भोपाल की ऐतिहासिक ज़मीन पर 25 साल बाद फ़ैसला! ढाई दशक तक चली क़ानूनी लड़ाई का आख़िर हुआ अंत ! पटौदी खानदान की बड़ी जीत, ज़िला अदालत ने खारिज किए सभी प्रतिद्वंद्वी दावे !
28 साल लंबे मुकदमे के बाद पटौदी परिवार की हुई जीत
करीब ढाई दशक तक चली अदालती लड़ाई के बाद आखिरकार बॉलीवुड अभिनेता और भोपाल रियासत के नवाब सैफ अली खान, उनकी मां शर्मिला टैगोर और बहनों के पक्ष में बड़ा और निर्णायक फ़ैसला आया है। भोपाल की ज़िला अदालत ने शुक्रवार को नायापुरा क्षेत्र की 16.62 एकड़ पुश्तैनी ज़मीन को लेकर चल रहे विवाद में पटौदी परिवार के अधिकारों को वैध ठहराते हुए सभी विरोधी दावों को सिरे से खारिज कर दिया।
1998 से चला आ रहा था ज़मीन का मुक़दमा
यह विवाद 1998 में तब शुरू हुआ, जब अकील अहमद और अन्य याचिकाकर्ताओं ने दावा किया कि यह ज़मीन 1936 में भोपाल रियासत के तत्कालीन शासक नवाब हमीदुल्लाह ख़ान द्वारा उन्हें ‘तोहफ़े’ (गिफ्ट) के रूप में दी गई थी। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि उक्त दान वैध था और उसी आधार पर वे मालिकाना हक़ जताते रहे।
अदालत की कड़ी टिप्पणी
लंबी सुनवाई और दस्तावेज़ों की पड़ताल के बाद अदालत ने याचिकाकर्ताओं के दावे को अविश्वसनीय बताया। अपने आदेश में अदालत ने स्पष्ट किया कि-
• कथित गिफ्ट के समर्थन में कोई ठोस और वैध दस्तावेज़ पेश नहीं किया गया।
• दावे में दशकों की देरी का कोई संतोषजनक कारण नहीं बताया गया।
• कानूनी स्वामित्व साबित करने में याचिकाकर्ता पूरी तरह असफल रहे।
इन आधारों पर अदालत ने याचिका को पूरी तरह खारिज कर दिया।
पटौदी परिवार और भोपाल की विरासत
भोपाल रियासत के आख़िरी शासक नवाब हमीदुल्लाह ख़ान के बाद उनकी बेटी बेग़म आबिदा सुल्तान पाकिस्तान चली गईं। इसके बाद उत्तराधिकार के तहत संपत्तियों का अधिकार उनकी बहन बेग़म साजिदा सुल्तान को मिला, जिनका विवाह नवाब इफ्तिख़ार अली ख़ान पटौदी से हुआ। इसी वंश परंपरा में सैफ अली खान, शर्मिला टैगोर और उनकी बेटियां उत्तराधिकारी हैं।
पटौदी परिवार का इतिहास केवल सियासत और रियासत तक सीमित नहीं रहा, बल्कि खेल, सिनेमा और सांस्कृतिक विरासत में भी उनकी अलग पहचान रही है। नवाब इफ्तिख़ार अली ख़ान भारतीय क्रिकेट के बड़े नाम रहे, वहीं सैफ अली खान ने सिनेमा में अपनी विशिष्ट जगह बनाई।
संपत्ति का महत्व
नायापुरा की यह 16.62 एकड़ ज़मीन भोपाल के पुराने और ऐतिहासिक इलाक़े में स्थित है, जिसकी क़ीमत और रणनीतिक महत्व दोनों ही बहुत अधिक माने जाते हैं। यही कारण है कि यह मामला वर्षों तक चर्चा में रहा और इसे मध्य भारत के सबसे चर्चित शाही संपत्ति विवादों में गिना गया।
पटौदी परिवार पर फ़ैसले का असर
अदालत के इस निर्णय से न केवल पटौदी परिवार की पुश्तैनी विरासत पर मुहर लगी है, बल्कि लंबे समय से चले आ रहे कानूनी असमंजस का भी अंत हुआ है। कानूनी जानकारों का मानना है कि यह फ़ैसला ऐसे मामलों में एक मज़बूत नज़ीर बनेगा, जहां बिना प्रमाण दशकों पुराने दावे किए जाते हैं। करीब 28 साल बाद आया यह फ़ैसला पाटौदी खानदान के लिए बड़ी राहत है- विरासत सुरक्षित, दावा ख़ारिज और इतिहास ने एक बार फिर अपना रास्ता तय कर लिया।
Long or Short, get news the way you like. No ads. No redirections. Download Newspin and Stay Alert, The CSR Journal Mobile app, for fast, crisp, clean updates!

