‘मैं डरा हुआ हूं, कोई गलती नहीं कर सकता’ – ‘अयोध्या की रामलीला’ में भगवान राम का किरदार निभाने पर बोले रवि किशन
भोजपुरी सिनेमा के सुपरस्टार और गोरखपुर से भाजपा सांसद रवि किशन विश्व प्रसिद्ध ‘अयोध्या की रामलीला’ में भगवान श्री राम का मुख्य किरदार निभाएंगे। नई दिल्ली में 19 और 20 अक्टूबर 2026 को आयोजित होने वाले इस भव्य मंचन में रवि किशन पहली बार मर्यादा पुरुषोत्तम के रूप में दर्शकों के सामने आएंगे। इस ऐतिहासिक भूमिका को लेकर अभिनेता नर्वस भी हैं और भावुक भी। उन्होंने इसे केवल एक अभिनय नहीं, बल्कि अपने जीवन की सबसे बड़ी आध्यात्मिक जिम्मेदारी बताया है। आइए इस विशेष प्रस्तुति और रवि किशन की अनूठी तैयारियों पर एक विस्तृत रिपोर्ट पढ़ते हैं।
मर्यादा पुरुषोत्तम के रूप में रवि किशन का महा-मंचन
सांस्कृतिक भव्यता और आस्था के प्रतीक ‘अयोध्या की रामलीला’ इस वर्ष एक नए रूप और नए किरदारों के साथ दर्शकों के दिलों में उतरने के लिए तैयार है। इस साल की सबसे बड़ी घोषणा ने देश-दुनिया के दर्शकों का ध्यान खींचा है—बहुमुखी प्रतिभा के धनी अभिनेता और लोकसभा सांसद रवि किशन इस बार मंच पर साक्षात भगवान श्री राम का चरित्र जीवंत करेंगे। नई दिल्ली में आयोजित होने जा रहे दो दिवसीय इस विशेष मंचन को लेकर सांस्कृतिक गलियारों में जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है। रवि किशन के लिए यह भूमिका इसलिए भी बेहद अनूठी है क्योंकि वे लंबे समय से मर्यादा पुरुषोत्तम का किरदार निभाना चाहते थे। अपनी इस इच्छा के पूरा होने पर प्रतिक्रिया देते हुए अभिनेता ने मीडिया से बातचीत में खुलकर अपने विचार और भीतर चल रही घबराहट को साझा किया।
“अंदर से डरा हुआ हूँ”: रवि किशन ने बयां की अपनी नर्वसनेस
चिल्लाते संवादों, कड़क मिजाज वाले एक्शन और सिनेमाई पर्दे पर दशकों का अनुभव रखने वाले रवि किशन ने स्वीकार किया कि कैमरे के सामने अभिनय करने की तुलना में इस बार मंच पर उन्हें कहीं ज्यादा डर और घबराहट महसूस हो रही है। एक विशेष साक्षात्कार में उन्होंने कहा: “जीवन में पहली बार प्रभु श्री राम का रूप धारण करने का परम सौभाग्य मिला है। सच कहूँ तो मैं अंदर से बहुत डरा हुआ हूँ! मेरा मानना है कि एक सच्चे कलाकार के लिए मंच पर जाने से पहले यह डर और मर्यादा के प्रति सम्मान होना बहुत जरूरी है। यह साधारण अभिनय नहीं है; यह भगवान श्री राम का चरित्र है। मेरे अवचेतन मन में लगातार यह बात चल रही है कि मुझसे मंच पर कोई भी छोटी सी भूल न हो जाए।” उन्होंने आगे कहा कि वे ईश्वर से लगातार प्रार्थना कर रहे हैं कि वे स्वयं उनके शरीर और वाणी में वास करें, ताकि वे इस पावन चरित्र को पूरी शालीनता, गरिमा और दिव्यता के साथ दर्शकों के समक्ष प्रस्तुत कर सकें।
परशुराम से राम तक का सफर: कलात्मक यात्रा का शीर्ष पड़ाव
यह पहला मौका नहीं है जब रवि किशन ‘अयोध्या की रामलीला’ के मंच से जुड़े हैं। वे इस भव्य रामलीला के इतिहास में कई महत्वपूर्ण किरदार निभा चुके हैं। इससे पहले वे मंच पर उग्र स्वभाव वाले भगवान परशुराम, प्रभु के अनन्य भक्त केवट, निषादराज और भरत जैसी जटिल भूमिकाओं को सफलतापूर्वक निभाकर दर्शकों की खूब वाहवाही बटोर चुके हैं। बचपन के दिनों को याद करते हुए रवि किशन ने बताया कि उन्होंने अपने शुरुआती दिनों में माता सीता का किरदार भी निभाया था, और एक टीवी धारावाहिक में वे भगवान श्री कृष्ण के रूप में भी नजर आए थे। लेकिन उनका कहना है कि राम का चरित्र इन सबसे सर्वथा अलग है। उनके अनुसार, राम के चेहरे पर दिखने वाली सौम्यता, वाणी का संयम और आँखों की एकाग्रता को प्रदर्शित करना किसी भी अभिनेता के लिए सबसे कठिन परीक्षा है।
कायाकल्प और कठिन साधना: राममय हुए अभिनेता
भगवान राम के रूप में खुद को ढालने के लिए रवि किशन कड़े अनुशासन और आध्यात्मिक साधना का पालन कर रहे हैं। संयोगवश, रामलीला की तैयारियां शारदीय नवरात्रि के पावन दिनों के बीच चल रही हैं। रवि किशन ने बताया कि वे नवरात्रि का नौ दिनों का कठिन व्रत रख रहे हैं। वे पूर्णतः शाकाहारी भोजन ले रहे हैं और एक विशेष डाइट चार्ट का पालन कर रहे हैं ताकि खुद को शारीरिक रूप से दुबला, फुर्तीला और सौम्य दिखा सकें। चरित्र की प्रामाणिकता को बनाए रखने के लिए वे मंच पर जाने से पहले अपनी मूंछें भी साफ (शेव) करेंगे, ताकि प्रभु राम के पारंपरिक और पौराणिक स्वरूप को पूरी तरह से अपनाया जा सके। वे अपने व्यवहार को बेहद शांत और नियंत्रित रखने का अभ्यास कर रहे हैं, जिससे मंच पर उनकी संवाद अदायगी में राम जैसी शालीनता नजर आए।
वैश्विक स्तर पर होगा लाइव प्रसारण: 50 करोड़ दर्शकों की उम्मीद
‘अयोध्या की रामलीला’ दुनिया की सबसे बड़ी और सबसे ज्यादा देखी जाने वाली रामलीलाओं में शुमार है। आयोजकों के अनुसार, इस वर्ष दूरदर्शन (Doordarshan), प्रमुख ओटीटी प्लेटफॉर्म्स (OTT) और यूट्यूब लाइव स्ट्रीमिंग के माध्यम से दुनिया भर में इसका सीधा प्रसारण किया जाएगा। अनुमान लगाया जा रहा है कि देश और विदेश में बसे लगभग 50 करोड़ से अधिक लोग इस महा-मंचन के साक्षी बनेंगे। इतने बड़े वैश्विक दर्शक वर्ग के सामने लाइव परफॉर्म करना रीटेक-मुक्त अभिनय की मांग करता है, जो रवि किशन की घबराहट और जिम्मेदारी को और बढ़ा देता है।
मंच पर सितारों का जमघट
इस वर्ष की रामलीला कई मायनों में ऐतिहासिक होने जा रही है। जहां रवि किशन भगवान राम के रूप में नजर आएंगे, वहीं माता सीता के किरदार के लिए मिस यूनिवर्स इंडिया को चुना गया है, जो इस मंचन में ग्लैमर के साथ-साथ पारंपरिक मर्यादा का अनूठा मिश्रण पेश करेंगी। इसके अलावा, रावण के रूप में वरिष्ठ अभिनेता अरुण बख्शी, भगवान शिव की भूमिका में विंदु दारा सिंह और देवर्षि नारद के रूप में अवतार गिल जैसे अनुभवी कलाकार मंच की शोभा बढ़ाएंगे।
एक कलाकार और जनप्रतिनिधि का संकल्प
एक जनप्रिय राजनेता और भोजपुरी फिल्म उद्योग के दिग्गज होने के नाते रवि किशन का यह कदम नई पीढ़ी को सनातन संस्कृति और कला से जोड़ने की दिशा में बेहद अहम माना जा रहा है। उन्होंने कहा कि कला के माध्यम से अपनी संस्कृति की सेवा करना उनके लिए सबसे बड़ा पुरस्कार है। आगामी 19 और 20 अक्टूबर को नई दिल्ली का यह मंच न केवल रवि किशन की अभिनय क्षमता की अग्निपरीक्षा लेगा, बल्कि दर्शकों को भक्तिरस से सराबोर करने का एक अविस्मरणीय अवसर भी प्रदान करेगा।
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