H-1B Visa पर सख्त हुआ अमेरिका, 365 दिनों में बदल सकता है पूरा सिस्टम; भारतीयों पर क्या होगा असर?

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US H-1B Visa: अमेरिकी सरकार की जांच से बढ़ी हलचल, 365 दिनों में बदल सकता है H-1B सिस्टम; भारतीय पेशेवरों पर भी असर की आशंका

अमेरिका में नौकरी करने की इच्छा रखने वाले भारतीय आईटी पेशेवरों और दूसरे कुशल विदेशी कर्मचारियों के लिए H-1B वीजा को लेकर एक बड़ा अपडेट सामने आया है। अमेरिकी प्रशासन ने H-1B कार्यक्रम में कथित धोखाधड़ी, फर्जी रोजगार, श्रमिकों के शोषण और वीजा व्यवस्था के गलत इस्तेमाल की जांच तेज कर दी है। इसी बीच अमेरिका के श्रम विभाग के इंस्पेक्टर जनरल एंथनी डी’एस्पोसिटो ने संकेत दिया है कि अगले 365 दिनों में विदेशी श्रमिकों से जुड़ा वीजा कार्यक्रम मौजूदा स्वरूप से काफी अलग दिखाई दे सकता है। हालांकि, उन्होंने H-1B कार्यक्रम को बंद करने की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है।
डी’एस्पोसिटो ने कहा है कि जांच एजेंसियां विदेशी श्रमिकों से जुड़े तंत्र के कथित दुरुपयोग की पड़ताल में बड़े स्तर पर संसाधनों का इस्तेमाल कर रही हैं और अधिकारियों की टीम इस मामले में केस तैयार कर रही है। उनके बयान के बाद H-1B वीजा को लेकर अमेरिका में संभावित बड़े बदलावों की चर्चा तेज हो गई है। लेकिन मौजूदा स्थिति में यह कहना सही नहीं होगा कि अमेरिका ने H-1B वीजा समाप्त करने का फैसला कर लिया है। आधिकारिक बयानों में फिलहाल जांच, निगरानी और नियमों के कड़ाई से पालन पर जोर दिया गया है।

H-1B वीजा आखिर है क्या?

H-1B अमेरिका का एक गैर-आप्रवासी वर्क वीजा कार्यक्रम है, जिसके तहत अमेरिकी कंपनियां कुछ विशेष कौशल और विशेषज्ञता वाले विदेशी कर्मचारियों को अमेरिका में अस्थायी रूप से काम करने के लिए नियुक्त कर सकती हैं। तकनीक, इंजीनियरिंग, वित्त, स्वास्थ्य सेवा, शोध और अन्य विशेष पेशेवर क्षेत्रों में काम करने वाले विदेशी कर्मचारियों के लिए यह कार्यक्रम महत्वपूर्ण रहा है।भारतीय पेशेवर लंबे समय से H-1B व्यवस्था का इस्तेमाल करते रहे हैं। खासकर भारतीय आईटी कंपनियों और अमेरिका में काम करने वाले भारतीय तकनीकी विशेषज्ञों के लिए यह वीजा अमेरिका के रोजगार बाजार तक पहुंचने का एक महत्वपूर्ण माध्यम रहा है। यही वजह है कि H-1B नियमों में होने वाला कोई भी बड़ा बदलाव भारतीय छात्रों, आईटी पेशेवरों, कंपनियों और अमेरिका में काम करने की योजना बना रहे लोगों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

जांच क्यों बढ़ाई गई?

अमेरिकी श्रम विभाग के इंस्पेक्टर जनरल कार्यालय ने जुलाई 2026 में H-1B और PERM प्रणालियों में कथित धोखाधड़ी और मानव तस्करी के खिलाफ बड़ी जांच शुरू करने की घोषणा की थी। विभाग के अनुसार, जांच में ऐसे आरोपों पर ध्यान दिया जा रहा है जिनमें नियोक्ताओं या श्रम-बिचौलियों द्वारा कथित तौर पर फर्जी आवेदन, वेतन से संबंधित अनुचित व्यवस्था और विदेशी कर्मचारियों के शोषण जैसी गतिविधियां शामिल हो सकती हैं। अमेरिकी अधिकारियों ने यह भी आरोप लगाया है कि कुछ मामलों में फर्जी नियोक्ताओं, ऐसी नौकरियों जो वास्तव में मौजूद नहीं थीं और कथित ‘वीजा मिल’ जैसी व्यवस्थाओं का इस्तेमाल किया गया हो सकता है। इन आरोपों की जांच अभी जारी है और किसी भी कंपनी या व्यक्ति के खिलाफ आरोप को अंतिम दोषसिद्धि के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

डी’एस्पोसिटो ने क्या कहा?

हाल में दिए एक इंटरव्यू में डी’एस्पोसिटो ने कहा कि जांचकर्ता विदेशी श्रम व्यवस्था के कथित दुरुपयोग को लेकर मामला तैयार कर रहे हैं। उन्होंने संकेत दिया कि जांच केवल कागजी कमियों या सामान्य प्रशासनिक गलतियों तक सीमित नहीं है। उनके अनुसार, अधिकारियों का ध्यान उन गतिविधियों पर है जिनमें गंभीर कानूनी उल्लंघन की आशंका हो सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि 365 दिन बाद विदेशी श्रमिकों से जुड़ा वीजा कार्यक्रम आज के मुकाबले काफी अलग दिखाई दे सकता है। इस बयान को कुछ रिपोर्टों में H-1B कार्यक्रम के संभावित बंद होने के संकेत के तौर पर पेश किया गया है, लेकिन डी’एस्पोसिटो ने स्वयं H-1B कार्यक्रम को समाप्त करने की घोषणा नहीं की है। इसलिए फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर इसे संभावित बड़े बदलाव की चेतावनी के रूप में देखना अधिक सटीक है, न कि कार्यक्रम खत्म होने की आधिकारिक घोषणा के रूप में।

जांच में क्या-क्या देखा जा रहा है?

अमेरिकी श्रम विभाग के इंस्पेक्टर जनरल कार्यालय की जांच का दायरा H-1B से आगे विदेशी श्रमिकों से जुड़े अन्य कार्यक्रमों तक भी पहुंच रहा है। अधिकारियों ने कथित फर्जी नियोक्ताओं, वास्तविक काम के बिना रोजगार दिखाने, विदेशी कर्मचारियों के शोषण और मानव तस्करी से जुड़े संभावित मामलों पर ध्यान केंद्रित किया है। जुलाई में शुरू की गई जांच के बाद अगस्त में श्रम विभाग के इंस्पेक्टर जनरल कार्यालय ने टेक्सास के डलास क्षेत्र में कुछ ऐसी जगहों पर जांच की, जिनसे सैकड़ों H-1B आवेदन जुड़े होने की बात सामने आई थी। अधिकारियों ने कुछ परिसरों में जाकर जांच की और ऐसे कार्यालय भी देखे जहां उन्हें कथित तौर पर वास्तविक कारोबारी गतिविधि के कम संकेत मिले। विभाग ने कहा कि जांच का उद्देश्य H-1B व्यवस्था में धोखाधड़ी के संभावित मामलों का पता लगाना है। सितंबर में भी जांच आगे बढ़ने की जानकारी सामने आई है। रिपोर्टों के अनुसार, जांचकर्ताओं ने कई स्थानों पर तलाशी वारंट और दर्जनों सम्मन जारी किए हैं। कुछ वीजा आवेदनों को संबंधित आपराधिक जांच पूरी होने तक निलंबित किए जाने की भी जानकारी दी गई है।

ट्रंप प्रशासन पहले ही सख्ती बढ़ा चुका है

H-1B को लेकर यह जांच ऐसे समय हो रही है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का प्रशासन इस कार्यक्रम की निगरानी और नियमों के अनुपालन को कड़ा करने की दिशा में कई कदम उठा चुका है। 18 सितंबर 2026 को जारी राष्ट्रपति के कार्यकारी आदेश में H-1B कार्यक्रम के प्रशासन में श्रम विभाग, होमलैंड सिक्योरिटी विभाग और विदेश विभाग के बीच समन्वय बढ़ाने की बात कही गई। आदेश में नियोक्ताओं की ओर से अमेरिकी कर्मचारियों की छंटनी और उसी तरह के पदों पर H-1B कर्मचारियों की नियुक्ति से जुड़े मामलों की जांच पर भी जोर दिया गया है। इसका मतलब यह है कि भविष्य में H-1B कर्मचारी को नियुक्त करने वाली कंपनियों को यह साबित करने के लिए अधिक दस्तावेज और अनुपालन रिकॉर्ड रखने पड़ सकते हैं कि उनका विदेशी कर्मचारी नियुक्त करने का निर्णय नियमों के अनुरूप है।

अमेरिकी कर्मचारियों की छंटनी भी जांच के दायरे में

नए प्रशासनिक निर्देशों में इस बात पर विशेष ध्यान दिया गया है कि H-1B कर्मचारियों को नियुक्त करने वाली कंपनियों ने हाल में उसी तरह के पदों पर अमेरिकी कर्मचारियों को नौकरी से निकाला है या नहीं। यदि किसी कंपनी ने अमेरिकी कर्मचारियों की छंटनी के बाद समान काम के लिए विदेशी कर्मचारियों को नियुक्त किया है, तो ऐसे मामलों की अतिरिक्त जांच हो सकती है। यह व्यवस्था H-1B कार्यक्रम के इस्तेमाल को लेकर अमेरिकी प्रशासन की प्राथमिकता में बदलाव को दर्शाती है। अब केवल यह देखना पर्याप्त नहीं होगा कि विदेशी कर्मचारी के पास आवश्यक योग्यता है या नहीं, बल्कि नियोक्ता की भर्ती प्रक्रिया और अमेरिकी कर्मचारियों पर उसके प्रभाव को भी अधिक गंभीरता से देखा जा सकता है।

H-1B पर 1 लाख डॉलर की फीस का मुद्दा भी अहम

H-1B व्यवस्था में पहले ही एक बड़ा बदलाव हो चुका है। 18 सितंबर 2026 को अमेरिकी प्रशासन ने कुछ विदेशी H-1B कर्मचारियों के प्रवेश पर लागू प्रतिबंधों को अगले 12 महीनों के लिए बढ़ाया। यह व्यवस्था 21 सितंबर 2027 तक प्रभावी रहने वाली है। इसके तहत कुछ ऐसे नए H-1B मामलों में, जिनमें कर्मचारी अमेरिका के बाहर है, नियोक्ता को सामान्य परिस्थितियों में 1 लाख डॉलर का भुगतान करना पड़ सकता है, हालांकि इस व्यवस्था में कुछ अपवाद भी हैं। इस कदम का असर खास तौर पर उन कंपनियों पर पड़ सकता है जो अमेरिका के बाहर बैठे कर्मचारियों को नए H-1B के जरिए अमेरिका लाना चाहती हैं। हालांकि, इसे सभी H-1B कर्मचारियों पर समान रूप से लागू होने वाला शुल्क समझना सही नहीं होगा, क्योंकि प्रशासनिक आदेश में इसके दायरे और अपवादों का अलग-अलग उल्लेख है।

H-1B चयन प्रक्रिया में भी बदलाव

H-1B व्यवस्था में चयन प्रणाली को लेकर भी बदलाव हो चुके हैं। अमेरिकी सरकार ने वित्त वर्ष 2027 के लिए पात्र H-1B पंजीकरणों के चयन में भारित चयन प्रणाली लागू करने का नियम बनाया है। अमेरिकी सरकारी जवाबदेही कार्यालय यानी GAO ने जनवरी 2026 में इस नियम की समीक्षा की थी। नए नियम में चयन प्रक्रिया को इस तरह बदला गया है कि पंजीकरण और याचिकाकर्ताओं के चयन के लिए अलग भार लागू हो सके। इसका मतलब है कि H-1B व्यवस्था में बदलाव केवल जांच और प्रवर्तन तक सीमित नहीं हैं। चयन प्रक्रिया, नियोक्ता की पात्रता, विदेशी कर्मचारियों के प्रवेश और कंपनियों की अनुपालन जिम्मेदारियों से जुड़े कई स्तरों पर बदलाव देखने को मिल रहे हैं।

भारतीय आईटी पेशेवरों के लिए इसका क्या मतलब?

भारतीय पेशेवरों के लिए H-1B में संभावित बदलाव इसलिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक अमेरिकी तकनीकी और पेशेवर क्षेत्रों में काम करते हैं। यदि आने वाले महीनों में अमेरिकी प्रशासन H-1B नियोक्ताओं की जांच और कड़ी करता है, तो कंपनियों के लिए विदेशी कर्मचारियों की नियुक्ति से जुड़ी प्रक्रिया अधिक जटिल हो सकती है। खासकर आउटसोर्सिंग, स्टाफिंग और तीसरे पक्ष के माध्यम से कर्मचारियों को नियुक्त करने वाली कंपनियों को अपने रोजगार संबंधी दस्तावेज, वेतन, वास्तविक कार्यस्थल और कर्मचारी की भूमिका से जुड़े रिकॉर्ड अधिक सावधानी से बनाए रखने पड़ सकते हैं। हालांकि, इसका यह अर्थ नहीं है कि सामान्य नियमों के तहत पात्र भारतीय पेशेवरों के लिए H-1B वीजा स्वतः समाप्त हो जाएगा।

क्या अगले साल H-1B वीजा बंद हो जाएगा?

फिलहाल ऐसा कोई आधिकारिक फैसला सामने नहीं आया है कि H-1B कार्यक्रम को अगले एक साल में पूरी तरह बंद कर दिया जाएगा। डी’एस्पोसिटो ने कहा है कि 365 दिनों बाद विदेशी श्रमिकों से जुड़ा वीजा कार्यक्रम काफी अलग हो सकता है, लेकिन उन्होंने इसे समाप्त करने की घोषणा नहीं की। अमेरिकी प्रशासन ने भी अभी तक H-1B को पूरी तरह समाप्त करने का आदेश जारी नहीं किया है। इसलिए भारतीय आवेदकों और H-1B पर काम कर रहे पेशेवरों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि वे सोशल मीडिया पर चल रही किसी भी ऐसी खबर को अंतिम निर्णय न मानें जिसमें H-1B को तत्काल बंद किए जाने का दावा किया जा रहा हो। अभी वास्तविक स्थिति यह है कि जांच तेज है, नियमों की निगरानी बढ़ रही है और प्रशासन H-1B व्यवस्था में व्यापक बदलाव की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

कंपनियों पर बढ़ सकता है अनुपालन का दबाव

आने वाले समय में H-1B प्रायोजित करने वाली कंपनियों के लिए सबसे बड़ा बदलाव अनुपालन से जुड़ा हो सकता है। नियोक्ताओं को यह सुनिश्चित करना होगा कि कर्मचारी का वास्तविक पद, काम, वेतन और रोजगार संबंधी जानकारी आवेदन में दी गई जानकारी से मेल खाती हो। फर्जी नौकरी, कागजी नियोक्ता या केवल वीजा हासिल करने के लिए बनाई गई कथित व्यवस्था जांच के दायरे में आ सकती है। अमेरिकी श्रम विभाग का इंस्पेक्टर जनरल कार्यालय साफ कर चुका है कि उसकी जांच केवल दस्तावेजों की औपचारिक जांच तक सीमित नहीं है। कार्यालय ने H-1B और PERM प्रणालियों में कथित धोखाधड़ी तथा मानव तस्करी के खिलाफ कार्रवाई को अपनी प्राथमिकताओं में शामिल किया है।

भारतीय छात्रों और नौकरी तलाश रहे युवाओं के लिए संदेश

अमेरिका में उच्च शिक्षा के बाद नौकरी करने की योजना बनाने वाले भारतीय छात्रों और पेशेवरों के लिए H-1B अब भी एक महत्वपूर्ण विकल्प है, लेकिन बदलते नियमों को देखते हुए केवल H-1B पर निर्भर रहकर करियर योजना बनाना जोखिमपूर्ण हो सकता है। छात्रों और नौकरी तलाश रहे लोगों को अपनी योग्यता, रोजगार अनुबंध, नियोक्ता की विश्वसनीयता और वीजा नियमों की ताजा स्थिति की जानकारी आधिकारिक स्रोतों से लेनी चाहिए। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि H-1B को लेकर आने वाले महीनों में अमेरिकी प्रशासन के फैसलों पर नजर रखनी होगी। जांच से निकलने वाले निष्कर्ष, नए नियम, नियोक्ताओं के लिए अनुपालन आवश्यकताएं और विदेशी कर्मचारियों के प्रवेश से जुड़े आदेश यह तय करेंगे कि अगले वर्ष यह कार्यक्रम किस रूप में दिखाई देता है।
फिलहाल उपलब्ध आधिकारिक जानकारी के आधार पर H-1B वीजा कार्यक्रम बंद नहीं हुआ है। लेकिन अमेरिकी श्रम विभाग की बढ़ती जांच और प्रशासन की नई नीतियों से यह साफ है कि कार्यक्रम पर निगरानी पहले की तुलना में अधिक कड़ी हो रही है और आने वाले महीनों में इसमें महत्वपूर्ण बदलाव संभव हैं।

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