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February 2, 2026

अयोध्या-लखनऊ कॉरिडोर बनेगा आस्था और पर्यटन का सुपरहाइवे, नैमिषारण्य से वृंदावन तक बदलेगा सफर का अनुभव

The CSR Journal Magazine
लखनऊ से अयोध्या को जोड़ने वाला करीब 125 किलोमीटर लंबा कॉरिडोर अब सिर्फ सड़क नहीं, बल्कि आस्था, संस्कृति और रोजगार का नया द्वार बनने जा रहा है। केंद्रीय बजट में अतिरिक्त धनराशि मिलने के बाद इस परियोजना को पर्यटन पैकेज से जोड़ा गया है। इसका सीधा लाभ बाराबंकी जिले को मिलेगा, जहां धार्मिक और इको-टूरिज्म के जरिए स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।

NH-27 पर इको-टूरिज्म और धार्मिक स्थलों का विकास

राष्ट्रीय राजमार्ग NH-27 को इको-टूरिज्म कॉरिडोर के रूप में विकसित किया जा रहा है। सड़क के दोनों ओर हरियाली, पर्यटन सुविधाएं और धार्मिक स्थलों का सौंदर्यीकरण किया जाएगा। इसका उद्देश्य यात्रियों को सिर्फ तेज रफ्तार नहीं, बल्कि एक सुरम्य और यादगार यात्रा अनुभव देना है। आने वाले समय में यह मार्ग देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनेगा।

नैमिषारण्य से वृंदावन तक सुरक्षित कनेक्टिविटी

इस कॉरिडोर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह लखनऊ से किसान पथ के जरिए नैमिषारण्य चक्रतीर्थ को जोड़ेगा और आगे आगरा एक्सप्रेस वे के माध्यम से मथुरा-वृंदावन तक सीधी, सुरक्षित कनेक्टिविटी देगा। यानी श्रद्धालु अब अयोध्या, नैमिषारण्य और वृंदावन जैसे प्रमुख तीर्थों की यात्रा कम समय में, बिना जाम और जोखिम के कर सकेंगे।

बाराबंकी के तीर्थ बनेंगे पर्यटन के नए केंद्र

कॉरिडोर के रास्ते बाराबंकी के कई प्रसिद्ध धार्मिक और सांस्कृतिक स्थल भी पर्यटन मानचित्र पर उभरेंगे। रामनगर स्थित लोधेश्वर महादेवा तीर्थ में पृथ्वी पर उपलब्ध 52 दुर्लभ और अनोखे शिवलिंगों के दर्शन संभव होंगे। सिरौलीगौसपुर क्षेत्र के किंतूर में कुंतेश्वर महादेव मंदिर की मान्यता है कि यहां शिवलिंग प्रतिदिन स्वतः पूजित अवस्था में मिलते हैं।

पारिजात वृक्ष से कोटवाधाम तक, आस्था का पूरा सर्किट

बरौलिया का देव वृक्ष पारिजात, कोटवाधाम तीर्थ जहां समर्थ स्वामी जगजीवन साहेब की तपोस्थली है, सतरिख का मंजीठा धाम और हैदरगढ़ का औसानेश्वर महादेव मंदिर—ये सभी स्थल अब बेहतर सड़क कनेक्टिविटी के कारण श्रद्धालुओं के लिए आसानी से सुलभ होंगे। साथ ही भगहर झील में विदेशी पक्षी सारस का प्रवास इको-टूरिज्म को नया आयाम देगा।

चार फ्लाईओवर, जाम से मिलेगी मुक्ति

यातायात दबाव को देखते हुए एनएचएआई ने इस कॉरिडोर पर चार प्रमुख फ्लाईओवर बनाने का फैसला किया है। सफेदाबाद, दादरा, सफदरगंज और दिलोना मोड़ पर बनने वाले फ्लाईओवर से रोजाना करीब 22 हजार वाहनों की आवाजाही सुचारु होगी। कार, बस और भारी वाहनों के कारण लगने वाले जाम और दुर्घटनाओं में उल्लेखनीय कमी आएगी।

पर्यटन के साथ रोजगार की नई राह

एनएचएआई के अनुसार इस परियोजना का लक्ष्य सिर्फ सड़क बनाना नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र को आर्थिक रूप से मजबूत करना है। होटल, ढाबे, गाइड सेवा, हस्तशिल्प और स्थानीय व्यवसायों को बढ़ावा मिलेगा। अयोध्या-लखनऊ कॉरिडोर आने वाले वर्षों में उत्तर प्रदेश के धार्मिक और पर्यटन विकास की रीढ़ साबित हो सकता है।
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