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February 25, 2026

Atal Institute of Medical Super Speciality में बड़ी लापरवाही: मुंह में मानव टांग दबाकर घूमता मिला कुत्ता! 

The CSR Journal Magazine

अस्पताल परिसर में कुत्ता मुंह में मानव टांग दबाकर घूमता दिखा, जांच के आदेश

हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला स्थित चमियाणा के Atal Institute of Medical Super  Speciality (AIMSS) में लापरवाही का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। अस्पताल परिसर के बाहर एक आवारा कुत्ता मानव की कटी हुई टांग को अपने मुंह में दबाकर घूमता हुआ दिखाई दिया। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया, जिसके बाद अस्पताल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया। मामले को गंभीरता से लेते हुए अस्पताल प्रशासन ने जांच के आदेश दे दिए हैं तथा संबंधित कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।

क्या है पूरा मामला?

जानकारी के अनुसार, अस्पताल में कुछ दिन पहले एक मरीज की चिकित्सकीय कारणों से घुटने के ऊपर से टांग काटने (एबव-नी एम्प्यूटेशन) की सर्जरी की गई थी। ऑपरेशन के बाद मानव अंग को बायोमेडिकल वेस्ट के तहत निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार पैक कर अस्थायी भंडारण स्थल पर रखा गया था। बताया जा रहा है कि 21 फरवरी की रात बायोमेडिकल वेस्ट स्टोर रूम का दरवाजा ठीक से बंद नहीं किया गया। इसी लापरवाही का फायदा उठाकर एक आवारा कुत्ता अंदर घुस गया और पैक किया गया मानव अंग बाहर ले आया। अगले दिन सुबह अस्पताल परिसर के बाहर कुत्ता उस टांग को मुंह में दबाकर घूमता नजर आया। वहां मौजूद कुछ लोगों ने इस दृश्य को अपने मोबाइल फोन में रिकॉर्ड कर लिया।

वीडियो वायरल होने से मचा हड़कंप

घटना का वीडियो सामने आते ही सोशल मीडिया पर तेजी से फैल गया। वीडियो में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है कि कुत्ता अस्पताल के आसपास मानव टांग को लेकर घूम रहा है। यह दृश्य न केवल चौंकाने वाला था बल्कि अस्पताल की स्वच्छता और सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। वीडियो वायरल होने के बाद स्थानीय लोगों में आक्रोश फैल गया। कई लोगों ने इसे अस्पताल प्रशासन की घोर लापरवाही बताया और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की।

प्रशासन ने क्या कहा?

अस्पताल प्रशासन ने मामले को गंभीर मानते हुए तुरंत आंतरिक जांच शुरू कर दी है। अस्पताल के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, ड्यूटी पर तैनात सफाई कर्मचारियों और संबंधित सुपरवाइजर को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। उनसे पूछा गया है कि बायोमेडिकल वेस्ट के सुरक्षित भंडारण में लापरवाही क्यों बरती गई। अस्पताल प्रबंधन ने तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन भी किया है। इस समिति में नर्सिंग अधीक्षक, बायोमेडिकल वेस्ट प्रबंधन अधिकारी और प्रशासनिक प्रतिनिधि शामिल हैं। समिति को निर्धारित समय के भीतर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।

बायोमेडिकल वेस्ट नियमों पर सवाल

विशेषज्ञों के अनुसार, बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट नियमों के तहत मानव अंगों और अन्य चिकित्सीय अपशिष्ट को सुरक्षित, सीलबंद और प्रतिबंधित स्थान पर रखना अनिवार्य है। इसके अलावा, ऐसे कचरे को अधिक समय तक अस्पताल परिसर में नहीं रखा जाना चाहिए और निर्धारित एजेंसी द्वारा समय पर उसका निस्तारण किया जाना चाहिए। इस घटना ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या अस्पताल में बायोमेडिकल वेस्ट प्रबंधन के नियमों का सही तरीके से पालन हो रहा है या नहीं। यदि दरवाजा खुला छोड़ा गया था, तो यह गंभीर प्रशासनिक चूक मानी जाएगी।

स्थानीय लोगों में नाराजगी

चमियाणा क्षेत्र के स्थानीय निवासियों ने घटना पर गहरी चिंता जताई है। उनका कहना है कि अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थान पर इस तरह की लापरवाही अस्वीकार्य है। कई लोगों ने कहा कि यदि मानव अंग खुले में घूमते कुत्तों के मुंह में दिखाई देंगे तो इससे संक्रमण फैलने का खतरा भी बढ़ सकता है। कुछ सामाजिक संगठनों ने भी स्वास्थ्य विभाग से इस मामले में पारदर्शी जांच की मांग की है। उनका कहना है कि दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न हो।

संक्रमण और स्वास्थ्य सुरक्षा का खतरा

चिकित्सकों का मानना है कि मानव अंग खुले वातावरण में आने से संक्रमण फैलने की आशंका बढ़ जाती है। हालांकि अस्पताल प्रशासन का कहना है कि अंग पहले से पैक किया गया था, लेकिन कुत्ते द्वारा उसे बाहर ले जाने की घटना निश्चित रूप से चिंताजनक है। विशेषज्ञों के अनुसार, अस्पताल परिसर में आवारा पशुओं की आवाजाही भी एक गंभीर समस्या है। इससे न केवल स्वच्छता प्रभावित होती है बल्कि मरीजों की सुरक्षा पर भी खतरा मंडराता है।

आगे क्या कार्रवाई?

अस्पताल प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। साथ ही बायोमेडिकल वेस्ट प्रबंधन प्रणाली की समीक्षा भी की जाएगी ताकि भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न हो।स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने भी मामले पर नजर बनाए रखी है। यदि जांच में गंभीर लापरवाही साबित होती है तो संबंधित एजेंसी या कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई संभव है।

सिस्टम पर बड़ा सवाल

यह घटना केवल एक अस्पताल तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे स्वास्थ्य तंत्र के लिए चेतावनी है। बायोमेडिकल वेस्ट का सुरक्षित प्रबंधन किसी भी अस्पताल की प्राथमिक जिम्मेदारी होती है। यदि इस प्रक्रिया में जरा सी भी ढिलाई बरती जाती है तो उसके परिणाम बेहद गंभीर हो सकते हैं। शिमला जैसे प्रमुख शहर में स्थित एक बड़े सरकारी अस्पताल में इस तरह की घटना का सामने आना चिंताजनक है। अब सभी की निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं।

स्वास्थ्य विभाग पर उठे गंभीर सवाल 

Atal Institute of Medical Super Speciality में सामने आई यह घटना स्वास्थ्य व्यवस्था में मौजूद खामियों को उजागर करती है। एक ओर जहां अस्पताल जीवन बचाने का कार्य करते हैं, वहीं दूसरी ओर ऐसी लापरवाही उनकी साख पर सवाल खड़े करती है। प्रशासन ने जांच और कार्रवाई का भरोसा दिया है, लेकिन आम जनता यह जानना चाहती है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाएंगे।
फिलहाल, यह मामला पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बना हुआ है और स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर बहस छिड़ गई है।

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