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February 25, 2026

Keralam: इतना आसान नहीं है नाम बदलने की प्रक्रिया, जानें कैसे होगा यह बदलाव

The CSR Journal Magazine
Process to change name of state: केरल का नाम बदलने की प्रक्रिया अब औपचारिक रूप से शुरू हो गई है। संविधान के अनुसार, किसी राज्य का नाम बदलने के लिए विशेष प्रक्रिया अपनानी होती है। यह प्रक्रिया संविधान के पहले शेड्यूल में फॉर्मल बदलाव के माध्यम से व्यापक रूप से की जाती है। आर्टिकल 3 के तहत, किसी भी राज्य का नाम, क्षेत्र या सीमा बदलने का निर्णय संसद के हाथ में होता है। इस बदलाव के लिए केंद्र सरकार को एक खास विधेयक तैयार करना होगा।

Process to change name of state: बिल का मंजूरी प्रक्रिया क्या है?

केंद्र सरकार द्वारा तैयार किए गए बिल को पहले राष्ट्रपति के पास भेजा जाएगा, जो इसे केरल विधानसभा को उसके विचार के लिए भेजेंगे। विधानसभा की राय के बाद बिल फिर से संसद में पेश किया जाएगा। संविधान के आर्टिकल 3 के अनुसार, राज्‍य की विधानसभा के विचार जरूरी नहीं हैं, यह बिल संसद द्वारा तय समय के अंदर पास हो सकता है।

संविधान और राष्ट्रपति की भूमिका

राष्ट्रपति को एक निश्चित समय सीमा के भीतर विधानसभा से अपनी राय प्राप्त करनी होती है। यदि विधानसभा किसी भी प्रकार का विरोध करती है, तो भी संसद इसे आगे बढ़ा सकती है। इसके बाद, अगर राष्ट्रपति बिल को मंजूरी देते हैं, तो यह कानून बन जाएगा। इस प्रक्रिया के अंतिम चरण में, संविधान के पहले और चौथे शेड्यूल में भी आवश्यक बदलाव होंगे।

राज्य की प्रतिक्रिया और जनसमुदाय का रुख

केरलम नाम को लेकर राज्य के नागरिकों में मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोग बदलाव के पक्ष में हैं, जबकि कुछ लोग इसे अनावश्यक मानते हैं। ऐसे में, देखना है कि इस बदलाव पर जनसंख्या की क्या राय बनेगी, और क्या यह नाम राज्य के विकास में सहायक साबित होगा।

आर्टिकल 3 और 4 का महत्व

संविधान के आर्टिकल 3 के तहत, किसी भी राज्य का नाम बदलने का बिल सिर्फ राष्ट्रपति की सिफारिश पर ही संसद में पेश किया जा सकता है। आर्टिकल 4 कहता है कि ऐसे कानूनों को विशेष संवैधानिक संशोधन की आवश्यकता नहीं होती। यह एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है, जिसके तहत बिल को पास करने के लिए केवल साधारण बहुमत की आवश्यकता होती है।

आगे का रास्ता

बिल के लोकसभा और राज्यसभा से पास होने के बाद इसे राष्ट्रपति के पास मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। यदि राष्ट्रपति इसे मंजूरी देते हैं, तो नाम परिवर्तन की प्रक्रिया औपचारिक रूप से पूरी होगी। इस समय, सभी कानूनी दस्तावेजों और अधिकृत वेबसाइट पर ‘केरलम’ का नाम शामिल किया जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया से केरल और उसके नागरिकों का नाम भी इतिहास में दर्ज होगा।

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