रेलवे ट्रैक में करंट आता है या नहीं? जानें कितना खतरनाक है

The CSR Journal Magazine
जब आप ट्रेन में सफर करते हैं, तो शायद आपने रेलवे ट्रैक को देखा होगा। उपरी लोहे की पटरियां, नीचे की स्लीपर और चारों ओर पत्थर। पर क्या आपने कभी सोचा कि क्या इन पटरियों में करंट आता है? क्या सभी ट्रैक पर हमेशा बिजली होती है? अगर नहीं, तो रेलवे ट्रैक पर उतरना इतना खतरनाक क्यों माना जाता है? असल में, हर रेलवे ट्रैक में हमेशा करंट नहीं होता। लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि ट्रैक पर उतरना सुरक्षित है।

ट्रेन की पटरियों में करंट का स्रोत

रेलवे में चलने वाली इलेक्ट्रिक ट्रेनों को मुख्यतः ऊपर लगे बिजली के तारों से करंट मिलता है। ये तार 25,000 वोल्ट तक की बिजली प्रदान करते हैं। ट्रेन के पैनटोग्राफ नामक उपकरण से ये बिजली ली जाती है। लेकिन पटरियों में हमेशा करंट नहीं होता है। कुछ पटरियों के आस-पास बिजली से जुड़े उपकरण होते हैं जिनसे खतरा उत्पन्न हो सकता है।

क्यों होता है करंट रेलवे ट्रैक में?

रेलवे ट्रैक में करंट के कई कारण होते हैं। पहला, सिग्नलिंग सिस्टम जिसमें पटरी को बिजली सर्किट का हिस्सा बनाया जाता है। दूसरा, इलेक्ट्रिक ट्रेन की वापसी करंट। तीसरा, पटरी के आस-पास के इलेक्ट्रिकल उपकरण जो तकनीकी खराबी के कारण खतरा पैदा कर सकते हैं। इन सब वजहों से यह कहना सुरक्षित नहीं है कि पटरी को छूना बिल्कुल ठीक है।

पटरी छूने का खतरा

अगर पटरी में हमेशा करंट नहीं होता, तो उसे छूना खतरनाक क्यों है? एक कारण है करंट लगने का खतरा। उपरी तारों में उच्च वोल्टेज होता है जिससे संपर्क में आने पर जानलेवा करंट लग सकता है। दूसरा, इलेक्ट्रिक ट्रेन की बिजली का कुछ करंट वापस पटरी से गुजरता है। यह सामान्यत: सुरक्षित होता है, लेकिन खराबी की स्थिति में ये भी खतरनाक हो सकता है।

क्या ट्रेन गुजरने के बाद पटरी छूना सुरक्षित है?

यह मानना गलत है कि ट्रेन के गुजरने के बाद पटरी सुरक्षित हो जाती है। किसी भी समय दूसरी ट्रेन आ सकती है। इसके अलावा, संपर्क में बिजली से जुड़े उपकरणों की स्थिति की जानकारी आम व्यक्ति को नहीं होती। इसलिए, पटरी पर उतरना या पार करना हमेशा खतरनाक है।

पटरी पार करने का सही तरीका क्या है?

दूसरे प्लेटफॉर्म पर जाने के लिए हमेशा फुट ओवरब्रिज या अंडरपास का उपयोग करें। कभी भी ट्रेन के नीचे से निकलने या उसके पास जाने की कोशिश न करें। अगर आपको पटरी पर टुटा हुआ तार दिखे तो तुरंत उससे दूर रहें और रेलवे कर्मचारियों को सूचित करें। यह न भूलें कि बच्चों को भी रेलवे ट्रैक से दूर रखना चाहिए।

सुरक्षा का हर कदम उठाना जरूरी

रेलवे ट्रैक में हमेशा करंट नहीं होता, लेकिन कुछ लाइनों में इसे रिटर्न करंट की तरह प्रयोग किया जाता है। साथ ही, सिग्नलिंग सिस्टम भी इनमें विद्युत सिग्नल का उपयोग करता है। ट्रैक की सुरक्षा किसी भी स्थिति में सुनिश्चित करनी चाहिए। इसलिए, हमेशा सुरक्षित तरीके अपनाएं और रेलवे ट्रैक को छूने से बचें।

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