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January 1, 2026

देश की पहली स्लम-फ्री मेगासिटी बनने की ओर अग्रसर सूरत! 

The CSR Journal Magazine

 

सूरत बनेगा देश का पहला स्लम-फ्री मेगासिटी! 70–80 लाख की आबादी के साथ नया रिकॉर्ड! मंत्री जीतू वाघाणी बोले- चंडीगढ़ के बाद अब सूरत बनाएगा नया इतिहास !

70–80 लाख की आबादी के साथ नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाने की तैयारी में सूरत

गुजरात सरकार के मंत्री जीतू वाघाणी ने बुधवार को कहा कि सूरत शहर तेज़ी से देश का पहला ऐसा शहर बनने की ओर बढ़ रहा है, जहां 70 से 80 लाख की आबादी के बावजूद कोई झुग्गी-झोपड़ी नहीं होगी। यदि यह लक्ष्य हासिल होता है तो सूरत न केवल गुजरात बल्कि पूरे देश के शहरी विकास इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ेगा। अभी तक चंडीगढ़ को देश का पहला स्लम-फ्री शहर माना जाता है, लेकिन उसकी आबादी लगभग 10 लाख है। इस तुलना में सूरत की उपलब्धि कहीं अधिक बड़ी और चुनौतीपूर्ण मानी जा रही है। मंत्री जीतू वाघाणी ने कहा कि यह सफलता केवल सरकारी योजनाओं का परिणाम नहीं है, बल्कि इसमें स्थानीय प्रशासन, नगर निगम, उद्योग जगत और नागरिकों की सामूहिक भागीदारी शामिल है। सूरत का यह मॉडल आने वाले समय में देश के अन्य बड़े शहरों के लिए एक रोल मॉडल बन सकता है।

शहरी विकास की नई मिसाल

सूरत देश के सबसे तेज़ी से विकसित होने वाले शहरों में गिना जाता है। यह शहर हीरा उद्योग, कपड़ा कारोबार, बंदरगाहों की निकटता और रोजगार के बड़े अवसरों के कारण देश के विभिन्न राज्यों से आए लाखों प्रवासियों का घर बना है। आमतौर पर इतनी बड़ी आबादी वाले शहरों में झुग्गियों की संख्या बढ़ती जाती है, लेकिन सूरत ने इस धारणा को तोड़ते हुए नियोजित विकास और समावेशी आवास नीति के जरिए एक अलग पहचान बनाई है। जीतू वाघाणी के अनुसार, “जहां देश के कई महानगर झुग्गी पुनर्विकास की चुनौती से जूझ रहे हैं, वहीं सूरत पहले ही उस स्तर पर पहुंच चुका है जहां झुग्गियों को स्थायी आवास में बदला जा चुका है।”

कैसे संभव हुआ स्लम-फ्री सूरत का सपना

सूरत को स्लम-फ्री बनाने के पीछे कई योजनाएं और प्रशासनिक फैसले रहे हैं-
1. झुग्गी पुनर्वास योजनाएं– नगर निगम ने झुग्गियों में रहने वाले परिवारों की पहचान कर उन्हें पक्के मकान उपलब्ध कराए। इन आवासों में पानी, बिजली, शौचालय और सड़क जैसी मूलभूत सुविधाएं सुनिश्चित की गईं।
2. प्रधानमंत्री आवास योजना का प्रभावी क्रियान्वयन– केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) को सूरत में तेजी से लागू किया गया। हजारों परिवारों को किफायती दरों पर घर उपलब्ध कराए गए।
3. नगर निगम की सक्रिय भूमिका– सूरत नगर निगम को देश के सबसे सक्षम और आर्थिक रूप से मजबूत नगर निगमों में गिना जाता है। स्वच्छता, जल प्रबंधन और आवासीय परियोजनाओं में इसकी भूमिका निर्णायक रही।
4. उद्योगों और प्रवासियों के लिए नियोजित आवास– कपड़ा और हीरा उद्योग से जुड़े मजदूरों के लिए  डॉरमेट्री और किफायती हाउसिंग प्रोजेक्ट शुरू किए गए, जिससे अनधिकृत बस्तियों की आवश्यकता कम हुई।
5. डिजिटल सर्वे और डेटा आधारित योजना– झुग्गियों का डिजिटल सर्वे कर वास्तविक जरूरतमंदों को चिन्हित किया गया, जिससे योजनाओं का लाभ सही लोगों तक पहुंचा।

चंडीगढ़ से तुलना: क्यों खास है सूरत

चंडीगढ़ को लंबे समय से देश का पहला स्लम-फ्री शहर माना जाता रहा है। लेकिन उसकी आबादी करीब 10 लाख है और वह एक पूर्व नियोजित शहर है। इसके विपरीत सूरत-
• एक तेज़ी से बढ़ता औद्योगिक शहर है,
• जहां हर साल लाखों प्रवासी आते हैं,
• और जिसकी आबादी 70–80 लाख के बीच है।
इतनी बड़ी जनसंख्या वाले शहर को स्लम-फ्री बनाना प्रशासनिक दृष्टि से कहीं अधिक कठिन माना जाता है। यही वजह है कि विशेषज्ञ सूरत की उपलब्धि को ऐतिहासिक मान रहे हैं।

स्वच्छता और बुनियादी ढांचे में सूरत की पहचान

सूरत पहले ही स्वच्छता सर्वेक्षणों में देश के शीर्ष शहरों में शामिल रहा है। साफ-सफाई, ठोस कचरा प्रबंधन और सीवेज ट्रीटमेंट में शहर की व्यवस्थाएं मजबूत मानी जाती हैं। झुग्गी मुक्त होने से-
• शहर की स्वच्छता रैंकिंग और बेहतर होगी,
• स्वास्थ्य सेवाओं पर दबाव कम होगा,
• अपराध और असुरक्षा की आशंका घटेगी।

आम लोगों के जीवन में बदलाव

झुग्गियों में रहने वाले परिवारों के लिए पक्का मकान केवल छत नहीं, बल्कि सम्मानजनक जीवन का प्रतीक है। स्थायी आवास मिलने से-
• बच्चों की शिक्षा बेहतर हुई,
• महिलाओं को सुरक्षा और सुविधा मिली,
• स्वास्थ्य सेवाओं तक आसान पहुंच बनी।
कई पुनर्वास कॉलोनियों में स्कूल, आंगनवाड़ी और सामुदायिक केंद्र भी बनाए गए हैं।

विपक्ष और विशेषज्ञों की राय

जहां सरकार इस उपलब्धि को अपनी बड़ी सफलता बता रही है, वहीं कुछ सामाजिक संगठनों का कहना है कि स्लम-फ्री का मतलब केवल झुग्गियां हटाना नहीं, बल्कि लोगों को स्थायी रोजगार और सामाजिक सुरक्षा देना भी जरूरी है। शहरी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पुनर्वासित परिवारों को रोजगार और परिवहन की सुविधाएं मिलती रहीं, तो यह मॉडल लंबे समय तक सफल रहेगा।

अन्य शहरों के लिए मॉडल बनेगा सूरत

दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और बेंगलुरु जैसे महानगर आज भी झुग्गी समस्या से जूझ रहे हैं। ऐसे में सूरत का अनुभव-
• नीति निर्माण में मददगार होगा,
• शहरी आवास योजनाओं को तेज़ी से लागू करने की प्रेरणा देगा,
• प्रवासी मजदूरों के लिए किफायती आवास की दिशा दिखाएगा।
जीतू वाघाणी ने कहा कि गुजरात सरकार सूरत मॉडल को राज्य के अन्य शहरों और देश के विभिन्न हिस्सों में साझा करने के लिए तैयार है।

भविष्य की चुनौतियां

हालांकि सूरत स्लम-फ्री बनने की ओर अग्रसर है, लेकिन भविष्य में चुनौतियां बनी रहेंगी-
• बढ़ती आबादी,
• निरंतर प्रवासन,
• किफायती आवास की मांग,
• शहरी संसाधनों पर दबाव।
विशेषज्ञों का कहना है कि निरंतर निगरानी और नई आवासीय परियोजनाओं के बिना यह स्थिति बनाए रखना कठिन हो सकता है।
सूरत का स्लम-फ्री बनने की ओर बढ़ना केवल एक शहर की सफलता नहीं, बल्कि भारत के शहरी विकास की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है। यदि 70–80 लाख की आबादी वाला शहर झुग्गी मुक्त हो सकता है, तो यह साबित करता है कि सही नीति, मजबूत प्रशासन और जनभागीदारी से असंभव दिखने वाले लक्ष्य भी हासिल किए जा सकते हैं। आने वाले समय में यदि सूरत आधिकारिक रूप से इस उपलब्धि को हासिल करता है, तो यह शहर देश के लिए एक नई शहरी पहचान बनकर उभरेगा।
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