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January 3, 2026

अमेरिका का नया ट्रैवल बैन 2026: 39 देशों पर लगी पूर्ण व आंशिक पाबंदी, 1 जनवरी से लागू !

The CSR Journal Magazine

 

अमेरिका जब भी सुरक्षा का हवाला देता है, दुनिया की सीमाएं सख़्त हो जाती हैं। ट्रैवल बैन कोई नया फैसला नहीं, बल्कि अमेरिका की वही पुरानी नीति है, जिसमें राष्ट्रीय सुरक्षा, घरेलू राजनीति और “अमेरिका फर्स्ट” सोच एक-दूसरे में घुली दिखाई देती हैं। सवाल सिर्फ यह नहीं कि किसे रोका गया, बल्कि यह है कि अमेरिका बार-बार ऐसे फैसलों को अपनी पहचान क्यों बनाता जा रहा है।

सीमाएं, सुरक्षा और सत्ता-Immigration बनाम राष्ट्रवाद

अमेरिका ने राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए 39 देशों के नागरिकों पर नया यात्रा प्रतिबंध (US Travel Ban 2026) लागू कर दिया है। यह प्रतिबंध 1 जनवरी 2026 से प्रभावी हो चुका है। व्हाइट हाउस की ओर से 16 दिसंबर 2025 को जारी Proclamation 10998 के तहत यह फैसला लिया गया, जिसमें 20 देशों पर पूर्ण और 20 देशों पर आंशिक यात्रा प्रतिबंध लगाया गया है। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि यह कदम उन विदेशी नागरिकों के प्रवेश को रोकने के लिए आवश्यक है, जिनके बारे में अमेरिका के पास जोखिम का आकलन करने के लिए पर्याप्त जानकारी उपलब्ध नहीं है।

क्या है नया अमेरिकी ट्रैवल बैन?

अमेरिकी होमलैंड सिक्योरिटी सचिव Kristi Noem ने 4 दिसंबर 2025 को घोषणा की थी कि ट्रंप प्रशासन  यात्रा प्रतिबंध के दायरे को बढ़ाने जा रहा है। इसके तहत लगभग 40 देशों से आने वाले लोगों के साथ-साथ कुछ मामलों में अमेरिकी नागरिकों के करीबी परिजनों पर भी सख्ती की गई है। यह नीति 2017 में लागू पुराने ट्रैवल बैन (प्रोक्लेमेशन 10949) का विस्तारित रूप मानी जा रही है।

पूर्ण यात्रा प्रतिबंध वाले देश (Full Ban Countries)

इन देशों के नागरिकों पर इमिग्रेंट और सभी प्रकार के नॉन-इमिग्रेंट वीजा के तहत अमेरिका में प्रवेश पूरी तरह से निलंबित कर दिया गया है। पूर्ण प्रतिबंध सूची (Alphabetical Order):
1.अफगानिस्तान
2.बुर्किना फासो (नया जोड़ा गया)
3.म्यांमार (बर्मा)
4.चाड
5.रिपब्लिक ऑफ द कॉन्गो
6.इक्वेटोरियल गिनी
7.इरिट्रिया
8.हैती
9.ईरान
10.लीबिया
11.लाओस (आंशिक से पूर्ण में स्थानांतरित)
12.माली (नया)
13.नाइजर (नया)
14.फिलिस्तीनी अथॉरिटी द्वारा जारी ट्रैवल डॉक्यूमेंट धारक (नया)
15.सिएरा लियोन (आंशिक से पूर्ण में स्थानांतरित)
16.सोमालिया
17.साउथ सूडान (नया)
18.सूडान
19.सीरिया (नया)
20.यमन
कुल 19 देशों के नागरिकों और फिलिस्तीनी अथॉरिटी के ट्रैवल डॉक्यूमेंट धारकों पर पूर्ण प्रतिबंध लागू है।

आंशिक यात्रा प्रतिबंध वाले देश (Partial Ban Countries)

इन देशों के नागरिकों के लिए इमिग्रेंट वीजा और B-1, B-2, B-1/B-2, F, M और J वीजा श्रेणियों में अमेरिका में प्रवेश पर रोक लगाई गई है। आंशिक प्रतिबंध सूची:
1.अंगोला (नया)
2.एंटीगुआ और बारबुडा (नया)
3.बेनिन (नया)
4.बुरुंडी
5.क्यूबा
6.कोट डी’आइवर (नया)
7.डोमिनिका (नया)
8.गैबॉन (नया)
9.द गाम्बिया (नया)
10.मलावी (नया)
11.मॉरिटानिया (नया)
12.नाइजीरिया (नया)
13.सेनेगल (नया)
14.तंजानिया (नया)
15.टोगो
16.टोंगा (नया)
17.तुर्कमेनिस्तान*
18.वेनेजुएला
19.ज़ाम्बिया (नया)
20.ज़िम्बाब्वे (नया)
विशेष अपवाद- तुर्कमेनिस्तान के मामले में प्रतिबंध केवल इमिग्रेंट वीजा पर लागू होगा। नॉन-इमिग्रेंट वीजा श्रेणियां इससे प्रभावित नहीं होंगी।

वीजा वैधता और भारत पर असर

आंशिक प्रतिबंध वाले देशों के लिए अमेरिकी दूतावासों और काउंसलर अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अन्य नॉन-इमिग्रेंट वीजा की वैधता अवधि को कानून द्वारा अनुमत अधिकतम सीमा तक सीमित करें। भारत इस सूची में शामिल नहीं है, लेकिन अमेरिका में पढ़ाई, पर्यटन और व्यवसाय के लिए जाने वाले छात्रों और यात्रियों के लिए यह फैसला वैश्विक स्तर पर वीजा नीति को और सख्त बनाने का संकेत देता है।

अमेरिका बार-बार सख़्त ट्रैवल और इमिग्रेशन फैसले क्यों लेता है?

अमेरिका द्वारा बार-बार ट्रैवल बैन, वीज़ा सख़्ती और इमिग्रेशन नियमों में बदलाव कोई अचानक लिया गया निर्णय नहीं होता, बल्कि इसके पीछे सुरक्षा चिंताएं, घरेलू राजनीति और वैचारिक सोच, तीनों गहराई से जुड़ी होती हैं। अमेरिका की इमिग्रेशन नीति अक्सर उसकी आंतरिक राजनीति और वैश्विक रणनीति का प्रतिबिंब बन जाती है।

राष्ट्रीय सुरक्षा का तर्क (National Security Argument)

अमेरिका अपने अधिकांश सख़्त यात्रा और इमिग्रेशन फैसलों को राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़कर पेश करता है। सरकार का तर्क रहता है कि कुछ देशों से आने वाले नागरिकों के बारे में पुख्ता जानकारी उपलब्ध नहीं होती- जैसे जन्म प्रमाण पत्र, आपराधिक रिकॉर्ड, बायोमेट्रिक डेटा या यात्रा इतिहास। कई देशों में प्रशासनिक व्यवस्था कमज़ोर होने के कारण अमेरिका को यह आशंका रहती है कि गलत पहचान वाले या कट्टरपंथ से जुड़े लोग उसके सिस्टम में प्रवेश कर सकते हैं। इसी आशंका के आधार पर “पहले रोकथाम, बाद में समीक्षा” की नीति अपनाई जाती है।

घरेलू राजनीति और चुनावी समीकरण

अमेरिका में इमिग्रेशन केवल प्रशासनिक मुद्दा नहीं बल्कि गहराई से जुड़ा राजनीतिक विषय है। चुनावों के दौरान यह मुद्दा मतदाताओं को सीधे प्रभावित करता है, खासकर उन वर्गों को जो रोज़गार, सुरक्षा और सांस्कृतिक पहचान को लेकर चिंतित रहते हैं। सख़्त फैसले लेकर सरकार यह संदेश देती है कि वह “सीमाओं की रक्षा” कर रही है। यही कारण है कि राष्ट्रपति चुनाव या कांग्रेस चुनाव से पहले ट्रैवल बैन जैसे फैसले अधिक देखने को मिलते हैं।

अवैध इमिग्रेशन और शरणार्थी संकट

अमेरिका लंबे समय से अवैध प्रवास की समस्या से जूझ रहा है। हर साल लाखों लोग टूरिस्ट वीज़ा पर जाकर अवैध रूप से रहने लगते हैं या शरण मांगते हैं। इससे प्रशासन पर आर्थिक, सामाजिक और कानूनी दबाव बढ़ता है। ट्रैवल बैन जैसे फैसले यह स्पष्ट संदेश देते हैं कि अमेरिका अब इमिग्रेशन को लेकर नरमी नहीं बरतेगा। सरकार मानती है कि सख़्ती से अवैध प्रवास की गति धीमी की जा सकती है।

विदेश नीति और अंतरराष्ट्रीय दबाव का हथियार

कई बार ट्रैवल बैन का उद्देश्य केवल सुरक्षा नहीं बल्कि कूटनीतिक दबाव बनाना भी होता है। जिन देशों के साथ अमेरिका के संबंध तनावपूर्ण रहते हैं या जो आतंकवाद, मानवाधिकार उल्लंघन या अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन नहीं करते, उन्हें यात्रा प्रतिबंधों के ज़रिए संदेश दिया जाता है। यह प्रतिबंध अमेरिका की “हार्ड पावर” रणनीति का हिस्सा होता है, जिससे वह बिना युद्ध या आर्थिक प्रतिबंध के दबाव बना सके।

America First” की विचारधारा

खासकर ट्रंप प्रशासन के दौर में “America First” नीति ने इमिग्रेशन को पूरी तरह प्रभावित किया। इस सोच के अनुसार, अमेरिका के संसाधन, जैसे नौकरियां, शिक्षा और सामाजिक सुविधाएं पहले अमेरिकी नागरिकों के लिए होनी चाहिए। विदेशी नागरिकों की संख्या कम करने को घरेलू समृद्धि से जोड़ा गया। इसी विचारधारा के कारण ट्रैवल बैन, दीवार निर्माण और वीज़ा सख़्ती जैसे फैसले सामने आए।

प्रशासन बदलने पर नीतियों में बदलाव

अमेरिका में सत्ता परिवर्तन के साथ नीतियां भी बदलती रहती हैं। एक प्रशासन उदार इमिग्रेशन नीति अपनाता है, तो अगला उसे सुरक्षा के लिए खतरा बताकर सख़्त कर देता है। चूंकि इमिग्रेशन नीति काफी हद तक राष्ट्रपति के कार्यकारी आदेशों पर आधारित होती है, इसलिए ट्रैवल बैन जैसे फैसले स्थायी नहीं होते। यही कारण है कि अमेरिका की इमिग्रेशन नीति बार-बार बदलती हुई दिखाई देती है।

राष्ट्रपति को मिले कानूनी अधिकार

अमेरिकी कानून राष्ट्रपति को यह विशेष अधिकार देता है कि वह राष्ट्रीय सुरक्षा के आधार पर किसी भी देश या वर्ग के लोगों के प्रवेश पर रोक लगा सके। इस कानूनी शक्ति के कारण राष्ट्रपति को कांग्रेस की तत्काल मंज़ूरी की आवश्यकता नहीं होती। जब भी कोई प्रशासन यह महसूस करता है कि सुरक्षा या व्यवस्था खतरे में है, वह सीधे कार्यकारी आदेश के ज़रिए ट्रैवल बैन लागू कर सकता है।

सुरक्षा राजनीति कूटनीति का मामला

कुल मिलाकर, अमेरिका का बार-बार ऐसे फैसले लेना केवल इमिग्रेशन से जुड़ा मुद्दा नहीं है, बल्कि यह सुरक्षा, राजनीति, कूटनीति और घरेलू जनमत का संयुक्त परिणाम है। ट्रैवल बैन जैसे फैसले अमेरिका की बदलती प्राथमिकताओं और वैश्विक भूमिका को भी दर्शाते हैं। अमेरिका का यह नया ट्रैवल बैन 2026 वैश्विक राजनीति और अंतरराष्ट्रीय यात्रा पर गहरा प्रभाव डाल सकता है। जहां एक ओर इसे राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़ा जा रहा है, वहीं दूसरी ओर मानवाधिकार संगठनों और प्रभावित देशों में इस फैसले को लेकर असंतोष भी देखा जा रहा है।
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