सबसे तेजी से बढ़ रहा ये कैंसर, 84% भारतीयों को नहीं पता जांच हुई या नहीं

The CSR Journal Magazine
कैंसर की बीमारियां आजकल तेजी से बढ़ रही हैं। इनमें से एक कैंसर, प्रोस्टेट कैंसर, बेहद तेजी से फैल रहा है। हाल ही में हुए एक सर्वे में यह बात सामने आई है कि 84% पुरुषों को यह नहीं पता कि उनकी कभी जांच हुई है या नहीं। यह स्थिति चिंताजनक है और इसे गंभीरता से लेने की आवश्यकता है।

सर्वे की चौंकाने वाली बातें

हाल ही में 45 वर्ष और उससे ज्यादा उम्र के 1,036 पुरुषों पर किए गए एक राष्ट्रीय सर्वेक्षण में पाया गया कि 10 में से 6 पुरुषों को यह नहीं पता है कि उनकी प्रोस्टेट कैंसर की जांच हुई है या नहीं। यही नहीं, 84% लोग या तो अपनी जांच की स्थिति को लेकर अनिश्चित हैं या फिर उन्हें लगता है कि जांच की जरूरत नहीं है। यह कैंसर लगातार खतरनाक बनता जा रहा है।

जागरूकता की कमी

हील फाउंडेशन और साइजेन ग्लोबल इनसाइट्स एंड कंसल्टिंग द्वारा किए गए इस सर्वे में दिल्ली एनसीआर, तमिलनाडु, कर्नाटक, तेलंगाना और महाराष्ट्र के पुरुषों को शामिल किया गया। सर्वेक्षण में पाया गया कि 68.9% पुरुष प्रोस्टेट कैंसर के एक भी रिस्क कारक का नाम नहीं बता सके। केवल 13.2% ने पारिवारिक इतिहास को एक जोखिम कारक के रूप में पहचाना।

स्वास्थ्य जांच की अनदेखी

लगभग 75% का मानना था कि प्रोस्टेट कैंसर की निगरानी केवल 50 वर्ष या उसके बाद शुरू होनी चाहिए। मैक्स हेल्थकेयर के डॉ देवव्रत आर्या के अनुसार, यह निष्कर्ष प्रोस्टेट कैंसर के संबंध में जागरूकता की कमी को दर्शाता है। जब लगभग 10 में से 7 पुरुष एक भी जोखिम कारक की पहचान नहीं कर सकते, तो यह स्पष्ट है कि प्रोस्टेट स्वास्थ्य को नियमित स्वास्थ्य संबंधी बातचीत का हिस्सा बनाना जरूरी है।

जांच की स्थिति पर सवाल

सर्वे में यह भी सामने आया कि लगभग दो-तिहाई उत्तरदाताओं ने बताया कि वे हर वर्ष सामान्य स्वास्थ्य जांच करवाते हैं। फिर भी, 60.8% को अपनी प्रोस्टेट कैंसर जांच की स्थिति के बारे में पता नहीं था। केवल लगभग छह में से एक पुरुष ने बताया कि उसकी कभी जांच हुई है।

PSA टेस्ट की जानकारी

PSA (प्रोस्टेट-विशिष्ट एंटीजन) रक्त जांच के बारे में जागरूकता भी सीमित थी। केवल 31% ने इस जांच के बारे में सुना था और केवल 14% ने कभी विशेष रूप से इसकी मांग की थी। यह दर्शाता है कि पुरुष सामान्य स्वास्थ्य जांच में भाग ले रहे हैं, लेकिन प्रोस्टेट स्वास्थ्य पर चर्चा नहीं कर रहे हैं।

डॉक्टरों पर भरोसा

67% लोगों ने डॉक्टरों पर सबसे अधिक भरोसा जताया, फिर भी केवल 36% लोग ही सही रूप से यह पहचान पाए कि प्रोस्टेट कैंसर के लिए यूरोलॉजिस्ट उपयुक्त विशेषज्ञ हैं। 44% लोगों ने कहा कि वे उपचार शुरू करने से पहले दूसरी राय लेना चाहेंगे। यह सूचित निर्णय लेने की इच्छा को दर्शाता है।

संकोच और जानकारी की कमी

सर्वेक्षण में यह भी पाया गया कि प्रोस्टेट स्वास्थ्य के बारे में चर्चा करना कई पुरुषों के लिए कठिन है। 59.5% ने कहा कि वे डॉक्टर के साथ प्रोस्टेट स्क्रीनिंग या उपचार के बारे में बात करने में असहज महसूस करते हैं। केवल 18% ने कहा कि वे स्वयं पहल करके ऐसी बातचीत शुरू करेंगे।

ऑनलाइन जानकारी की खोज

हालांकि, 84% ने कहा कि वे स्वास्थ्य संबंधी जानकारी के लिए ऑनलाइन खोज करते हैं। 48% ने कहा कि परिवार या मित्रों ने प्रोस्टेट कैंसर के बारे में उनकी पहली बातचीत को प्रभावित किया। यह स्थिति दर्शाती है कि कई पुरुष वार्षिक स्वास्थ्य जांच करा रहे हैं, फिर भी उन्हें यह नहीं पता हो सकता कि प्रोस्टेट कैंसर की स्क्रीनिंग के बारे में चर्चा की गई थी या नहीं।

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