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March 31, 2025

महाराष्ट्र महायुती में छिड़ा सत्ता पर संग्राम,पड़ सकती है दरार

महाराष्ट्र में सत्ताधारी महायुती में सत्ता को लेकर संग्राम छिड़ चुका है। महायुती सरकार की अंदरूनी खींचतान अब खुलकर सामने आने लगी है। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SDMA) के पुनर्गठन में सीएम देवेन्द्र फड़नवीस ने डेप्यूटी सीएम एकनाथ शिंदे को बाहर का रास्ता दिखा दिया है, जिसके चलते महायुती में दरार की अटकलों पर सच की मोहर लग गई है।

महायुती की खींचतान खुलकर आई सामने

महाराष्ट्र की सत्ता में साझेदारी करने वाली महायुती सरकार की आपसी खींचतान अब सामने आने लगी है। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SDMA) के पुनर्गठन में एकनाथ शिंदे को बाहर रखकर सीएम फड़नवीस ने अपनी मंशा साफ जाहिर कर दी है। उनके इस कदम ने न केवल राजनीतिक हलकों में खलबली मचा दी है, बल्कि ये संकेत भी दे दिया है कि बीजेपी और शिंदे गुट में कुछ भी ठीक नहीं चल रहा है। शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में इस बात की भी नाराजगी है कि निजी सहायकों (PA) और विशेष कार्य अधिकारी (OSD) नियुक्ति सहित अन्य सिफारिशें मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) में अटकी पड़ी हैं। MAHARASHTRA MAHAYUTI NEWS

बढ़ रहा शिंदे-फड़नवीस में टकराव

सीएम फड़नवीस और डेप्यूटी सीएम शिंदे के बीच टकराव बढ़ रहा है। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SDMA) राज्य में आपदा प्रबंधन की सबसे प्रमुख संस्था है। मुख्यमंत्री इसके अध्यक्ष होते हैं और अन्य विभागों के मंत्री इसमे शामिल होते हैं। इस बार डेप्यूटी सीएम और एनसीपी नेता अजीत पवार को तो इसमे जगह दी गई है, लेकिन शिंदे को इससे दूर रखा गया है। ये फैसला इसलिए भी चौंकानेवाला है, क्यूंकि शिंदे के पास शहरी विकास विभाग यही, जो प्राकृतिक आपदाओं से निपटने में अहम भूमिका निभाता है। इस फैसले ने महायुती में टकराव की अटकलों को और हवा दे दी है।

शिंदे गुट का आरोप, जानबूझ कर किया जा रहा साइड्लाइन

शिंदे गुट का आरोप है कि जानबूझकर शिंदे को साइड्लाइन किया जा रहा है। हाल ही में कई शिवसेना नेताओं ने शिकायत की थी कि उनके कार्यालय में PA और OSD की नियुक्ति में जानबूझकर देरी की जा रही है, जिससे मंत्री प्रशासनिक फैसले लेने में खुद को असहाय महसूस कर रहे हैं। रेपोर्ट्स की माने तो शिंदे गुट के कई बड़े चेहरे, उदय सामंत, शंभूराज देसाई, संजय राठोड़ और गुलाबराव पाटील इस देरी से प्रभावित हैं। ऐसा माना जा रहा है कि बीजेपी इन नियुक्तियों पर पूरा नियंत्रण चाहती है ताकि शिवसेना को ये संदेश मिल जाए कि असली ताकत कहाँ है।

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