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January 8, 2026

सुप्रीम कोर्ट का आरक्षण पर बड़ा फैसला: जनरल कैटेगरी कोई कोटा नहीं, मेरिट सबके लिए समान !

The CSR Journal Magazine

 

आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट ने दिया बड़ा फैसला ! SC-ST, OBC और EWS उम्मीदवार यदि बिना रियायत सामान्य कट-ऑफ पार करें तो उन्हें ओपन कैटेगरी में ही माना जाएगा! इस फैसले का JEE-NEET से लेकर सरकारी नौकरियों और राज्य भर्तियों पर पड़ेगा सीधा असर !

जनरल कैटेगरी कोई कोटा नहीं, मेरिट सबके लिए एक समान

सुप्रीम कोर्ट ने आरक्षण व्यवस्था को लेकर एक बार फिर बड़ा और दूरगामी असर डालने वाला फैसला सुनाया है। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि ‘जनरल’ या ‘ओपन कैटेगरी’ कोई अलग कोटा नहीं है, बल्कि यह सभी वर्गों के उम्मीदवारों के लिए खुली प्रतियोगिता का मंच है। यदि कोई अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) या आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) का उम्मीदवार बिना किसी आरक्षण लाभ के सामान्य कट-ऑफ के आधार पर चयनित होता है, तो उसे जनरल श्रेणी में ही माना जाएगा। यह फैसला न केवल सरकारी नौकरियों, बल्कि JEE, NEET, मेडिकल-इंजीनियरिंग एडमिशन, राज्य भर्तियों और भविष्य की आरक्षण नीति पर भी गहरा प्रभाव डालने वाला है। विशेषज्ञ इसे मेरिट और सामाजिक न्याय के बीच संतुलन स्थापित करने वाला निर्णय मान रहे हैं।

क्या है सुप्रीम कोर्ट का नया फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अक्सर “जनरल कैटेगरी” को गलत तरीके से केवल सामान्य वर्ग से जोड़कर देखा जाता है, जबकि संविधान में कहीं भी यह नहीं कहा गया कि ओपन कैटेगरी केवल किसी एक सामाजिक वर्ग के लिए आरक्षित है। अदालत के अनुसार- “जो उम्मीदवार सामान्य मानकों पर चयनित होता है, उसे आरक्षित उम्मीदवार मानना न केवल गलत है, बल्कि यह संविधान में निहित समानता के सिद्धांत के भी खिलाफ है।” कोर्ट ने साफ किया कि आरक्षण का उद्देश्य पिछड़े वर्गों को मुख्यधारा में लाना है, न कि उन्हें हमेशा अलग खांचे में बंद रखना।

फैसले की पृष्ठभूमि

यह मामला तब उठा जब विभिन्न राज्यों और केंद्रीय भर्तियों में यह देखा गया कि कई बार आरक्षित वर्ग के उम्मीदवार सामान्य मेरिट से चयनित होने के बावजूद उन्हें आरक्षित कोटे में ही गिना जाता है। इससे एक ओर आरक्षित सीटों पर दबाव बढ़ता था, तो दूसरी ओर मेरिट का सही मूल्यांकन नहीं हो पाता था। सुप्रीम कोर्ट ने इस प्रचलन को अनुचित बताते हुए इसे खत्म करने का रास्ता साफ किया।

शीर्ष अदालत की बेंच ने स्थापित किया नया सिद्धांत

सुप्रीम कोर्ट का यह ऐतिहासिक फैसला 4 जनवरी 2026 को लिया गया था। शीर्ष अदालत की बेंच ने उसी दिन अपना आदेश दिया जिसमें स्पष्ट किया गया कि यदि कोई आरक्षित वर्ग (SC, ST, OBC, EWS) का उम्मीदवार बिना किसी रियायत/छूट के सामान्य (जनरल) कट-ऑफ को पार करता है, तो उसे ओपन/जनरल कैटेगरी में शामिल माना जाएगा। इस फैसले ने ‘जनरल कैटेगरी कोई अलग कोटा नहीं है’- यह सिद्धांत स्थापित कर दिया है।

क्या था मामला !

यह विवाद राजस्थान हाई कोर्ट की भर्ती पद्धति से जुड़ा था, जिसमें कुछ आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को सामान्य (जनरल) सूची में शामिल नहीं किया जा रहा था, भले ही उनके अंक सामान्य कट-ऑफ से अधिक थे। उम्मीदवारों ने उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी, और सुप्रीम कोर्ट (संयुक्‍त बेंच) ने इस हाइ कोर्ट फैसले को बरकरार रखा तथा इसे संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता) और अनुच्छेद 16 (सरकारी सेवाओं में समान अवसर) के अनुरूप बताया।

JEE और NEET- ओपन सीटों की तस्वीर बदलेगी

JEE (इंजीनियरिंग) और NEET (मेडिकल) जैसी परीक्षाओं में अब तक यह बहस चलती रही है कि जनरल सीटों पर कौन बैठ सकता है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद स्थिति पूरी तरह साफ हो गई है। अब यदि कोई SC/ST/OBC/EWS छात्र सामान्य कट-ऑफ से अधिक अंक लाता है और किसी तरह की रियायत नहीं लेता, तो वह ओपन कैटेगरी सीट पर चयनित होगा।

टॉप कॉलेजों में पारदर्शिता

IIT, NIT, AIIMS, मेडिकल कॉलेजों में टॉप रैंक लाने वाले आरक्षित वर्ग के छात्र अब आरक्षित सीट नहीं घेरेंगे जिससे वास्तविक रूप से जरूरतमंद छात्रों को आरक्षण का लाभ मिलेगा। शिक्षाविदों के अनुसार, इससे मेरिट लिस्ट अधिक पारदर्शी होगी और आरक्षण का उद्देश्य अधिक प्रभावी ढंग से पूरा होगा।

UPSC, SSC, रेलवे और बैंक भर्ती जैसी सरकारी नौकरियों में बदलाव

सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला केंद्र और राज्यों की सभी भर्तियों पर लागू होगा, जिनमें शामिल हैं-
• UPSC
• SSC
• रेलवे
• बैंक
• शिक्षक भर्ती
• पुलिस और प्रशासनिक सेवाएं!
अब जो उम्मीदवार सामान्य कट-ऑफ पार करेगा, उसे उसकी जाति के आधार पर नहीं, बल्कि उसकी योग्यता के आधार पर जनरल श्रेणी में रखा जाएगा।

जनरल वर्ग में बढ़ेगी प्रतिस्पर्धा

इस फैसले के बाद जनरल श्रेणी में प्रतिस्पर्धा निश्चित रूप से बढ़ेगी, क्योंकि अब हर वर्ग का योग्य उम्मीदवार एक ही मंच पर मुकाबला करेगा। हालांकि विशेषज्ञ मानते हैं कि यह बदलाव न्यायसंगत और संवैधानिक है, क्योंकि इससे चयन प्रक्रिया अधिक निष्पक्ष होगी।

राज्य सरकारों के लिए नई चुनौती, सेवा नियमों में संशोधन जरूरी

कई राज्यों के सेवा नियम अब भी पुराने हैं, जिनमें आरक्षित वर्ग का उम्मीदवार ओपन मेरिट से चयनित होने पर भी आरक्षित कोटे में गिना जाता है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद राज्यों को अपने भर्ती नियमों में बदलावकरना होगा, अन्यथा उनके निर्णय अदालत में टिक नहीं पाएंगे। भले ही भर्ती राज्य का विषय हो, लेकिन सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला संविधान की व्याख्या है, जिसे सभी राज्यों को मानना होगा।

50 प्रतिशत आरक्षण सीमा पर फिर चर्चा

यह फैसला एक बार फिर 50 प्रतिशत आरक्षण सीमा को चर्चा में ले आया है। सुप्रीम कोर्ट पहले भी कह चुका है कि सामान्य परिस्थितियों में आरक्षण 50 प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए। विशेषज्ञों का मानना है कि जब अधिक योग्य उम्मीदवार ओपन कैटेगरी में चले जाएंगे तो आरक्षित सीटों का दबाव कम होगा और 50 प्रतिशत सीमा बनाए रखना आसान होगा।

क्रीमी लेयर और उप-वर्गीकरण पर असर

इस फैसले के बाद भविष्य में अदालत के सामने ये मुद्दे और मजबूती से आ सकते हैं-
• OBC में क्रीमी लेयर की सख्ती,
• SC/ST में उप-वर्गीकरण,
• EWS आरक्षण की समीक्षा!
कानूनी जानकार मानते हैं कि सुप्रीम कोर्ट अब आरक्षण की गुणवत्ता और उद्देश्य पर अधिक ध्यान देगा, न कि केवल प्रतिशत पर।

आरक्षण स्थायी सुविधा नहीं

सुप्रीम कोर्ट ने अप्रत्यक्ष रूप से यह संदेश दिया है कि आरक्षण कोई स्थायी अधिकार नहीं, बल्कि एक  सामाजिक सुधार का माध्यम है। जो वर्ग मुख्यधारा में आ जाए, उसे समान प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार किया जाना चाहिए। यह फैसला समाज में यह भावना मजबूत करता है कि योग्यता और अवसर एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं

फैसले के बाद राजनीतिक हलकों में भी हलचल तेज है। कुछ दल इसे मेरिट का सम्मान बता रहे हैं, जबकि कुछ का कहना है कि इससे आरक्षण की भावना कमजोर हो सकती है। हालांकि सरकार की ओर से संकेत दिए गए हैं कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार नियमों में आवश्यक बदलाव किए जाएंगे। संवैधानिक विशेषज्ञों के अनुसार यह फैसला आरक्षण को खत्म नहीं करता, बल्कि उसे अधिक तार्किक और प्रभावीबनाता है। शिक्षा विशेषज्ञ मानते हैं कि इससे प्रतिभाशाली छात्रों को उनकी जाति से ऊपर उठकर पहचान मिलेगी।
सुप्रीम कोर्ट का यह नया फैसला भारतीय आरक्षण व्यवस्था में एक निर्णायक मोड़ माना जा रहा है। अदालत ने साफ कर दिया है कि जनरल कैटेगरी कोई कोटा नहीं, मेरिट सभी के लिए समान है, और आरक्षण का उद्देश्य समाज को आगे बढ़ाना है, न कि बांटना। JEE-NEET से लेकर सरकारी नौकरियों तक, यह निर्णय आने वाले वर्षों में शिक्षा, रोजगार और सामाजिक न्याय की दिशा तय करेगा। यह फैसला न केवल कानूनी, बल्कि सामाजिक दृष्टि से भी ऐतिहासिक माना जा रहा है।
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