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आरईसी के सीएसआर से 5 हज़ार दिव्यांगजन होंगे सशक्त

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आरईसी के 10 करोड़ के सीएसआर से 5 हज़ार दिव्यांगजन होंगे सशक्त
 
दिव्यांगजनों को सशक्त बनाने के लिए आरईसी लिमिटेड सामने आया है। आरईसी लिमिटेड (REC Limited) अपने सीएसआर फंड (CSR Fund) से दिव्यांगजनों को मजबूत बनाने की पहल की है। आरईसी लिमिटेड की कॉरपोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी की शाखा आरईसी फाउंडेशन (REC Foundation) ने भारतीय कृत्रिम अंग विनिर्माण निगम (Artificial Limbs Manufacturing Corporation of India (ALIMCO) के साथ एक एमओए पर हस्ताक्षर किए हैं। इसके तहत आरईसी देश के 25 स्थानों पर “दिव्यांगजनों को सहायता और सहायक उपकरणों के वितरण” की एक परियोजना के लिए 10 करोड़ रुपये की सहायता प्रदान करेगी।

आरईसी के इस सीएसआर पहल से 5 हज़ार दिव्यांगजन होंगे सशक्त

आरईसी के 10 करोड़ के सीएसआर से समाज के वंचित वर्गों के 5,000 से अधिक लोगों के लाभान्वित होने की उम्मीद है। इस परियोजना का मकसद दिव्यांगजनों को सशक्त बनाना, उनमें फिर से आत्मविश्वास पैदा करना और उनकी कार्यात्मक क्षमताओं में सुधार करना है। आम तौर पर ये सहायक उपकरण लंबे समय तक चलने वाले होते हैं और उन्हें बाहर ज्यादा रखरखाव की जरूरत नहीं होती है। गौरतलब है कि REC Foundation के सीएसआर से समाज में सकारात्मक बदलाव आएगा और दिव्यांगजन सशक्तिकरण को एक बल मिलेगा।

दिव्यांगजन को सशक्त बनाने के लिए आरईसी की ये सीएसआर सराहनीय

आरईसी लिमिटेड, मिनिस्ट्री ऑफ़ पावर के तहत साल 1969 में स्थापित सार्वजनिक क्षेत्र की एक महारत्न कंपनी है (PSU in India)। यह एक गैर-बैंकिंग फाइनेंसियल कंपनी है, जो पूरे भारत में विद्युत क्षेत्र के वित्तपोषण और विकास पर ध्यान केंद्रित करती है। यह राज्य विद्युत बोर्डों, राज्य सरकारों, केंद्र व राज्य विद्युत कंपनियों और पावर क्षेत्र के इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट में फाइनेंसियल सपोर्ट करती है। आरईसी की मदद से भारत में हर चौथा बल्ब रोशन होता है।

REC Foundation और ALIMCO के बीच हुआ समझौता

वहीं अगर बात करें भारतीय कृत्रिम अंग विनिर्माण निगम ( Artificial Limbs Manufacturing Corporation of India) की तो ये भारत सरकार के सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के अधीन दिव्यांगजन सशक्तिकरण के लिए एक Public Sector Undertaking है। इसकी 100 फीसदी स्वामित्व भारत सरकार के पास है। इसका मुख्य उद्देश्य जरूरतमंद व्यक्तियों विशेष रूप से दिव्यांग रक्षा कर्मियों, अस्पतालों और ऐसे अन्य कल्याणकारी संस्थानों को उचित लागत पर कृत्रिम अंगों और सहायता व सहायक उपकरणों की उपलब्धता, उपयोग, आपूर्ति और वितरण को बढ़ावा देने के साथ प्रोत्साहित करना व विकसित करना है। इसके अलावा इसके प्रमुख उद्देश्यों में कृत्रिम अंगों और सहायता व सहायक उपकरणों के विनिर्माण को लेकर केंद्र स्थापित करना है, जिनका उपयोग ऐसी वस्तुओं के निर्माण के लिए या उन्हें सुविधाजनक बनाने में किया जा सकता है।