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September 30, 2026

US वीजा के लिए भारतीयों को 346 दिन तक इंतजार, स्टाफ की कमी और बढ़ती मांग बनी बड़ी वजह

The CSR Journal Magazine

US Visa Update: अमेरिकी वीजा के लिए भारतीयों को 346 दिन तक करना पड़ा इंतजार, स्टाफ की कमी और बढ़ती मांग बनी बड़ी वजह

अमेरिका जाने की तैयारी कर रहे भारतीय नागरिकों के लिए वीजा प्रक्रिया से जुड़ी एक महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। अमेरिकी सरकार की एक नई ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2025 में भारत में अमेरिकी विजिटर वीजा के लिए साक्षात्कार की नियुक्ति पाने में आवेदकों को औसतन 346 दिन का इंतजार करना पड़ा। यह प्रतीक्षा अवधि कोरोना महामारी से पहले की तुलना में आठ गुने से भी अधिक है। वित्त वर्ष 2019 में भारतीय आवेदकों के लिए विजिटर वीजा साक्षात्कार की औसत प्रतीक्षा अवधि करीब 42 दिन थी। अमेरिकी सरकारी जवाबदेही कार्यालय यानी Government Accountability Office (GAO) की रिपोर्ट में लंबी कतार के पीछे बढ़ती वीजा मांग और उसके अनुपात में पर्याप्त वाणिज्य दूतावास कर्मचारियों की उपलब्धता नहीं होने को प्रमुख कारणों में शामिल किया गया है।
हालांकि, 346 दिन के आंकड़े को समझना बेहद जरूरी है। इसका मतलब यह नहीं है कि भारत में आवेदन करने वाले प्रत्येक व्यक्ति को आज भी ठीक 346 दिन इंतजार करना पड़ेगा। यह वित्त वर्ष 2025 के दौरान विजिटर वीजा साक्षात्कार की नियुक्ति हासिल करने की भारित औसत प्रतीक्षा अवधि थी। वास्तविक प्रतीक्षा समय शहर, दूतावास या वाणिज्य दूतावास, वीजा श्रेणी और उपलब्ध नियुक्तियों के आधार पर अलग-अलग हो सकता है। साथ ही, यह अवधि केवल साक्षात्कार तक पहुंचने के इंतजार को दर्शाती है, साक्षात्कार के बाद वीजा जारी होने में लगने वाला समय इसमें शामिल नहीं है।

भारत में अमेरिकी वीजा की मांग लगातार बढ़ी

GAO की रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2025 में भारत में करीब 14.55 लाख गैर-आप्रवासी वीजा आवेदनप्राप्त हुए। इन आवेदनों को संभालने के लिए केवल 68 वाणिज्य दूतावास अधिकारी गैर-आप्रवासी वीजा से संबंधित काम कर रहे थे। इस हिसाब से प्रत्येक अधिकारी पर औसतन करीब 21,401 आवेदन का कार्यभार था। रिपोर्ट में भारत का यह कार्यभार जांच में शामिल प्रमुख देशों में सबसे अधिक स्तर पर दर्ज किया गया। भारत की स्थिति को ब्राजील, चीन और मेक्सिको के आंकड़ों से समझा जा सकता है। वित्त वर्ष 2025 में ब्राजील में 11.41 लाख गैर-आप्रवासी वीजा आवेदन और 87 अधिकारी थे, जबकि वहां साक्षात्कार की भारित औसत प्रतीक्षा अवधि 32 दिन रही। चीन में करीब 12.06 लाख आवेदन और 119 अधिकारी थे तथा औसत प्रतीक्षा अवधि 34 दिन रही। इसके विपरीत मेक्सिको में 26.58 लाख आवेदन और 124 अधिकारी थे और वहां औसत प्रतीक्षा अवधि 283 दिन दर्ज की गई। भारत में 14.55 लाख आवेदन और केवल 68 अधिकारियों के साथ औसत प्रतीक्षा अवधि 346 दिन रही।

कोरोना से पहले 42 दिन, अब 346 दिन

भारतीय आवेदकों के लिए स्थिति में कितना बड़ा बदलाव आया है, इसका अंदाजा वित्त वर्ष 2019 और 2025 के आंकड़ों से लगाया जा सकता है। कोरोना महामारी से पहले वित्त वर्ष 2019 में भारत में अमेरिकी विजिटर वीजा साक्षात्कार के लिए औसत प्रतीक्षा अवधि करीब 42 दिन थी। वित्त वर्ष 2025 में यही अवधि बढ़कर 346 दिन हो गई। यानी छह साल की अवधि में औसत प्रतीक्षा समय में कई गुना वृद्धि हुई। पूरी दुनिया में भी अमेरिकी विजिटर वीजा के लिए साक्षात्कार की प्रतीक्षा अवधि बढ़ी है। GAO के अनुसार, वैश्विक स्तर पर विजिटर वीजा साक्षात्कार के लिए औसत प्रतीक्षा अवधि वित्त वर्ष 2019 में 26 दिन थी, जो वित्त वर्ष 2025 में बढ़कर 201 दिन हो गई। हालांकि भारत में बढ़ोतरी विशेष रूप से उल्लेखनीय रही, क्योंकि यहां वीजा मांग और उपलब्ध कर्मचारियों के बीच अंतर काफी ज्यादा रहा।

अधिकारियों की संख्या में भी आई कमी

अमेरिकी वीजा व्यवस्था पर दबाव केवल आवेदन बढ़ने से नहीं पड़ा। GAO ने अमेरिकी विदेश विभाग में गैर-आप्रवासी वीजा से जुड़े काम करने वाले अधिकारियों की संख्या में आए बदलाव को भी महत्वपूर्ण माना है। रिपोर्ट के अनुसार, कोविड महामारी के दौरान वित्त वर्ष 2021 में ऐसे अधिकारियों की संख्या घटकर 1,104 रह गई थी। इसके बाद इसमें सुधार हुआ और वित्त वर्ष 2024 में यह संख्या बढ़कर 1,342 तक पहुंची। लेकिन वित्त वर्ष 2025 में यह संख्या फिर घटकर 904 रह गई। GAO ने इस कमी के पीछे नियुक्तियों पर रोक और कर्मचारियों के नौकरी छोड़ने जैसे कारणों का उल्लेख किया है। इसका सीधा असर वीजा प्रक्रिया पर पड़ा। महामारी के बाद अमेरिकी वीजा की मांग तेजी से वापस आई और कई मामलों में महामारी से पहले के स्तर को पार कर गई, लेकिन कर्मचारियों की संख्या उसी अनुपात में नहीं बढ़ सकी। नतीजतन कई देशों में वीजा साक्षात्कार के लिए लंबी कतारें बनीं। भारत में आवेदन संख्या और कर्मचारियों के अनुपात ने इस समस्या को और गंभीर बना दिया।

विजिटर वीजा के लिए सबसे ज्यादा परेशानी

लंबी प्रतीक्षा अवधि का सबसे ज्यादा असर B1/B2 विजिटर वीजा के आवेदकों पर पड़ता है। B1 वीजा सामान्य तौर पर व्यावसायिक यात्रा के लिए और B2 वीजा पर्यटन तथा कुछ अन्य अस्थायी यात्राओं के लिए इस्तेमाल किया जाता है। बड़ी संख्या में भारतीय पर्यटक, कारोबारी और अपने रिश्तेदारों से मिलने अमेरिका जाने वाले लोग इसी श्रेणी में आवेदन करते हैं। अमेरिकी विदेश विभाग की 17 सितंबर 2026 को अपडेट की गई जानकारी के अनुसार, भारत के अलग-अलग वीजा केंद्रों पर अगली उपलब्ध B1/B2 नियुक्ति का अनुमान अलग-अलग था। इस तरह की प्रतीक्षा अवधि समय के साथ बदल सकती है, क्योंकि दूतावास और वाणिज्य दूतावास नियमित रूप से नई नियुक्तियां जारी करते रहते हैं। अमेरिकी विदेश विभाग खुद स्पष्ट करता है कि प्रकाशित औसत प्रतीक्षा अवधि किसी आवेदक को किसी निश्चित तारीख तक नियुक्ति मिलने की गारंटी नहीं देती। इसलिए यदि किसी व्यक्ति को वीजा साक्षात्कार की तारीख काफी आगे की मिली है, तो उसे समय-समय पर आधिकारिक नियुक्ति प्रणाली में उपलब्ध नई तारीखों की जांच करते रहना उपयोगी हो सकता है। अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार, अतिरिक्त नियुक्ति स्लॉट नियमित रूप से जारी किए जाते हैं और पहले से नियुक्ति लेने वाले आवेदक उपलब्ध होने पर पहले की तारीख पर नियुक्ति बदल सकते हैं।

हर अमेरिकी वीजा आवेदक को 346 दिन इंतजार नहीं करना पड़ता

यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है। GAO रिपोर्ट में दिया गया 346 दिन का आंकड़ा विजिटर वीजा साक्षात्कार की ऐतिहासिक औसत प्रतीक्षा अवधि है। यह वर्तमान समय में हर शहर या हर आवेदक के लिए लागू होने वाली निश्चित समयसीमा नहीं है। उदाहरण के लिए, मुंबई और दिल्ली में उपलब्धता चेन्नई या कोलकाता से अलग हो सकती है। इसी तरह B1/B2 वीजा के लिए प्रतीक्षा अवधि छात्र वीजा या कुछ रोजगार आधारित वीजा श्रेणियों से अलग हो सकती है। अमेरिकी विदेश विभाग हर महीने वैश्विक वीजा प्रतीक्षा संबंधी जानकारी अपडेट करता है। इसके अलावा, 346 दिन पूरे होने के बाद वीजा मिलना तय नहीं होता। साक्षात्कार की नियुक्ति मिलना केवल प्रक्रिया का एक चरण है। साक्षात्कार के बाद अधिकारी आवेदन और संबंधित दस्तावेजों के आधार पर निर्णय लेते हैं। इसलिए किसी आवेदक की पूरी वीजा प्रक्रिया का समय 346 दिन मानना सही नहीं होगा।

अमेरिकी सरकारी रिपोर्ट ने स्टाफिंग व्यवस्था पर उठाया सवाल

GAO ने अमेरिकी विदेश विभाग की Global Repositioning Exercise (GREX) व्यवस्था का भी उल्लेख किया है। इसका उद्देश्य विभिन्न देशों में वाणिज्य दूतावासों के कर्मचारियों की संख्या और उनके कार्यभार के बीच बेहतर तालमेल बनाने में मदद करना है। रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2019 के बाद से यह अभ्यास केवल एक बार लागू किया गया। कोविड से संबंधित परिस्थितियों के कारण वित्त वर्ष 2021 और 2022 में यह प्रक्रिया नहीं की गई, जबकि वित्त वर्ष 2024 और 2025 में बदलती नीतिगत प्राथमिकताओं के कारण यह अभ्यास नहीं हुआ। GAO ने अमेरिकी विदेश विभाग को इस व्यवस्था को नियमित रूप से लागू करने के लिए एक ऐसी प्रणाली बनाने की सिफारिश की है, जिससे वाणिज्य दूतावास मामलों से जुड़े कर्मचारियों की जरूरत का नियमित आकलन हो सके। रिपोर्ट के अनुसार, विदेश विभाग ने इस सिफारिश से न तो सहमति जताई और न ही असहमति।

दूतावास की क्षमता भी बनी चुनौती

रिपोर्ट में भारत में वीजा प्रक्रिया से जुड़ी भौतिक क्षमता का भी उल्लेख किया गया है। अधिकारियों ने बताया कि नई दिल्ली स्थित अमेरिकी दूतावास में उपलब्ध साक्षात्कार खिड़कियों की संख्या उस स्तर की मांग के मुकाबले पर्याप्त नहीं है, जितने कर्मचारियों की आवश्यकता बताई गई है। ऑडिट के दौरान अधिकारियों ने दूतावास के बाहर और अतिरिक्त प्रतीक्षा क्षेत्रों में बड़ी संख्या में लोगों को इंतजार करते हुए देखा। इसका मतलब यह है कि केवल कर्मचारियों की संख्या बढ़ाना ही समाधान नहीं है। वीजा साक्षात्कार के लिए उपलब्ध स्थान, नियुक्ति प्रबंधन और आवेदनों की जांच की क्षमता भी महत्वपूर्ण है। GAO की रिपोर्ट इसी व्यापक क्षमता और मांग के बीच संतुलन की आवश्यकता की ओर इशारा करती है।

वीजा एजेंटों की भूमिका पर भी नजर

अमेरिकी सरकारी ऑडिट में वीजा नियुक्तियों के आसपास काम करने वाले कुछ भुगतान लेकर सेवाएं देने वाले एजेंटों का भी उल्लेख किया गया है। अधिकारियों ने बताया कि कुछ एजेंट उपलब्ध नियुक्तियों को बुक करके उन्हें अपने ग्राहकों को उपलब्ध कराते हैं। इससे आम आवेदकों के लिए नियुक्ति हासिल करना कठिन हो सकता है। अमेरिकी विदेश विभाग ने ऐसी गतिविधियों को रोकने के लिए नियुक्ति प्रणाली में बदलाव किए हैं। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि वित्त वर्ष 2024 में नई दिल्ली से जुड़े कुछ ऐसे विजिटर वीजा मामलों में, जिन्हें साक्षात्कार के बिना निपटाया जा सकता था, बड़ी संख्या में मामलों की दूरस्थ स्तर पर समीक्षा की गई थी।

लंबी प्रतीक्षा का असर अमेरिका के पर्यटन पर भी

वीजा साक्षात्कार में देरी का असर केवल भारतीय यात्रियों पर ही नहीं पड़ता, बल्कि अमेरिका के पर्यटन क्षेत्र पर भी पड़ सकता है। GAO ने अपनी रिपोर्ट में अंतरराष्ट्रीय यात्रा और पर्यटन के अमेरिकी अर्थव्यवस्था में योगदान का उल्लेख किया है। वित्त वर्ष 2025 में अंतरराष्ट्रीय यात्रा और पर्यटन से अमेरिकी अर्थव्यवस्था में करीब 176 अरब डॉलर का योगदान हुआ। यह 2024 की तुलना में करीब 5 अरब डॉलर कम और महामारी से पहले के स्तर की तुलना में करीब 28 अरब डॉलर कम था। रिपोर्ट ने लंबी विजिटर वीजा प्रतीक्षा अवधि को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन में आई कमी को प्रभावित करने वाले कई कारकों में से एक बताया है। हालांकि, पर्यटन में कमी को केवल वीजा देरी की वजह से जोड़ना उचित नहीं होगा, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय यात्रा को प्रभावित करने वाले कई अन्य आर्थिक और नीतिगत कारण भी हो सकते हैं।

भारतीय आवेदकों के लिए क्या समझना जरूरी है?

भारतीय नागरिक यदि अमेरिका के लिए B1/B2 वीजा आवेदन करने की योजना बना रहे हैं, तो उन्हें यात्रा की तारीख तय करने से पहले आधिकारिक अमेरिकी वीजा नियुक्ति प्रणाली में उपलब्धता देखनी चाहिए। केवल सोशल मीडिया या पुराने समाचारों में प्रकाशित प्रतीक्षा अवधि के आधार पर योजना बनाना उचित नहीं है, क्योंकि नियुक्ति की स्थिति लगातार बदलती रहती है। अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार, दूतावास और वाणिज्य दूतावास नियमित रूप से अतिरिक्त नियुक्ति स्लॉट जारी करते हैं। इसलिए पहले से नियुक्ति लेने वाले आवेदकों को भी आधिकारिक प्रणाली में समय-समय पर उपलब्ध तारीखों की जांच करनी चाहिए।

अमेरिकी विजिटर वीजा व्यवस्था के सामने बड़ी चुनौती

कुल मिलाकर, अमेरिकी सरकारी ऑडिट ने भारत में अमेरिकी विजिटर वीजा व्यवस्था के सामने मौजूद एक बड़ी चुनौती को रेखांकित किया है। वित्त वर्ष 2025 में 346 दिन की औसत प्रतीक्षा अवधि, 14.55 लाख गैर-आप्रवासी वीजा आवेदनों और केवल 68 संबंधित अधिकारियों का आंकड़ा बताता है कि मांग और संसाधनों के बीच अंतर काफी बढ़ गया था। साथ ही, अधिकारियों की वैश्विक संख्या में कमी और नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़ी अन्य चुनौतियों ने भी स्थिति को प्रभावित किया। हालांकि, 346 दिन को वर्तमान में हर भारतीय आवेदक के लिए लागू निश्चित प्रतीक्षा अवधि नहीं माना जाना चाहिए। वास्तविक नियुक्ति समय संबंधित शहर, वीजा श्रेणी और उस समय उपलब्ध स्लॉट पर निर्भर करता है।

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