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January 27, 2026

मुनाफावसूली से कीमती धातुओं में तेजी के बाद ठहराव: सोना 1 फीसदी फिसला, चांदी में 7 फीसदी से ज्यादा गिरावट! 

The CSR Journal Magazine

 

चांदी 7 प्रतिशत से ज्यादा लुढ़की, सोना 1 प्रतिशत से अधिक फिसला! अंतरराष्ट्रीय संकेतों का घरेलू बाजार पर असर! आज अंतरराष्ट्रीय बाजार (COMEX) में सोने और चांदी की कीमतों में प्रभावशाली गिरावट देखने को  मिली है। हालांकि गिरावट के बावजूद सोना अभी भी $5,000 प्रति औंस के मनोवैज्ञानिक स्तर से ऊपर बना हुआ है। यह निवेशकों और बाजार के लिए एक अहम सेंटीमेंट संकेत है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार का असर: मुनाफावसूली से सोना-चांदी लुढ़के

अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेज मुनाफावसूली (Profit Booking) के दबाव में मंगलवार को सोना और चांदी की  कीमतों में जोरदार गिरावट दर्ज की गई। चांदी में 7 फीसदी से अधिक की बड़ी टूट देखने को मिली, जबकि सोना 1 फीसदी से ज्यादा फिसल गया। हालांकि, गिरावट के बावजूद सोना अब भी 5,000 डॉलर प्रति औंस के मनोवैज्ञानिक स्तर से ऊपर बना हुआ है, जो दीर्घकालिक निवेशकों के लिए मजबूती का संकेत माना जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय रुझानों का  असर घरेलू वायदा और हाजिर बाजार पर भी साफ दिखा।

सर्राफा बाजार की ताज़ा तस्वीर

अमेरिकी कमोडिटी एक्सचेंज (COMEX) सहित वैश्विक बाजारों में बीते सत्रों की तेज तेजी के बाद निवेशकों ने रिकॉर्ड ऊंचाई पर लाभ बुक करना शुरू किया। इसी का नतीजा रहा कि चांदी में तेज बिकवाली आई और भाव एक झटके में कई प्रतिशत टूट गए। सोने में भी सीमित लेकिन व्यापक स्तर पर बिकवाली देखी गई।

क्यों आई इतनी तेज गिरावट?

1) रिकॉर्ड स्तर और मुनाफावसूली– बीते हफ्तों में सोना-चांदी ऐतिहासिक ऊंचाइयों पर पहुंचे थे। ऐसे में अल्पकालिक निवेशकों ने लाभ सुरक्षित करने को प्राथमिकता दी।
2) डॉलर और ब्याज दर संकेत– अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डॉलर में मजबूती और अमेरिकी ब्याज दरों के रुख को लेकर बदले संकेतों ने भी कीमती धातुओं पर दबाव बनाया।
3) जोखिम धारणा में बदलाव– भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं में कुछ नरमी और इक्विटी बाजारों में आंशिक स्थिरता से सेफ-हेवन डिमांड थोड़ी कमजोर हुई, जिसका असर खासकर चांदी पर पड़ा।

घरेलू बाजार पर असर- MCX और हाजिर भाव

अंतरराष्ट्रीय गिरावट का असर एमसीएक्स (MCX) पर दिखा। सोना सीमित गिरावट के साथ ऊंचे स्तरों के  आसपास कारोबार करता रहा। चांदी अंतरराष्ट्रीय बाजार की नकल करते हुए तेज फिसलन के साथ उतार-चढ़ाव बढ़ा। हाजिर बाजार में भी ज्वैलर्स और स्टॉकिस्टों की सतर्कता बढ़ी रही। ऊंचे दामों पर मांग कमजोर दिखी, जबकि गिरावट पर चुनिंदा खरीदारी उभरी।

चांदी क्यों ज्यादा टूटी?

विशेषज्ञों के मुताबिक चांदी में औद्योगिक मांग और निवेश मांग, दोनों का मिश्रण होता है। सोने के मुकाबले चांदी में औद्योगिक उपयोग ज्यादा है, जैसे सोलर पैनल, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटो सेक्टर। जब वैश्विक आर्थिक वृद्धि को लेकर चिंता बढ़ती है, तो चांदी की मांग पर असर पड़ता है और गिरावट ज्यादा तेज हो जाती है। तेज तेजी के बाद जब जोखिम घटता है, तो चांदी में बिकवाली सोने से ज्यादा तेज हो जाती है। यही वजह है कि आज चांदी में 7 फीसदी से अधिक की गिरावट दर्ज हुई।

निवेशकों के लिए संकेत

 शॉर्ट टर्म: उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। तेज तेजी के बाद कंसोलिडेशन की संभावना।
 मीडियम से लॉन्ग टर्म: वैश्विक अनिश्चितताओं, महंगाई जोखिम और केंद्रीय बैंकों की नीतियों के चलते सोने का संरचनात्मक समर्थन कायम माना जा रहा है।
 रणनीति: एकमुश्त निवेश के बजाय चरणबद्ध खरीद (SIP/Phased Buying) और स्टॉप-लॉस के साथ ट्रेडिंग की सलाह।
आज की गिरावट भावनात्मक नहीं, बल्कि तकनीकी और मुनाफावसूली-प्रेरित है। जहां चांदी में तेज करेक्शन आया, वहीं सोना अब भी मजबूत आधार पर टिका दिखा। सोना-चांदी में मौजूदा उतार-चढ़ाव अस्थायी घबराहट नहीं, बल्कि रिकॉर्ड तेजी के बाद स्वाभाविक करेक्शन, डॉलर-ब्याज दर संकेत और वैश्विक परिस्थितियों का संयुक्त परिणाम है। निवेशकों को जल्दबाजी से बचते हुए वैश्विक संकेतों, डॉलर-ब्याज दरों और मांग-आपूर्ति के संतुलन पर नजर बनाए रखनी चाहिए।

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