युद्धविराम के बाद ईरान में राहत का माहौल, तेहरान की सड़कों पर जश्न और उम्मीदें

The CSR Journal Magazine
अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम के एलान के बाद ईरान में राहत और खुशी का माहौल देखने को मिल रहा है। तेहरान में लोग सड़कों पर जश्न मनाते नजर आए, वहीं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस फैसले को शांति की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

युद्धविराम के बाद तेहरान में जश्न और राहत

युद्धविराम की घोषणा के बाद ईरान की राजधानी तेहरान में लोगों ने खुशी जाहिर की। इंकलाब स्क्वायर पर बड़ी संख्या में लोग जमा हुए और शांति की उम्मीद के साथ जश्न मनाया। कई लोग भावुक भी नजर आए, जिनकी आंखों में युद्ध के खत्म होने की राहत साफ दिखी। लंबे तनाव के बाद आम नागरिकों को राहत की सांस मिली है।

ईरान की शर्तें और कूटनीतिक पहल

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची ने कहा कि अगर ईरान पर हमले पूरी तरह बंद होते हैं, तो उनकी सेना भी अपनी रक्षात्मक कार्रवाई रोक देगी। ईरान ने युद्धविराम के लिए 10 शर्तें रखी थीं। दावा किया जा रहा है कि अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इन शर्तों को बातचीत के आधार के रूप में स्वीकार किया है।

इसके साथ ही अराग़ची ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री और फील्ड मार्शल को इस समझौते में भूमिका निभाने के लिए धन्यवाद भी दिया।

ट्रंप का बयान ‘ईरान अब पुनर्निर्माण कर सकता है’

डोनाल्ड ट्रंप ने युद्धविराम के बाद कहा कि यह दुनिया में शांति के लिए बड़ा दिन है। उन्होंने संकेत दिया कि ईरान अब अपने पुनर्निर्माण का काम शुरू कर सकता है और अमेरिका इसमें सहयोग करने के लिए तैयार रहेगा।

ट्रंप ने यह भी कहा कि होर्मुज़ स्ट्रेट में ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने में अमेरिका मदद करेगा और आने वाला समय मिडिल ईस्ट के लिए “सुनहरा दौर” साबित हो सकता है। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि आर्थिक सहायता किस स्तर तक दी जाएगी।

इसराइल का समर्थन, लेकिन लेबनान पर अलग रुख

इसराइल ने अमेरिका और ईरान के बीच हुए युद्धविराम को स्वीकार कर लिया है, लेकिन उसने साफ किया है कि यह समझौता लेबनान पर लागू नहीं होगा।

इसराइल ने कहा कि वह इस फैसले का समर्थन करता है, बशर्ते ईरान होर्मुज़ स्ट्रेट को तुरंत खोले और अन्य देशों पर हमले बंद करे। साथ ही, इसराइल ने यह भी दोहराया कि ईरान को परमाणु हथियार, मिसाइल और आतंक के खतरे से दूर रखना जरूरी है।

अमेरिका-ईरान युद्धविराम ने फिलहाल तनाव को कम कर दिया है और क्षेत्र में शांति की उम्मीद जगाई है। हालांकि, कई मुद्दे अभी भी अनसुलझे हैं, खासकर लेबनान और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर। आने वाले दिनों में कूटनीतिक बातचीत इस समझौते की स्थिरता तय करेगी ।

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