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April 3, 2025

Prevention of Blindness Week: आंखों के साथ न कीजिए कोई गुस्ताखी

Prevention of Blindness Week: हाल के कुछ वर्षों में भागदौड़ भरी जिंदगी और हमारी दिनचर्या में ऐसा बदलाव आ चुका है कि इसका सीधा असर हमारे स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। हमारे खानपान और कमजोरी का असर आंखों की रोशनी पर भी पड़ता है। यही कारण है कि पहले के दौर में जहां बुजुर्गों को चश्मे की जरूरत नहीं पड़ती थी, आज की जेनरेशन में बचपन में ही चश्मे की जरूरत होने लगी है। आंखों की रोशनी का कमजोर होना आज के समय में एक गंभीर विषय बन गया है, जिस बारे में सोचना बहुत ही जरूरी है।
दुनिया भर में दृष्टिबाधित व्यक्तियों की सटीक संख्या उपलब्ध नहीं है, लेकिन अनुमानित तौर पर 2025 में लगभग 25 करोड़ से अधिक लोग दृष्टिबाधित हैं, जिनमें से 3.9 करोड़ लोग पूरी तरह से अंधे हैं, जबकि 1.33 करोड़ से अधिक लोग आंशिक रूप से दृष्टिबाधित हैं। अकेले भारत में लगभग 2.5 करोड़ से अधिक लोग पूरी तरह से या आंशिक रूप से दृष्टिबाधित हैं। यह संख्या भारत की कुल आबादी का लगभग 2 प्रतिशत है।

Prevention of Blindness Week

1 अप्रैल से 7 अप्रैल तक, भारत सरकार द्वारा दृष्टिहीनता निवारण सप्ताह (Prevention of Blindness Week) का आयोजन किया जाता है। सप्ताह भर चलने वाले इस अभियान के माध्यम से अंधेपन और दृष्टिहीनता के बारे में जागरूकता फैलाई जाती है। इसका उद्देश्य है देश भर में तरह- तरह के कार्यक्रम और गतिविधियों के माध्यम से दृष्टिहीन लोगों के जीवन और अधिकारों के बारे में जागरूकता फैलाना और अंधेपन को रोकने के बारे में जानकारी देना। इस पूरे सप्ताह में भारत सरकार दृष्टिहीन लोगों के रोज़गार के अवसरों में सुधार, उनकी देखभाल के लिए बेहतर स्वास्थ्य संस्थानों का निर्माण और विभिन्न स्वास्थ्य सम्बन्धी विषयों को कवर करती है।
Prevention of Blindness Week का इतिहास 1960 में Pandit Jawaharlal Nehru और राजकुमारी Amrit Kaur द्वारा नेशनल सोसाइटी फॉर द प्रिवेंशन ऑफ ब्लाइंडनेस ( NSFTPB) की स्थापना की गई। इसे पहली बार 1860 के सोसाइटी रजिस्ट्रेशन एक्ट (Society Ragistration Act) के तहत शुरू किया गया था। तब से, संगठन ने Rotary International और Sight Savers के साथ सक्रीय रूप से अंधेपन के बारे में जागरूकता फ़ैलाने और Disabilities पर काम किया है। साल 2020 में, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) का “दृष्टि का अधिकार” अभियान शुरू किया गया था, जिसमें भारत सरकार शामिल हुई और अंधेपन की रोकथाम पर जागरूकता फैलाने में भाग लिया। पहली बार दृष्टिहीनता निवारण सप्ताह (Prevention of Blindness Week) 1961 में मनाया गया था। भारत में अंधेपन के मुख्य कारण Cataract, Refractive Error, और Glaucoma हैं। दृष्टिहीनता निवारण सप्ताह एक महत्वपूर्ण अवसर है जिसमें हम सभी मिलकर अंधेपन को कम करने के लिए काम कर सकते हैं। Prevention of Blindness Week के दौरान कई कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जिनमें आंखों की जांच के मुफ्त शिविर का आयोजन, आंखों की देखभाल पर सेमिनार, Workshops और विभिन्न  जागरूकता अभियान शामिल हैं।

Prevention of Blindness Week का महत्त्व

 Prevention of Blindness Week – यह सप्ताह अंधेपन के बारे में जागरूकता फैलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह दिन दृष्टि बाधित लोगों के बारे में सोचने और उनके लिए कुछ करने के लिए एक रिमाइंडर की तरह काम करता है। Prevention of Blindness Week के पूरे सप्ताह भर आम लोगों को आंखों की देखभाल संबंधी शिक्षा प्रदान की जाती है। अभियान को सफल बनाने के लिए गैर सरकारी संगठनों, विभिन्न विभागों और प्रकाशन गृहों को एक साथ काम करने के लिए प्रेरित किया जाता है। इस अवसर पर आंखों की दुर्बलता के लिए जोखिमकारी कारकों के बारे में जागरूकता पैदा की जाती है। भारत का नेत्रहीन लोगों की सबसे बड़ी संख्या वाला देश होने के कारण, आम जनता को Trecoma, Glaucoma,  Vitamin A की कमी, Cataract और कुपोषण जैसे प्रमुख कारणों के बारे में जागरूकता प्रदान की जाती है।
अंधत्व से जुड़े सरकारी कार्यक्रमों में राष्ट्रीय अंधता नियंत्रण कार्यक्रम (NPCBVI) सबसे महत्वपूर्ण Programme है, जो 1976 में शुरू हुआ था, जिसका मकसद Blindness की व्यापकता को कम करना है। NPCBVI पूरी तरह केंद्र प्रायोजित योजना है। इस योजना के तहत ग्रामीण इलाकों में Cataract की मुफ़्त Surgery, नेत्र चिकित्सकों की उचित Training, और ग्रामीण क्षेत्रों में नेत्र देखभाल सेवाओं को मजबूत बनाना शामिल है। इस Programme के जरिए सरकार ने अंधता की व्यापकता दर को 1.4 से घटाकर 0.3 करने में सफलता पाई है।

दृष्टिहीनता से बचाव के लिए उपाय

अंधेपन से बचाव के लिए निम्नलिखित उपाय किए जा सकते हैं :
खानपान में Vitamins को करें शामिल – अगर इंसान का खानपान सही रहे तो किसी भी तरह की कोई बीमारी नहीं होगी। पौष्टिक और संतुलित आहार के माध्यम से इंसान स्वस्थ रहते हुए लंबे जीवन का सफर तय कर सकता है। आंखों के स्वास्थ्य के लिए Vitamin C, Vitamin E, Omega 3 Fatty Acids, Lutin और Zink जैसे पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है। इन पोषक तत्वों की आवश्यकता पूरी करने के लिए आपको अपने आहार में हरी पत्तेदार सब्जियां, मछली, अंडे, घी, Nuts, Pulses, Beans और अन्य Citrus Fruits को शामिल करना चाहिए।
Smoking को कहें ना – धूम्रपान यानी Smoking शरीर को कई तरह से नुकसान पहुंचा सकता है। यह आपके Lungs समेत आंखों की रोशनी के लिए भी बेहद हानिकारक है। कई अध्ययनों में यह बात सामने आई है कि Smoke करने से Dry Eyes, Macular Degeneration, Diabetic Retinopathy, Eye Syndrome और Cataract जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है। नियमित रूप से धूम्रपान करने वाले लोगों को आंखों से जुड़ी समस्याएं जरूर होती हैं। इसलिए आंखों की सेहत के लिए धूम्रपान से दूरी बनाए रखें।
UV Radiations से आंखों की रक्षा – तेज धूप में बाहर निकलते वक्त आंखों को सूर्य की हानिकारक पराबैंगनी किरणों से बचाना चाहिए। इन हानिकारक किरणों के संपर्क में आने से Macular Degeneration और Cataract का खतरा हो सकता है। इन किरणों से बचने के लिए, खासकर गर्मी के मौसम में आपको यूवी प्रोटेक्टर चश्मे का उपयोग करना चाहिए।
Laptop और Phone Screen से बनाएं दूरी – लैपटॉप या फोन की स्क्रीन पर ज्यादा समय बिताने से आंखों की रोशनी कम हो सकती है। बहुत देर तक Computer या Laptop और Mobile की स्क्रीन देखने के कारण आपकी नजर धुंधली हो सकती है। साथ ही सिरदर्द और कंधे में दर्द समेत कई स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। अगर आपको लैपटॉप पर ज्यादा देर तक काम करना है तो Anti Glare Screen का इस्तेमाल करें। हर दो घंटे के बाद आपको कम से कम 15 मिनट का ब्रेक लेना चाहिए।
Prevention of Blindness Week का मकसद है आपको ये बताना कि अपनी आंखों की जितनी देखभाल कर सकते हैं, करें। क्यूंकि आंखें सही सलामत हैं तो हमारे लिए ये खूबसूरत दुनिया है, वरना कुछ भी नहीं!

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