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March 14, 2026

CAPF अधिकारियों का बढ़ता असंतोष: सांसदों से दबाव बनाने की अपील

The CSR Journal Magazine
केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) के अधिकारियों में बढ़ता असंतोष अब संसद में चर्चा का विषय बन गया है। इन अधिकारियों ने सांसदों से अपील की है कि वे इस मुद्दे में हस्तक्षेप करें और सुप्रीम कोर्ट के आदेश को जल्द से जल्द लागू करवाएं। अधिकारियों का यह भी कहना है कि यदि यह फैसला जल्द नहीं लागू हुआ, तो इसका सीधा असर 13 हजार अधिकारियों पर पड़ेगा। इस समय CAPF के अधिकारियों का मनोबल लगातार गिर रहा है, जो हमारी आंतरिक सुरक्षा के लिए चिंता का विषय है।

संसद में उठी CAPF की बात

समाजवादी पार्टी के सांसद राम गोपाल यादव ने राज्यसभा में CAPF अधिकारियों के मुद्दे को उठाया। उनका कहना था कि ये अधिकारी न केवल देश की संसद और सीमाओं की सुरक्षा करते हैं, बल्कि औद्योगिक प्रतिष्ठानों और एयरपोर्ट की सुरक्षा भी सुनिश्चित करते हैं। लेकिन, आश्चर्यजनक है कि इन अधिकारियों को अपने पहले प्रमोशन के लिए 10 से 15 साल का लंबा इंतज़ार करना पड़ता है। यह स्थिति निराशाजनक है, जिससे अधिकारियों का मनोबल गिर रहा है।

सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला

CAPF अधिकारियों ने ज्ञापन में बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल 23 मई को निर्णय लिया था कि CAPF के ग्रुप-A कार्यकारी कैडर अधिकारियों को 1986 से Organised Group A Services (OGAS) का सदस्य माना जाएगा। कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिए थे कि वह 6 महीने के भीतर सेवा और भर्ती नियमों में बदलाव करे। साथ ही, IG स्तर तक आईपीएस अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति को चरणबद्ध तरीके से कम करने की भी बात की गई थी।

गृह मंत्रालय की समीक्षा याचिका खारिज

गृह मंत्रालय की ओर से जो समीक्षा याचिका दायर की गई थी, उसे 28 अक्टूबर को सूर्यकांत की बेंच ने खारिज कर दिया। इससे यह मामला अंतिम और बाध्यकारी हो गया। लेकिन अब CAPF अधिकारियों का कहना है कि अदालत द्वारा निर्धारित समयसीमा के बावजूद सेवा नियमों में बदलाव और कैडर समीक्षा नहीं की गई है। इस कारण अधिकारियों ने 6 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट में अवमानना याचिका दाखिल की।

सुरक्षा बलों का मनोबल महत्वपूर्ण

अब CAPF कैडर के अधिकारियों ने सांसदों से अपील की है कि वे इस मामले में सक्रियता दिखाएं और सुप्रीम कोर्ट के आदेश को लागू करवाने में मदद करें। अधिकारियों का मानना है कि यदि निर्णय जल्दी नहीं लागू होता है, तो न केवल 13 हजार अधिकारियों को नुकसान होगा, बल्कि इससे देश की सुरक्षा से जुड़े इन बलों का मनोबल भी प्रभावित होगा।

CAPF बलों की कठिनाइयाँ

CAPF अधिकारियों का कहना है कि हाल ही में आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले से उन्हें न्याय की उम्मीद बंधी थी। लेकिन अब संभावित नए बिल के संबंध में कई सवाल उठ रहे हैं। ये अधिकारी और जवान हमारे देश के सबसे कठिन इलाकों में काम करते हैं। कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ अभियान, मध्य भारत में नक्सल विरोधी ऑपरेशन और सीमाओं की सुरक्षा यही बल करते हैं। ऐसे में उनके अधिकारों की रक्षा करना आवश्यक है।

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