काफी पव‍ित्र भी माना जाता है। एक और द‍िलचस्‍प बात, धरती पर बहुत कम ही कब्र‍िस्‍तान ऐसे हैं, जहां क‍हीं का भी मुसलमान हो, उसे दफन क‍िया जाता है।

दुनिया की सबसे शांत जगह ‘Valley Of Peace’

शांत‍ि की घाटी (Valley of Peace) से अगर आप ये समझ रहे होंगे क‍ि शायद यह कोई पहाड़ी होगी, तो आप पूरी तरह ग़लत हैं। दरअसल, Iraq के Nazaf शहर में बसा एक कब्र‍िस्‍तान है, जिसे दुनिया के सबसे बड़े कब्रिस्तानों में से एक माना जाता है। Iraq में इसे वादी अल-सलाम ‘Vaadi-AL-Salaam’ के नाम से जाना जाता है। इसे देखने के ल‍िए दुन‍ियाभर से मुस्‍ल‍िम Iraq आते हैं।
‘Valley Of Peace’ में 60 लाख से ज्‍यादा मुसलमानों के शव दफन हैं। इनमें कई सुल्‍तान, साइंटिस्‍ट, नेता और यहां तक क‍ि भ‍िखारी भी शामिल हैं। Valley Of Peace में ईश्वर के पैगंबर ‘Saaleh’ और ‘Hood’ की कब्रें भी हैं, तो राजकुमार ‘Ali Ibn Abi Taalib’ के अवशेष भी यहीं दफन हैं। आप जानकर हैरान होंगे क‍ि यह कब्रिस्तान 1,485.5 एकड़ में फैला हुआ है, जो कुल मिलाकर 1700 से अधिक फुटबॉल मैदानों के बराबर है।वादी अल-सलाम ‘Valley Of Peace’ कब्रिस्तान को Nazaf शहर की आत्मा माना जाता है। आप अगर इसे देखेंगे तो कब्र‍िस्‍तान की जगह इसे एक शहर समझ बैठेंगे, क्‍योंक‍ि यहां पर कब्रें तंग इमारतों की तरह दिखती हैं। दुनिया के विभिन्न हिस्सों से मुसलमान यहां घूमने के ल‍िए आते हैं। वादी अल-सलाम ‘Valley Of Peace’ दुनिया का एकमात्र ऐसा कब्रिस्तान है जहां 1400 साल से भी अधिक समय से शवों को दफनाने की प्रक्रिया आज भी जारी है। अल-हिरा के राजाओं और अल-सस्सानी युग के नेताओं को भी यहां दफनाया गया था। इसी कब्र‍िस्‍तान में उनके साथियों, राजाओं, सुल्तानों, हमदानिया राज्य के राजकुमारों, फातिमिया, अल-बुवेहिया, सफ़ावेइया, काजर को भी दफन किया गया था। हर पर‍िवार के ल‍िए यहां विशेष कमरा आवंटित किया गया है। कमरे भूमिगत बने हुए हैं और नीचे उतरने का रास्ता सीढ़ी से जाता है।
‘Guiness Book Of World Records’ ने इसे सबसे बड़े कब्रिस्तान के रूप में मान्‍यता दी है। ‘Unesco Sites Of World Heritage’ ने इसे विश्व धरोहर स्‍थलों की सूची में रखा है। इराक युद्ध के दौरान प्रतिदिन लगभग 200-250 लाशें यहां दफनाई जाती थीं, लेकिन 2010 में यह संख्या घटकर 100 से भी कम हो गई थी। दुनिया भर से हर साल लगभग 50,000 नए शवों को इस कब्रिस्तान में दफनाया जाता है।

यहां आने वाले लोग मांगते हैं मुराद

इस कब्रिस्तान में एक मकबरा भी है। इस मकबरे पर घूमने आने वाले दुनियाभर के शिया मुस्लिम मन्नत मांगते हैं कि उन्हें इसी कब्रिस्तान में दफनाया जाए। 14वीं सदी में निर्मित इस कब्रिस्तान का आकार दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। कारण है इराक के आसपास के इलाकों के लोग आतंकी संगठन आईएसआईएस (ISIS) से लड़ने के बाद शहीद होने के बाद दफ़न होने यहां आते हैं। अधिकांश इराकी और कई ईरानी शियाओं के रिश्तेदार भी यहां दफन हैं। 2014 में एक वक्‍त ऐसा भी आया था, जब कहा गया क‍ि यहां अब शव रखने की जगह नहीं है, भूखंड खत्‍म हो गए हैं। इसके बाद कब्र‍िस्‍तान से कई शव चोरी हो गए, और कुछ शवों को बेच दिया गया।
Al Jazeera की रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया भर के शिया मुसलमानों के लिए ‘Valley Of Peace’ अत्यंत महत्वपूर्ण स्थल है। यहां कब्र खोदने में 100 डॉलर और दफनाने में 170 से 200 डॉलर का खर्च आता है। 2021 में आई एक रिपोर्ट के अनुसार, वादी अल-सलाम में शवों को दफनाने का काम दोगुनी तेजी से होने लगा है।

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