सुपर El Nino का खौफ: मार्च तक भारत में 55,000 मौतों का अलर्ट

The CSR Journal Magazine
भारत में गर्मी का मौसम अभी दूर है, लेकिन एक नए जलवायु अनुमान ने चिंता बढ़ा दी है। सुपर अल-नीनो को लेकर जारी एक क्लाइमेट ट्रैकर के मुताबिक, अक्टूबर से मार्च के बीच भारत में गर्मी से जुड़ी करीब 55,000 अतिरिक्त मौतें हो सकती हैं। इनमें से ज्यादातर मौतें मार्च में हो सकती हैं। यह आंकड़ा किसी सरकारी विभाग का आधिकारिक डेथ अलर्ट नहीं है, बल्कि जलवायु और स्वास्थ्य से जुड़े अनुमान पर आधारित है।

अल-नीनो का प्रभाव

अल-नीनो समुद्र के तापमान से लेकर हवाओं और बारिश के पैटर्न तक को प्रभावित करता है। इसके बढ़ने से कहीं सूखे का खतरा बढ़ सकता है तो कहीं बाढ़ और भीषण गर्मी लोगों की मुश्किलें बढ़ा सकती है। NDTV की रिपोर्ट के अनुसार, ‘अल-नीनो हीट मॉर्टेलिटी ट्रैकर’ ने अगले छह महीनों में दुनिया भर में गर्मी से जुड़ी 3.73 लाख से ज्यादा अतिरिक्त मौतों का अनुमान लगाया है। भारत में संभावित मौतों की संख्या सबसे ज्यादा हो सकती है।

भारत में सबसे ज्यादा मौतों का अनुमान क्यों?

क्लाइमेट ट्रैकर के मुताबिक, भारत में गर्मी से जुड़ी मौतों का आंकड़ा नाइजीरिया के करीब 56,000 मौतों के अनुमान के बाद आता है। दक्षिण-पूर्व एशिया में भी खतरा बना हुआ है। इंडोनेशिया में करीब 29,000 और ब्राजील में 19,000 मौतों का अनुमान लगाया गया है। ये आंकड़े ट्रैकर के अनुमान हैं और इन्हें निश्चित मौतों की संख्या नहीं माना जाना चाहिए।

अल-नीनो क्या है?

अल-नीनो एक प्राकृतिक जलवायु घटना है, जिसमें भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्से की सतह का पानी सामान्य से ज्यादा गर्म हो जाता है। इससे हवाओं और वायुमंडलीय दबाव में बदलाव आता है। बारिश का पैटर्न भी बदल सकता है। अल-नीनो आमतौर पर हर दो से सात साल में विकसित होता है और करीब नौ से 12 महीने तक बना रह सकता है।

क्लाइमेट ट्रैकर की चेतावनी

क्लाइमेट इम्पैक्ट लैब के सह-संस्थापक माइकल ग्रीनस्टोन ने कहा, ‘भीषण गर्मी के जानलेवा असर का पहले से अनुमान लगा पाना एक बड़ी प्रगति है। इसका मतलब है कि हम उन जगहों की पहचान कर सकते हैं जहां लोगों को सबसे ज्यादा खतरा है।’ यह ट्रैकर उस सुपर अल-नीनो के बारे में जानकारी देता है जिसका सामना हम अभी कर रहे हैं।

विश्व मौसम संगठन की सलाह

विश्व मौसम संगठन (WMO) ने चेतावनी दी है कि अल-नीनो दिसंबर में अपने चरम पर पहुंचने से पहले और मजबूत हो सकता है। संगठन ने कहा, ‘अल-नीनो से दुनिया के बड़े हिस्से में औसत से ज्यादा तापमान रहने और बारिश के पैटर्न में बदलाव होने की संभावना है। इससे सूखे और बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है।’

मुंबई में प्रदूषण का खतरा

अल-नीनो का असर सिर्फ तापमान तक सीमित नहीं रह सकता। मौसम विशेषज्ञ डॉ. गुफरान बेग ने मुंबई में वायु प्रदूषण को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि मुंबई जैसे शहर में हवाओं का बहाव धीमा हो सकता है, जिससे प्रदूषक हवा में ज्यादा देर तक ठहर सकते हैं। हालांकि प्रदूषण का वास्तविक स्तर मौसम और स्थानीय परिस्थितियों पर भी निर्भर करेगा।

गर्मी से जुड़े जोखिमों पर ध्यान दें

गर्मी से जुड़े जोखिमों को हल्के में नहीं लेना चाहिए। खासकर बुजुर्गों, बच्चों और पहले से बीमार लोगों को तेज गर्मी के दौरान विशेष सावधानी की जरूरत होती है। ट्रैकर का अनुमान आने वाले महीनों के लिए तैयारी का संकेत है। यह निश्चित मौतों की भविष्यवाणी नहीं है।

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